Friday, April 19, 2024
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लाखों महिलाओं के सपने साकार करने की पहल

अमेरिकी कांसुलेट जनरल मुंबई के साथ मिलकर एस्पायर फॉर हर कंपनी महिलाओं को उनके कॅरियर को लेकर देखे गए सपनों को सच करने और कार्यबल में उनकी संख्या बढ़ाने में मदद कर रही है।

मधुरा दासगुप्ता सिन्हा ने एक बैंकर के रूप में काम करते हुए मुंबई में दो दशक से अधिक समय बिताया और इस दौरान उन्होंने भारत में महिलाओं से संबंधित आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि महिलाओं ने भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत ही कम योगदान दिया और यह भी लगातार कम से कमतर होता जा रहा था। मधुरा कहती हैं, ‘‘मुझे लगा कि भारत और भारतीय महिलाएं बेहतर कर सकती हैं और इस समस्या को हल करने के लिए किसी को तो बीड़ा उठाना चाहिए। कोई तो हो जो महिलाओं को कार्यबल में शामिल होने और आगे बढ़ाने के लिहाज से सशक्त कर सके। मैंने सोचा कि वह कोई तो मैं ही हो सकती हूं। और इस तरह एस्पायर फॉर हर का जन्म हुआ।’’

2020 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुरू एस्पायर फॉर हर मुंबई स्थित बिजनेस कंसल्टिंग और सर्विस कंपनी है जो खास तरीकों से महिलाओं की मदद करती है। यह महिलाओं को आर्थिक रूप से आजाद होना सिखाती है, कॅरियर को लेकर देखे गए सपनों को हकीकत में बदलने और उसे हासिल करने के लिए जरूरी शिक्षा को हासिल करने में मदद करती है। 2022-23 में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में महिला प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने की दृष्टि से संगठन ने अमेरिकी कांसुलेट जनरल के साथ साझेदारी में महिलाओं के पहले समूह वुमेन ऑन बोर्ड्स को लॉंच किया। इसके तहत प्रतिभागियों को बोर्डरूम की अपेक्षाओं, नेटवर्किंग और सोशल मीडिया के इस्तेमाल जैसे विषयों का आठ सप्ताह तक गहन प्रशिक्षण दिया गया। 40 से अधिक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया और उनमें से दो को तो विभिन्न संगठनों में निदेशक मंडल में शामिल होने के लिए चुना गया।

वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रित संगठन वैया विकास की सीईओ और वुमेन ऑन बोर्ड्स की प्रतिभागी जमुना रवि के अनुसार, ‘‘वुमेन ऑन बोर्ड्स को स्वतंत्र निदेशक बनने की उनकी यात्रा में महिलाओं की सहायता की दृष्टि से डिजाइन किया गया है।’’ उन्हें कार्यक्रम के ऑनलाइन सेशन, नेतृत्वकर्ताओं तक पहुंच, केस स्टडी एसाइनमेंट और नेटवर्किंग के अवसर विशेष रूप से उपयोगी लगे। वह बताती हैं, ‘‘मधुरा और उनकी एस्पायर फॉर हर टीम की एक और बड़ी खूबी यह है कि वे अभी भी हमारे समूह को जोड़ कर रखने में कामयाब रही हैं। हमें वहां से निकले एक साल हो चुका है।’’

दिसंबर 2023 में, एस्पायर फॉर हर और अमेरिकी कांसुलेट जनरल मुंबई ने पश्चिमी भारत में मध्य से वरिष्ठ प्रबंधन भूमिकाओं में 50 महिलाओं को नेतृत्व और बोर्ड स्तर पदों पर तैनाती के लिए प्रशिक्षित करने के लिए वुमेन ऑन बोर्ड्स 2.0 लॉंच किया। सेशन 9 महीनों का होगा और इसमें वर्चुअल और व्यक्तिगत सेशन के माध्यम से प्रतिभागी रोल मॉडलिंग, व्यावहारिक सीख, कॅरियर पूर्वावलोकन करने और सहकर्मियों के बीच नेटवर्किंग और संवाद से नेतृत्व के गुण सीखेंगे।

