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धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के मुहुर्त

इस वर्ष धनतेरस 9 नवम्बर दिन सोमवार 2015 को त्रयोदशी रात्रि 7:10 बजे तक रहेगी। चौघड़िया का मुहूर्त इस प्रकार रहेगा- सांय 6:17 से 07:45 बजे तक। अमृत तथा रात्रि 9:10 बजे से 10:35 बजे तक शुभ। अपरान्ह 1:22 बजे से सांय 5:37 बजे तक चर चैघड़िया रहेगा।

इस बार 11 नवंबर 2015, बुधवार के दिन दिल्ली और उत्तर भारत के इलाकों में सूर्यास्त 17:28 पर होगा। इसलिए 17:28 से 20:10 के बीच का समय प्रदोष काल होगा। प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में श्रेष्ठ माना जाता है। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है।

निशिथ काल

निशिथ काल में राज्य और शहर विशेष के अनुसार इस समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। 11 नवंबर को 20:10 से 22:52 तक निशिथ काल रहेगा। निशिथ काल में लाभ की चौघडिया भी रहेगी, ऎसे में व्यापारियों वर्ग के लिये लक्ष्मी पूजन के लिये इस समय का उपयोग शुभ है।

दीपावली पूजन 11 नवंबर इस दिन अमावस्या रात्रि 11:16 बजे तक रहेगी। दीपावली के पूजन का मुख्य काल प्रदोष काल माना गया है। इस दिन प्रदोष काल रहने से स्थिर लग्न और ज्यादा बलवती हो जायेगी। इस दिन प्रदोष काल सांय 5:41 बजे से रात्रि 8:15 बजे तक है।

स्थिर लग्न में पूजन करने वाले के लिए प्रथम स्थिर लग्न: वृष सांय 5:58 बजे से 7:58 बजे तक रहेगा।

दूसरा स्थिर लग्न: सिंह अर्द्धरात्रि के बाद 12:28 बजे से रात्रि 02:35 बजे तक रहेगा

दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी पूजा

  • कैसे करें लक्ष्मी – गणेश का पूजन

दिवाली के दिन जहां व्यापारी अपनी दुकान या प्रतिष्ठान पर दिन के समय लक्ष्मी का पूजन करते हैं, वहीं गृहस्थ लोग शाम को प्रदोष काल में महालक्ष्मी का आह्वान करते हैं। गोधूलि लग्न में पूजा आरंभ करके महानिशीथ काल तक अपने अपने अस्तित्व के अनुसार महालक्ष्मी के पूजन को जारी रखा जाता है । लक्ष्मी पूजनकर्ता दिवाली के दिन जिन पंडित जी से लक्ष्मी का पूजन कराएं , हो सके तो उन्हें सारी रात अपने यहां रखें। उनसे श्रीसूक्त , लक्ष्मी सहस्रनाम आदि का पाठ और हवन कराएं।

  • कैसे करें तैयारी

एक थाल में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं अथवा नवग्रह का यंत्र स्थापित करें। इसके साथ ही एक तांबे का कलश बनाएं , जिसमें गंगाजल दूध दही – शहद सुपारी सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपड़े से ढककर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें। जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया है वहां पर रुपया , सोना या चांदी का सिक्का लक्ष्मी जी की मूर्ति अथवा मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी गणेश सरस्वती जी अथवा ब्रह्मा , विष्णु , महेश आदि देवी देवताओं की मूर्तियां अथवा चित्र सजाएं । कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध दही और गंगाजल से स्नान कराएं। अक्षत , चंदन का श्रृंगार करके फल फूल आदि से सज्जित करें। इसके ही दाहिने ओर एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं। जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है ।

  • लक्ष्मी पूजन की विधि

लक्ष्मीपूजनकर्ता स्नान आदि नित्यकर्म से निवृत होकर पवित्र आसन पर बैठकर आचमन , प्राणायाम करके स्वस्ति वाचन करें। अनन्तर गणेशजी का स्मरण कर अपने दाहिने हाथ में गन्ध , अक्षत , पुष्प , दूर्वा , द्रव्य और जल आदि लेकर दीपावली महोत्सव के निमित्त गणेश , अम्बिका , महालक्ष्मी , महासरस्वती , महाकाली , कुबेर आदि देवी – देवताओं के पूजनार्थ संकल्प करें। इसके बाद सर्वप्रथम गणेश और अम्बिका का पूजन करें। इसके बाद नवग्रह पूजन करके महालक्ष्मी आदि देवी – देवताओं का पूजन करें।

दीपावली के बाद दुकान खोलने का मुहूर्त
13 नवम्बर को सुबह 7:44 बजे तक शुभ है। सुबह 10:34 मि0 से अपरान्ह 02:49 तक चर लाभ। अमृत की चैघड़िया सांय 04:14 बजे से सांय 05:39 मि0 तक शुभ चैघड़िया रहेगा।

भैया दूज का मुहूर्त
भैया दूज का त्यौहार 13 नवम्बर को मनाया जायेगा। इस तारीख को पूरे दिन द्वितीया तिथि सुबह 7 बजे से 09 बजे तक पहली स्थिर लग्न वृश्चिक रहेगा। दूसरा स्थिर लग्न कुम्भ मध्यान्ह 12:55 बजे से अपरान्ह 02:10 बजे तक रहेगा। इन दोनों स्थिर लग्नों में भैय्या दूज मनाना ज्यादा श्रेष्ठ रहेगा।

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रूप चौदस
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