Saturday, February 24, 2024
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कोटा जिले की कला,संस्कृति, साहित्य एवं इतिहास की पुस्तक प्रदर्शनी, टॉक शो एवं पाठक विमर्श कार्यक्रम

कोटावासी 15 फरवरी 2024 तक कर सकेंगे अवलोकन

कोटा। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे राजस्थान सरकार द्वारा भाषा एवं पुस्तकालय विभाग को प्रेषित 100 दिवसीय कार्य योजनान्तर्गत कोटा जिले की कला,संस्कृति, साहित्य एवं इतिहास की पुस्तक प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि इतिहासविद डॉ हुकम चंद जैन प्रोफेसर, अध्यक्षता साहित्यकार ज्ञान गंभीर, विशिष्ट अतिथि सागर आजाद,फ़ाउण्डर प्रेसीडेंट चेंप रीडर्स एसोशिएशन, रेणु सिंह “राधे” कहानीकार, कवि एवं साहित्यकार, सुनीता मेहरा प्रधानाचार्य राउमावि धुलेट, डॉ सीमा जैन व्याख्याता रसायन विज्ञान, गेस्ट ऑफ ऑनर कन्हैया लाल गोचर द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया।

डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोटा जिले के स्थानीय कला, संस्कृति एवं इतिहास के साहित्य का पाठको हेतु प्रचार प्रसार के लिए पुस्तक प्रदर्शनी एवं वार्ताओं का आयोजन 1 फरवरी 2024 से शुरू है और यह 15 फरवरी 2024 तक किया जा रहा है ताकि जिले के स्थानीय पाठकों को जिले की कला संस्कृति एवं इतिहास की जानकारी सुगमता से मिल सके तथा उनकी रुचि विकसित हो इसलिए जिले से संबंधित साहित्यिक लेखक, विशिष्ट कला एवं संस्कृति से जुड़े लेखक, विद्वान, विशेषज्ञ, प्रतिभाएं व आमजन पुस्तकालय में आमंत्रित है ताकि पाठकों को जिले की स्थानीय कला, संस्कृति एवं इतिहास की पुस्तकों की जानकारी हो सके।यह प्रदर्शनी स्थानीय लेखको, साहित्यकारो, इतिहासकारो एवं विधिन्न विधाओ के स्थानीय लेखको को आमेजन से रूबरू कराने के मकसद से प्रारम्भ की गई हे जिसका कोटावासी दिनांक 01 फरबरी से 15 फरबरी 2024 तक कर प्रात 11 से साँय 5 बजे तक अवलोकन कर सकेंगे।

कोटा में स्थानीय लोगों की भाषा और साहित्य का महत्वपूर्ण स्थान है। स्थानीय कविताएं, गीत और किस्से स्थानीय भाषा में बनाए जाते हैं और यह स्थानीय साहित्य को बढ़ावा देता है।कुछ खास किताबे स्याही के रंग – अभिषेक सिंह, बाल काव्य मंजूषा – डॉ गोपाल कृष्ण भट्ट “आकुल”, बहुत प्यार करते हे शब्द, तो हम क्या करे – डॉ कृष्णा कुमारी, राज भारत की चन्दन सी, मन मेरा गुलमोहर हुआ –ठीकम चंद अनजाना, लाड़बाई – जितेंद्र निर्मोही, सृजन, सौंदर्य एवं शृष्ठि – ए जमील कुरेशी, प्रीत – ओम नगर”अश्क”, छोर के छंद – भैया लाल व्यास, सार सतसई – पवन पहाड़िया, पंच सोपान – मेघना तरुण, द्रौपति – जितेंद्र निर्मोही, सुनों सिद्धायनी – अतुल कनक,मध्य शहर मे झील सुहानी – योगीराज योगी, अनुकरणीयम – मनोज गुप्ता, टहलता कवि – प्रतीक सिंह, आँगन मे नागफनी – कुँवर शिव भूषण सिंह गौतम, चिंतन के मौती -अशोक जैन मंथन, विदेश प्रवास एवं भारतीय सेवा – डॉ अर्पणा पाण्डेय, निर्गुण भजन माला – ताराचंद तपस्वी राज।

मुख्य अतिथि डॉ हुकम चंद जैन ने कहा कि कोटा का इतिहास ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से धनी है। जिले में कई प्राचीन स्थलों के होने के कारण यहां का इतिहास बहुतंत्री है। इसके इलाके में किए गए ऐतिहासिक घटनाओं ने इसे एक महत्त्वपूर्ण स्थान बनाया है।

खास पुस्तकों मे कोटा राज्य का इतिहास भाग – एक एवं भाग दो – डा० जगतनारायण, राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य – परम्परा एवं विरासत – डा० हुकुमचन्द्र जैन एवं डॉ नारायण लाल माली, कोटा एक विहंगम दृष्टि/ अद्भुत राजस्थान/ चंबल तेरी यही कहानी – डॉ. प्रभात कु. सिंघल, कोटा संभाग का जिलेवार सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक अध्ययन –डॉ मोहनलाल गुप्ता, हाड़ौती अंचल का राजस्थानी काव्य – जितेंद्र निर्मोही, हमे साँच ने मारा – महेंद्र नेह, पढे से पंडीत होये –डॉ गणेश तारे, भात भात का रंग – कमला कमलेश, पगफेरों (हाड़ौती काव्य संग्रे), चाँद निकलता तो होगा – डॉ नलिनी, माईण्ड फ्रेश (आत्म मंथन) –आचारी दहनराज शर्मा, पराक्रम की परीक्षा – जगदीश प्रसाद दाधीच, परीण्डो का बसेरा – सलीम अफरीदी, एक तेरा इशारा नाही – वेदा प्रकाश “पराकाश”, नागरिक चेतना – कृष्णा कुमारी, परीक्षा – जगदीय प्रसाद दाधीच परिंदों’ का बसेरा (शायरी) – सलीम आफरीदी एक तेरा इशारा नहीं है – वेद प्रकाश परकाश) कतरा-बहरा दरिया – साथी जाहनवी बैठी माई दिन छा – हरिचरण अहवाल, प्रीत, हाट – ओम नागर समेत अंबिका दत्त चतुर्वेदी, विजय जोशी, विश्वामित्र दाधीच, चांदशेरी, रामनारायण मीणा हलधर, श्यामा शर्मा, रेखा पंचोली समेत कई स्थानीय लेखको की पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया है।

विशिष्ट अतिथि सागर आजाद ने कहा कि कोटा जिला एक समृद्धि, शिक्षा, और सांस्कृतिक धरोहर से भरा हुआ है जो इसकी अनूठी पहचान बनाए रखता है।कार्यक्रम का आभार डॉ शशि जैन ने दिया तथा परामर्शदाता डबली कुमारी ने सभी आगंतुको को पुस्तकालय एवं उसके द्वारा प्रदत्त सेवाओं से अवगत कराया।

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