Thursday, February 22, 2024
spot_img
Homeआपकी बातभेड़ की खाल में भेड़िया यानी दलित चिंतक

भेड़ की खाल में भेड़िया यानी दलित चिंतक

किसी ने मुझसे पूछा की भेड़ की खाल में भेड़िया का उदाहरण दो। मैंने कहा आज के समाज में भेड़ की खाल में भेड़िया का सबसे सटीक उदाहरण “दलित चिंतक/विचारक” हैं। जो खाते इस देश का है, आरक्षण भी इस देश लेते है और गाली भी इस देश को ही देते है। कुछ उदाहरण द्वारा मैं इस तथ्य को समझाना चाहता हूँ।

1. दलित चिंतक हर हिन्दुत्ववादी को ब्राह्मणवाद, मनुवाद के नाम पर गाली देते हैं। इसमें वो हिन्दू भी शामिल हैं जो जातिवाद को नहीं मानते और परस्पर सहयोग से जातिवाद का नाश करना चाहते हैं।

2. दलित चिंतक पाकिस्तान ज़िंदाबाद, कश्मीर में आज़ादी जैसी मांगो को करने वाले अलगाववादियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। यह एक प्रकार का राष्ट्रद्रोह है। वे भारतीय सेना के कश्मीर में दिए गए योगदान को जनता से अनभिज्ञ रखकर भारत विरोधी नारेबाजी और सेना पर पत्थरबाजी करने वालों को महिमा मंडित करते दिखाई देते हैं।

3. दलित चिंतक भारतीय संस्कृति, वेद, दर्शन, उपनिषद आदि की पवित्र शिक्षाओं को जानते हुए भी विदेशी विद्वानों के घिसे-पिटे अधकचरे और भ्रामक अनुवादों को शोध के नाम पर रटते/गाते रहते हैं। उनका उद्देश्य प्राचीन महान आर्य संस्कृति को गाली देना होता हैं। जेएनयू जैसे संस्थानों से हर वर्ष शोध के नाम पर ऐसा कूड़ा कचरा ही छपता हैं।

4. भारतीय संविधान निर्माता डॉ अम्बेडकर द्वारा बनाये गए संविधान के आधार पर दोषी देश द्रोही अफ़जल गुरु, याकूब मेनन जैसो की फांसी का करना हमारे संविधान की अवमानना करने के समान हैं। इस प्रकार से ये भेड़िये डॉ अम्बेडकर के किये कराये पर पानी फेर रहे हैं।

5. डॉ अम्बेडकर को हैदराबाद के निज़ाम ने इस्लाम स्वीकार करने के लिए भारी प्रलोभन दिया था। उन्होंने देशभक्त के समान उसे सिरे से नकार दिया था। एनजीओ धंधे की आड़ में दलित चिंतक विदेशों से पैसा लेकर भारत को कमजोर बनाने में लगे हुए हैं। वे विदेशी ताकतों के इशारे पर देश तोड़क कार्य करते हैं।

6. कहने को दलित चिंतक अपने आपको महात्मा बुद्ध का शिष्य बताते हैं। अहिंसा का सन्देश देने वाले महात्मा बुद्ध के शिक्षा बीफ़ फेस्टिवल बनाकर गौमांस खाकर अपनी अहिंसा का साक्षात प्रदर्शन करते हैं। इनसे बड़े दोगले आपको देखने को नहीं मिलेंगे। क्योंकि ऐसी गतिविधि का उद्देश्य केवल और केवल सामाजिक एकता का नाश होता हैं।

7. जब भी देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे होते है। तब मुसलमान दंगाई यह भेद नहीं देखते की हिन्दू स्वर्ण हैं अथवा दलित। उनके लिए तो सभी काफ़िर हैं। दंगों में सभी स्वर्ण और दलित हिन्दुओं की हानि होती हैं। जमीनी हकीकत यही है। दंगे शांत होने पर दलित चिंतक दलितों को मुसलमानों द्वारा जो प्रताड़ित किया गया उसकी अनदेखी कर ‘मुज्जफरनगर अभी बाकि है’ जैसी वृत्तचित्रों का समर्थन करते है। इसे दलितों की पीठ पीछे छुरा घोंपना कहा जाये तो सटीक रहेगा।

8. मुसलमानों द्वारा लव जिहाद में फंसाकर स्वर्ण और दलित दोनों हिन्दुओं की लड़कियों का जीवन बर्बाद किया जाता हैं। इस सोची समझी साज़िश की अनदेखी कर दलित चिंतक लव जिहाद षड्यंत्र को कल्पना बताने वालों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े दिखाई देते है। इस पर आप ही टिप्पणी करे तो अच्छा है।

9. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने को डॉ अम्बेडकर गलत मानते थे। आज अधिकतर दलित चिंतक केवल नाम से हिन्दू हैं। वे धर्म परिवर्तन करने वालों का कभी विरोध नहीं करते और उनका खुला समर्थन करते हैं। इस प्रकार से उन्होंने डॉ अम्बेडकर को भी ठेंगा दिखा दिया।

10. कुछ राजनीतिक दल दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद में नारे लगाते हैं। डॉ अम्बेडकर द्वारा अपनी पुस्तक थॉट्स ओन पाकिस्तान में इस्लाम की मान्यताओं द्वारा जातिवाद की समस्या का समाधान होने का स्पष्ट निषेध किया था। डॉ अम्बेडकर ने पाकिस्तान बनने पर सभी दलितों को पाकिस्तान छोड़कर भारत आकर बसने के लिए कहा था। क्योंकि उन्हें मालूम था की इतिहास में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हिन्दू-बौद्ध समाज पर कैसे कैसे अत्याचार किये हैं। दलित चिंतक राजनीतिक तुच्छ लाभ के लिए मुस्लिम नेताओं के हाथ की कठपुतली बन डॉ अम्बेडकर की अवमानना करने से पीछे नहीं रहते।

यह कुछ उदाहरण हैं। आपको जितने भी वैदिक धर्म-देश और जाति के विरोध में देश में कार्य दिखेंगे उसमें भेड़ की खाल में भेड़िये आसानी से नज़र आ जायेंगे। आइये जातिवाद का नाश कर एक आदर्श समाज का निर्माण करे। जिसमें सभी एक दूसरे के साथ भ्रातृत्व व्यवहार करे।

#डॉ_विवेक_आर्य
#Ambedkar

(लेखक ऐतिहासिक व राजनीतिक विषयों पर शोधपूर्ण लेख लिखते हैं, इनकी कई पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी है)

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -spot_img

वार त्यौहार