Friday, June 14, 2024
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साहित्य के फलक पर डॉ.अपर्णा पाण्डेय ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लहराया परचम

विदुषी साहित्यकार अध्यापिका डॉ. अपर्णा पाण्डेय देश में हाड़ोती की पहली ऐसी शख्शियत हैं जिन्होंने प्रतिनियुक्ति पर ढाका ( बांग्लादेश ) में पांच वर्ष रह कर हिंदी भाषा और संस्कृति के एंबेसेडर के रूप में अध्यापन का कार्य कर हिंदी का माहोल बनाने का गौरव और विशिष्ठ उपलब्धि हांसिल की। इस दौरान 7 जून 2015 भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से स्थापित हिंदी भाषा विभाग ,ढाका विश्वविद्यालय के उद्घाटन अवसर पर, भारतीय दूतावास से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से नज़दीक से मिलने का भी यादगार अवसर प्राप्त हुआ। वर्ष 2014 में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा ढाका की थी। तब उन्होंने हिंदी विभाग का उद्घाटन किया था। मेरे छात्रों से मिलकर बहुत खुश हुए थे।

इन्होंने 18-20अगस्त 2018 तक मारीशस में आयोजित 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए “विश्व में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में हिंदी की भूमिका ” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। आपका शोध-पत्र विदेश मंत्रालय,नई दिल्ली से चयनित किया गया था। आपने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन, पुदुच्चेरी 2019 में “दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा और रामानुजन ” विषय पर शोध -पत्र प्रस्तुत किया। आपकी पुस्तक “पुराणों में शुकदेव” का विमोचन मारीशस के प्रधानमंत्री व पद्मश्री विंदेश्वरी पाठक के द्वारा किया गया। आप भारतीय साहित्यिक संस्कृति को अपने लेखन और शोध का केंद्र बिंदु बना कर साहित्य सृजन में लीन रहती हैं।

भारत का प्रतिनिधित्व-
डॉ.अपर्णा बताती है कि इनके उत्कृष्ठ शैक्षिक कार्यों को देखते हुए आई.सी.सी.आर,नई दिल्ली द्वारा इनका चयन कर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने हेतु हिंदी शिक्षिका और सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में वर्ष 2013 में इनको ढाका,बांग्लादेश, भारतीय दूतावास में प्रतिनियुक्ति पर भेजा । वहां आपने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सराहनीय कार्य किया। ये बताती हैं कि “इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र ढाका, बांग्लादेश, भारतीय दूतावास” और “आधुनिक भाषा इंस्टीट्यूट ,ढाका, विश्वविद्यालय में इन्होंने शिक्षण का कार्य करवाया। आपके कार्यों को देखते हुए वहां इनका कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया।

वर्ष 2013 से 2017 तक ढाका विश्वविद्यालय में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से स्थापित हिंदी विभाग की आप पहली “हिंदी पीठ” रहीं और वहां हिंदी का वातावरण न होते हुए भी आपने छात्रों के हृदय में हिंदी भाषा और साहित्य, संस्कृति के प्रति विशेष लगाव पैदा किया। प्रारंभ में दस छात्र थे जो 2017 तक बढ़कर साढ़े सात सौ तक पहुंच गए। सांस्कृतिक केंद्र पर हिंदी भाषा के अतिरिक्त योग, धर्म, भारतीय संस्कृति, साहित्य और शास्त्रीय संगीत पर भी छात्र चर्चा करते थे। उनकी रुचि और जिज्ञासा के अनुसार पढ़ाना होता था। दोनों ही स्थानों पर विभिन्न क्षेत्रों में (फिल्म और मीडिया, प्रोफेसर, शिक्षक, अधिवक्ता,बैंक कर्मचारी, अभिनेत्री और कालेज के छात्र/छात्राएं )आदि कार्य करने वाले प्रबुद्ध जन अध्ययन करने आते थे। जिनका उद्देश्य मात्र भाषा सीखना नहीं, वरन् भारत की सांस्कृतिक,भाषाई, आध्यात्मिक, वैचारिक विविधता के विषय में जानकारी प्राप्त करना था। कुछ लोग हिंदी इसलिए सीखना चाहते थे, कि उन्हें भारत भ्रमण पर आना है, कुछ इलाज के लिए और कुछ कालेजों में होने वाले अधिवेशनों में भाग लेने के लिए आते रहते हैं। वहां इन्होंने भारतीय संस्कृति की महान रचनाएं श्रीमद्भगवद्गीता, मेघदूतम और नीतिशतकम् पढ़ाया।

