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श्री प्रभु का मिशन रफ्तारः दो इंजनों से राजधानी और शताब्दी की गति बढ़ेगी

राजधानी और शताब्‍दी जैसी सुपरफास्‍ट ट्रेनों में रेलवे जल्‍द ही दो इंजन लगाने जा रहा है। इसकी वजह से ट्रेनों को रुकने और बाद में स्पीड पकड़ने में कम वक्त लगेगा। एक अनुमान के मुताबिक, दो इंजन लगाने के बाद दिल्ली से मुंबई पहुंचने में एक घंटा कम लगेगा। रेलवे अभी 54 शताब्दी और 70 राजधानी एक्सप्रेस चला रहा है। जानकारी के मुताबिक, रेलवे दोनों सुपरफास्‍ट ट्रेनों में पुश एंड पुल टेक्निक का इस्तेमाल होगा। अभी तक सिर्फ हैवी लोड वाली गुड्स ट्रेन में ही दो इंजन लगाए जाते थे। रेलवे इसे ‘पुश एंड पुल’ टेक्निक बता रही है। रेलवे की इस कवायद के पीछे रेलमंत्री सुरेश प्रभु का मिशन रफ्तार है। अपने रेल बजट में प्रभु ने कम खर्च में गति बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया था।

इसके जरिए ट्रेनों को एक्स्ट्रा स्पीड मिलेगी और ट्रेवल टाइम कम हो जाएगा। इस तकनीक में एक इंजन ट्रेन के आगे जबकि दूसरा आखिर में लगाया जाता है। पीछे वाला इंजन ट्रेन को एक्स्ट्रा पुश और पुल देगा। इसके न सिर्फ ट्रेन स्टॉप के बाद तेजी से रफ्तार पकड़ सकेगी बल्कि सेक्शन के मुताबिक स्पीड मैंटेन भी कर सकेगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु कम खर्च में ट्रेनों की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं। यह फैसला इसी रणनीति का एक उदाहरण है। रेलवे के सूत्रों का कहना है कि हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस का टाइम भी दो घंटे कम किया जा सकता है। पुश एंड पुल का ट्रायल अजमेर-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में किया गया था, जो कि पूरी तरह सफल रहा।

ट्रेन को किसी स्टेशन के करीब आने पर स्पीड धीरे-धीरे कम करनी पड़ती है। स्टॉप के बाद भी धीरे-धीरे ही ट्रेन रफ्तार पकड़ती है। दो इंजन लगने से यह वक्त काफी कम हो जाएगा। वजह ये है कि दो इंजन एक साथ ट्रेन को स्लो डाउन करेंगे और एक साथ ही रफ्तार भी देंगे। इसके अलावा इन ट्रेनों में लगने वाले दो ‘पावर कॉर्स’ को हटा दिया जाएगा। पावर कॉर्स के जरिए ही पूरी ट्रेन में इलेक्ट्रिक सप्लाई का प्रबंधन किया जाता है। अब यह काम दोनों इंजन के जरिए किया जाएगा यानी ट्रेन पर लोड कम हो जाएगा। पावर कॉर्स की जगह रेलवे दो कोच बढ़ाएगी।

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