सपने की समय सीमा
एस्पायर फॉर हर साल 2025 तक भारत के कुल कार्यबल में 10 लाख महिलाओं को जोड़ने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है और उसका मिशन उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय समुदायों की शक्ति का उपयोग करने का है। मधुरा के अनुसार, ‘‘यह एक समयसीमा वाला सपना है।’’ वह कहती हैं कि खास चीज़ जिसे बदलने की जरूरत है, वह है लोगों की मानसिकता और एस्पायर फॉर हर ने महिलाओं के इर्दगिर्द ही चीजों के निर्माण और उसे साकार करने के लिए अलग-अलग और शक्तिशाली कार्यक्रम तैयार किए हैं।

उदाहरण के लिए, संगठन 300 ऐसे नेतृत्वकर्ताओं के साथ काम करता है जो अन्य महिलाओं को सलाह देते हैं। मधुरा के अनुसार, ‘‘ये सलाहकार चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, चीफ एक्सपीरियंस ऑफिसर और दूसरे अधिकारी हैं जो आपको विभिन्न स्तरों पर पहुंचाने, कॅरियर के दरवाजे खोलने और आपके दिमाग की खिड़कियां खोलने में मदद कर सकते हैं।’’ एस्पायर फॉर हर के मेंटर डेटाबेस में उद्योगों की एक विस्तृत शृंखला शामिल है जिसमें माइक्रोसॉ़फ्ट, गूगल, डॉयचे बैंक, एडोबी, एयर फ्रांस, इंडियन मोटरस्पोर्ट्स फेडरेशन समेत तमाम दूसरे संगठनों की महिला नेतृत्वकर्ता शामिल हैं।

सफलताओं को साझा करना और बाधाओं से पार पाना
एस्पायर फॉर हर महिलाओं की मदद न सिर्फ समुदाय और मेंटर तलाशने में करता है बल्कि यह अपने सदस्यों की सफलता का जश्न भी मनाता है। मधुरा के अनुसार, ‘‘हर दिन हम कॅरियर में सफल होने वाली महिलाओं की कहानियों को साझा करते है ताकि अन्य महिलाओं को अपनी यात्रा में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया जा सके। इसके पीछे सोच सरल है, अगर वे किसी भूमिका को सामने देखती हैं तो वे खुद भी वैसी बन सकती हैं।’’

एस्पायर फॉर हर ने हालांकि अपना काम बखूबी किया है लेकिन मधुरा के अनुसार, ‘‘लोगों की मानसिकता को बदलना और विरोध करने वालों को अपने सहयोगियों में तब्दील करना आसान नहीं है, लेकिन फिर भी हमें हर किसी को यह सिखाना होगा कि जब महिलाएं सफल होने के लिए सशक्त बनेंगी तो यह सभी के लिए अच्छा होगा।’’

मधुरा बताती हैं कि उनका संगठन उन पुरुष सलाहकारों के साथ काम करके बाधाओं को दूर करने की कोशिश करता है जो कार्यस्थल पर जेंडर समानता को लेकर नियमित मुखर रहते हैं। वह कहती हैं, ‘‘जब कई पुरुष बेटियों के पिता बनते हैं तो उन्हें इस बारे में एक सोच समझ में आती है और वे अपनी बेटियों को लेकर एक अचेतन पूर्वाग्रह को महसूस करते हैं। हम पुरुष समर्थकों का एक ऐसा समुदाय बनाना चाहते हैं जो महिलाओं के आर्थिक रूप से सक्षम बनने और उनकी क्षमता को उजागर करने में मदद कर सके।’’

संगठन ने अब तक करीब 4 लाख महिलाओं को कार्यबल में शामिल होने में सहायता की है। और जैसा कि मधुरा का कहना है, लक्ष्य साफ दिख रहा है, इस तादाद को साल 2025 तक बढाकर 10 लाख तक ले जाने का है।

(बाएं से दूसरे नंबर पर) वुमेन ऑन बोर्ड्स 2.0 के शुभारंभ के अवसर पर व्यावसायिक एवं इंडस्ट्री लीडरों के साथ अमेरिकी कांसुलेट जनरल मुंबई में। (फोटोग्राफः साभार एस्पायर फ़ॉर हर)

(माइकल गलांट लेखक, संगीतकार और उद्यमी हैं और न्यू यॉर्क सिटी में रहते हैं।)

साभार https://spanmag.com/hi/ से

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