साहित्य सृजन
आप हिंदी, संस्कृत और बांग्ला भाषाओं पर समान अधिकार रहती हैं। आप कथेत्तर विधा में हिन्दी के प्रति प्रतिबद्ध और समर्पित हैं । आपकी अब तक 10 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। मेघदूतम्, सांख्यिकारिका, श्रीमद्भगवद्गीता और योगदर्शन का आपने हिंदी भाषा मेंअनुवाद किया है। प्रिय गल्प आपकी बांग्ला बाल कहानियों का हिंदी अनुवाद कृति है। वैचारिक पुष्प गुच्छ ( निबंध संग्रह व समीक्षाएं ),उन्मेष ( मौलिक काव्य संग्रह), सुनो ( मौलिक काव्यसंग्रह) आदि पर पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी “विदेश प्रवास में हिंदी की सेवा “नामक संस्मरण पुस्तक प्रकाशनाधीन है। आपने आई. एम.पुणे, हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार, सर्वभाषा साहित्यकार कुंभ , अजमेर सहित अनेक मंचों पर अपने शोध पात्रों का प्रस्तुतिकरण किया है। साथ ही आपने साहित्य साधना के अंतर्गत कोटा के अनेक मंचों से काव्यपाठ किया है। आपने 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन मारीशस 2018 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर वहां प्रसूनजोशी (निदेशक, फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड, भारत), कुंवर बेचैन, अशोक चक्रधर जैसे ख्यातनाम साहित्यकारों से लेखन हेतु आशीर्वाद और प्रेरणा प्राप्त की है। ‌

सम्मान
आपको प्रतिनियुक्ति से वापस आते समय बांग्लादेश में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला एवं डायरेक्टर जनरल(साउथ एशिया) द्वारा प्रशस्ति पत्र से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी ,जयपुर द्वारा 2023-24 के लिए आपको बांग्ला भाषा की बाल कथाओं की कृति “प्रिय गल्प” पर “रांगेय राघव पुरस्कार ” के लिए चयन किया गया है। साहित्यिक सेवाओं के लिए श्रीभारतेन्दु समिति,कोटा, कर्मयोगी सेवा संस्थान द्वारा शान-ए-हाड़ोती आदि सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। आपको अनेक सामाजिक और आध्यात्मिक , सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन करने हेतु आपको श्रेष्ठ मंच संचालक के सम्मानों से सम्मानित किया गया है। श्रीकरणी विकास समिति कोटा,मंडल रेल प्रबंधक,कोटा, ,आर्यसमाज,कोटा, गायत्री परिवार, कोटा आदि संस्थाओं द्वारा भी समय- समय पर सम्मानित किया गया है।

शिक्षिका होने के साथ -साथ आप सदैव अपने छात्रों का मार्गदर्शन करती रही हैं और श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम देने हेतु शिवरानी देवी राजमाता, कोटा , सुनील दत्त (राज्य सभा सांसद व अभिनेता) , शबाना आज़मी (सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेत्री और राज्य सभा सांसद) एवं शिक्षा सचिव राजस्थान आदि से श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान प्राप्त कर चुकीं हैं। ज्योति महिला विद्यापीठ, जयपुर से भी आपके उत्कृष्ट कार्य हेतु आपको श्रेष्ठ गुरूजन अवार्ड प्राप्त हुआ है। आपकी एक कविता ” समझौता” की बानगी देखिए जो रचनाकार की गंभीर विचारशीलता को दर्शाती है………

दो दिलों के बीच हो जाता है अलिखित समझौता, अनिर्वचनीय भाव -जगत के संबंध कैसे हैं ? ईश्वर जाने! जहां है सिर्फ़ शान्ति, शान्ति और शांति।। असीम आलोक प्रकाश- पुंज बनकर होता है प्रकट हृदयों में और अपनी दिव्यता में समेट लेता है संपूर्ण विश्व श्वेत वर्ण आलोक कर देता है सब कुछ आलोकित।। हम सब हैं मात्र कठपुतलियां सूत्रधार है कोई और जो नचाता है अपनी उंगलियों पर ईश्वर की माया ईश्वर ही जाने उसकी दिव्यता उतरती रहे हमारे हृदयों में यही प्रार्थना है।।

परिचय
अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार के रूप में पहचान बनाने वाली डॉ.अर्पणा का जन्म साहित्यिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से समृद्ध परिवार संस्कृत और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान आचार्य लाल बिहारी द्विवेदी (लब्ध प्रतिष्ठ राष्ट्रपति पुरस्कार) और मां श्रीमती कृष्णा देवी द्विवेदी के आंगन में चौथी पुत्री के रूप में 1970 में मैनपुरी ,उत्तर प्रदेश में हुआ। आपके भाई आचार्य इच्छाराम द्विवेदी “प्रणव” भी संस्कृत और हिंदी साहित्य के ख्यातनाम विद्वान् रहे हैं ‌। डॉ अपर्णा पाण्डेय विवाह के पश्चात 1988 में कोटा आ गई। कोटा , राजस्थान में निवास कर रहीं हैं। आपने हिंदी और संस्कृत से स्नातकोत्तर की डिग्री और ” पुराणों में शुकदेव:एक समालोचनात्मक अध्ययन ” विषय पर के.एम. इंस्टीट्यूट,आगरा विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आपने 1996 से 2011 तक कोटा के बाल विद्यालय में अध्यापन का कार्य किया और 2011 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित हो कर शिक्षा विभाग में आई। वर्तमान में आप सीनियर सैकंडरी विद्यालय, सुल्तानपुर में सेवारत हैं।

संपर्क मोबाइल : +91 77348 33428
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(डॉ.प्रभात कुमार सिंघल लेखक एवं पत्रकार, कोटा)

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