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शुद्धि यज्ञ में अपने मुस्लिम कर्मचारियों को देखकर बिड़ला जी चौंक गए

बिरला लाइंस, दिल्ली में आर्य समाज का भवन तब मात्र एक प्लाट था, जो श्री घनश्याम दास बिरला जी द्वारा आर्य समाज को दानस्वरूप भेंट किया गया था । उसी प्लाट में तब मात्र एक चबूतरा सा ही बना हुआ था , जिस पर नियमित रूप से दैनिक यज्ञ एवं वेदोपदेश होता था । 1966 के दौरान उस चबूतरे पर उस दिन सांध्यकालीन यज्ञ में दो अप्रत्याशित यज्ञमान उत्सुकता और कौतूहल का विषय थे । भीड़ सामान्य दिनों की अपेक्षा कुछ अधिक ही हो चली थी । इतनी बड़ी संख्या से घिरे उस छोटे से चबूतरे पर हो रहे यज्ञ की ओर श्री बिरला जी का ध्यान गया तो उत्सुकतावश वे भी उधर हो लिए ….

परन्तु अब तक यह तो उनके लिए बहुत आश्चर्य और कुछ कुछ समझ से बाहर का विषय हो गया था । चबूतरे पर आर्यों द्वारा हो रहे यज्ञ के दोनों यज्ञमान असामान्य और धारणा के विपरीत वहीं पर ही उन्हीं की बिरला मिल के मुस्लिम कर्मचारी – काले खां और प्यारे खां थे । अपने मुस्लिम कर्मचारियों को आर्य समाज के चबूतरे पर हो रहे यज्ञ में यज्ञमान के रूप में देख कर वे आश्चर्यचकित थे ।

……. परन्तु यह क्या ? यह कोई समय दैनिक यज्ञ न हो कर विशेष यज्ञ हो रहा था , शुद्धिकरण यज्ञ । उसी यज्ञ में यज्ञमान बने बैठे काले खां और प्यारे खां यज्ञ के साथ अपने पूर्वजों के धर्म – सनातन वैदिक धर्म में लौट आए । काले खां, शुद्धि उपरांत कल्याण सिंह बन गए और प्यारे खां, प्यारे लाल बन गए थे । वैदिक धर्म की जय, आर्य समाज अमर रहे के घोष से आकाश गुंजायमान हो रहा था । मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी, योगेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज और महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज की जय के घोष से वहां का वातावरण नव उत्साह का संचार कर रहा था । दोनों यज्ञमान सपरिवार अपने पूर्वजों के धर्म पर लौट चुके थे ।

इसी उत्साहमय वातावरण को अनुभव कर श्री घनश्याम दास बिड़ला जी भी अभिभूत थे । वह आर्य समाज का प्लाट भी उन्हीं की देन था जहां आज कुछेक पीढ़ी पूर्व दो भूले भटके परिवार अब अपने घर वापस लौट चुके थे । बिड़ला जी , यज्ञ के ब्रह्मा और पुरोहित जी के पास गए और इस घटना का विवरण जानने के पश्चात गदगद हो वहीं पर ही दो घोषणाएं कर गए । जब उन्हें पता चला कि यह शुद्धियाँ आर्य समाज की ही संस्था, स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा स्थापित भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा के प्रयास से साकार हुई तो वहीं पर ही साथ लगते एक प्लाट को उन्होंने न केवल शुद्धि सभा के नाम कर दिया बल्कि वहां सभा के कार्यालय भवन के निर्माण हेतु आर्थिक योगदान की अपनी पहली आहुति भी दे दी ।

भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा का मुख्यालय आज उसी स्थान पर ही कर कार्य कर रहा है ।

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