Monday, July 22, 2024
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क्या अंग्रेज़ी लन्दन में हरेक की ज़ुबान है ?

मैं जब 1973 में अंग्रेज़ी साहित्य का विद्यार्थी हुआ करता था तो दिमाग़ में एक ही बात रहती थी कि ब्रिटेन में सिर्फ़ अंग्रेज़ी बोलने वाले रहते होंगे . हालाँकि अंग्रेज़ी भाषा का इतिहास पढ़ते समय हमारे प्राध्यापक ने बताया था कि ब्रिटेन में अंग्रेज़ी की इकत्तीस से भी अधिक विभिन्न बोलियाँ या डॉयलेक्ट हैं जो उच्चारण और वर्तनी में एक दूसरे से काफ़ी अलग हैं. इनमें भी पाँच डॉयलेक्ट प्रमुख हैं , Geordie जो उत्तर पूर्वी इंग्लैंड में प्रचलित है . वेल्श , मिडलैंड , लंदन के मज़दूरों के बीच विशेषकर ईस्ट एंड इलाक़े की कॉकनी और लन्दन के बहु-सांस्कृतिक माहौल में बोली जाने वाली एमएलई डायलेक्ट है .

लेकिन जब से मेरा लंदन आने जाने का सिलसिला चला है तो धीरे धीरे पता चला है कि यहाँ भले ही अंग्रेज़ी एक मज़बूत संपर्क भाषा है लेकिन घरों में , रिश्तेदारों , नातेदारों , एथनिक समूह के बीच एक दो नहीं सैकड़ों अलग अलग भाषाएँ बोली जाती हैं , इसे आप यहाँ के समाज की खूबी कह सकते हैं. मैं पिनर की अपनी गली का उदाहरण देता हूँ , सबसे निकट रहने वाला परिवार गुज़राती मूल का है जिनके दादा तस्मानिया से ब्रिटेन आये थे , घर में वे लोग गुजराती में बात करते हैं लेकिन उनकी भाषा में स्वाहली भाषा के शब्दों की भी भरमार रहती है. उससे अगला घर अरबी मूल के लोगों का है, घर में अरबी बोली जाती है ,

हमारी इस छोटी सी कम्यूनिटी में पोलैंड , आर्मेनिया, फ़्रांस , साउथ अफ़्रीका , ब्राज़ील , श्री-लंका , उत्तर-भारत , केरल के परिवार हैं जो अपने-अपने परिवार में, अपने देश से आये हुए लोगों से अपनी एथनिक भाषा में ही बातचीत करते हैं , हाँ , जब बच्चे गली में खेलते हैं , महिलाएँ एक दूसरे से मिलती हैं या फिर सप्ताहांत पर पुरुष जमा होते हैं तो वार्तालाप का माध्यम अंग्रेज़ी ही होती है . इसके बरअक्स लन्दन में कुछ ऐसे पॉकेट्स भी हैं जहां एक ही एथनिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं वहाँ का माहौल बिलकुल अलग मिलेगा . उदाहरण के लिए साउथहाल चले जाइए वहाँ भारत के पंजाब प्रांत और आज के पाकिस्तानी पंजाब सूबे के लोग की प्रधानता है, वहाँ पंजाबी में सड़क पर या दुकान में वार्तालाप एक सामान्य बात है . यहाँ के ट्रेन स्टेशन पर स्टेशन का नाम अंग्रेज़ी के साथ ही गुरमुखी में भी लिखा हुआ है , दुकानों के साइनबोर्ड पर भी गुरमुखी और उर्दू दिख जाएगी . इस इलाक़े में बसे लोग अपना दिन प्रतिदिन का कारोबार बिना अंग्रेज़ी जाने आराम से चला सकते हैं .

कुछ कुछ ऐसा ही हाल वेम्बली इलाक़े के अल्पर्टन का है , इस इलाक़े में अफ़्रीका और ख़ासकर पूर्वी अफ़्रीका से आए गुज़राती मूल के लोग बसे हुए हैं , यहाँ पर दुकानदार और ग्राहक गुजराती में बात करते दिख जाएँगे , कई दुकानों के साइनबोर्ड पर गुज़राती भी लिखी है .

बांग्लादेश स्वाधीनता संग्राम के दौरान पूर्वी लन्दन में निर्वासित बंगाली बड़ी संख्या में आ कर बस गए थे जिसके कारण इस इलाक़े का फ़्लेवर बंगाली है , बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट और स्टोर बांग्ला भाषी लोग संचालित करते हैं .

इसी तरह से साउथ केनसिंगटन फ़्रेंच बहुल क्षेत्र है , यहाँ का लिसी चार्ल्स डी गाल स्कूल और यहाँ की बुलांजरी यानि बेकरी तमाम फ़्रेंच भाषा-भाषियों को आकर्षित करती है.

व्हाईटचैपल, सेंट जॉर्ज-इन-द-ईस्ट और माइल एंड रोड इलाक़े में जर्मन लोगों की संख्या काफ़ी है , इसलिए इस इलाक़े को लिटिल जर्मनी भी कहते हैं , यहाँ पूर्वी यूरोप के प्रवासी यहूदी भी ख़ासे हैं. बूचर, ग्रोसरी स्टोर, फल विक्रेता , कान्फ़ेक्शनरी, जूता बनाने वाले, दर्जी, सिगार बेचने वालों के साइनबोर्ड पर आपको जर्मन नाम ही मिलेंगे.

दुनिया के किसी भी शहर में अगर चीनी मूल के लोग बसे हुए हों तो वहाँ आपको चाइना टाउन ज़रूर मिलेगा. फिर लन्दन की तो बात ही अलग है यहाँ एक लाख से अधिक चीनी मूल के लोग हैं जो सेंट्रल लंदन से ले कर शहर के दूसरे बरो में फैले हुए हैं, ख़ास तौर पर ग्रीनिच, लेविशम, टावर हैमलेट्स, कैम्डन, साउथर्क और वेस्टमिनिस्टर में अधिक हैं. चाइना टाउन शहर के ठीक बीचों बीच वेस्ट एंड इलाक़े में है , जहां असली चीनी भोजन और व्यंजन की दुकानें तो हैं ही साथ ही एशियन सुपर मार्केट भी हैं जो चीनी भाषा भाषियों को एक दूसरे से जोड़ने का काम भी करते हैं.

इटेलियन मूल के लोग सेंट्रल लंदन के क्लर्केनवेल, फ़ारिंगडन इलाक़े में ज्यादा हैं , इसका अंदाज़ा उस इलाक़े में इटेलियन रेस्टोरेंट और फ़ोर्नो यानि इटेलियन बेकरी से भी लग जाता है.

अब चलते चलते हिंदी की बात कर लेते हैं . जहां एक ओर बॉलीवुड को भारत में गरियाने का फ़ैशन चल पड़ा है दूसरी ओर यहाँ लंदन में पिछले पचास साथ वर्षों में हिंदी फ़िल्मों ने अपना एक विशाल प्रशंसक वर्ग तैयार किया है उसके कारण हिंदी समझने और बोलने वालों की तादाद खूब बढ़ी है . कोई आश्चर्य नहीं चेहरे मोहरे से भारतीय दिखने वाले लोग , उनकी मातृभाषा कुछ भी हो आपस में हिंदी में बोलने लगे हैं .

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