Friday, September 29, 2023
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अच्छी कृतियां समाज की सांस्कृतिक धरोहर होती है- निर्मोही

कोटा/ कबीर पारख संस्थान कोटा में रविवार को कवि हेमराज सिंह हेम की खंडकाव्य कृति” जयनाद”,”काव्य-सृजन” त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण हुआ तथा प्रेम शास्त्री की कृति” प्रेम सतसई” पर वक्तव्य रखा गया ।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामस्वरूप मूंदड़ा थे अध्यक्षता भगवत सिंह मयंक ने की,मंच पर विशिष्ट अतिथि जगदीश भारती ,वक्ता डॉ आदित्य गुप्ता , विजय जोशी एवं प्रमुख वक्ता व मार्गदर्शक जितेन्द्र निर्मोही थे।मंच का संचालन डॉ अपर्णा पांडेय ने किया।

इस अवसर पर जवाहर लाल नेहरु बाल साहित्य अकादमी जयपुर से सम्मानित किए जाने वाले साहित्यकारों रामेश्वर शर्मा रामू भैया, श्यामा शर्मा, और डॉ अपर्णा पांडेय का सम्मान अध्यक्ष मधुकर काव्य सृजन संस्थान कोटा और ज्ञान भारती संस्था कोटा की और से सम्मान किया गया।

जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि कृतियां सामाज की सांस्कृतिक धरोहर होती । किसी भी कवि की कृति जब तक उसके पास है कृति है समाज में जाते ही संस्कृति हो जाती है। लोकार्पित कृति “जयनाद” भी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है क्योंकि इसमें रजपूती शौर्य गाथा है।रजपूत वो है जो अपनी रज के लिए संघर्षरत रहता है । हेमराज सिंह हेम का श्रृंगार रघुराज सिंह हाड़ा की याद दिलाता है उनका विभत्स और रौद्र रस इस अंचल में सूर्य मल मिसण के बाद दिखाई देता है।

” जयनाद” पर बोलते हुए वक्ता प्रोफेसर आदित्य गुप्ता ने कहा कि यह हाड़ौती अंचल के विशिष्ट काव्य में से एक है ।जो कितने ही प्रबंध काव्य एवं खंड काव्य की याद दिलाता है। इसका करुण रस प्रसाद की कृति” आंसू” की याद दिलाता है तो वीर रस में यह चंदबरदाई के रासो की याद दिलाता है।यह कृति सही मायने में प्रबंध खंड काव्य है।

विजय जोशी ने कहा कि” जयनाद” नाद ब्रह्म की याद दिलाता है जहां से समस्त वृतियों की संरचना होती है।”जयनाद” प्रबंध काव्य में श्रेष्ठ कृतियों में से एक है।”प्रेम सतसई” पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कवि प्रेम शास्त्री का मूल स्वर श्रंगार और राष्ट्र प्रेम है जो इस कृति में स्पष्ट दिखाई देता है। राष्ट्रद्रोही के प्रति प्रेम शास्त्री का कवि आक्रोशित है तो सामाजिक संबंधों के प्रति अनुदार है ।वो साहित्य लोक में विशिष्ट स्थान रखते हैं। जगदीश भारती ने कहा कि हेमराज सिंह हेम की कविता का फलक बढ़ा व्यापक है जो उनकी कृतियों में स्पष्ट दिखाई देता है।संत प्रभाकर साहेब ने कहा समाज में अतिसहिष्णुता कायरता होती है देश रक्षा और परिवार रक्षा के प्रति हमारा दायित्व है । मुख्य अतिथि रामस्वरूप मूंदड़ा ने कहा कि”जयनाद” का सार तत्व तो निर्मोही जी की भूमिका में स्पष्ट दिखाई देता है। अध्यक्ष भगवत सिंह मयंक ने कहा इस अंचल में खंड काव्य की विशेष परंपरा रही है राजस्थानी खंड काव्य में हम प्रेम जी प्रेम, सूरजमल विजय ,किशन वर्मा, जितेन्द्र निर्मोही का नाम प्रमुखता से ले सकते हैं।” काव्य सृजन” पत्रिका का निरंतर प्रकाशन जे पी मधुकर जी की अत्यंत सक्रियता का परिणाम है ।इसकी जितनी तारीफ करें उतनी कम है।

कार्यक्रम का प्रारंभ बालू लाल वर्मा की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण प्रेम शास्त्री द्वारा दिया गया। मधुकर काव्य सृजन संस्थान के बारे में जे पी मधुकर द्वारा जानकारी दी गई।अंत में नहुष व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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