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पटरी पर दौड़ी पश्चिम रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस

गुजरात के हापा से 25 अप्रैल, 2021 को महाराष्ट्र के कलंबोली के लिए 3 ऑक्सीजन टैंकरों सहित रो – रो सेवा परिचालित

पश्चिम रेलवे द्वारा परिचालित यह पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस

44 टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का परिवहन

ट्रेन द्वारा 860 किलोमीटर की दूरी तय की जायेगी

ट्रेन के तीव्र परिचालन हेतु निर्बाध पथ उपलब्ध कराया जायेगा

कोविड संक्रमण के समय कुछ चिकित्सीय परिस्थितियों के उपचार में ऑक्सीजन की उपलब्धता एक प्रमुख तत्व है। भारतीय रेलवे मिशन मोड पर, अगले 24 घंटे में 140 MT से अधिक लिक्विड ऑक्सीजन की डिलीवरी करने जा रही है। अब तक, मुंबई और विशाखापट्नम वाया नागपुर तथा नासिक और लखनऊ के बीच ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलायी गयी है। लगभग 150 टन लिक्विड ऑक्सीजन वाले कुल 10 कंटेनरों का अभी तक परिवहन किया गया है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 25 अप्रैल, 2021 को गुजरात के हापा से BWT वैगनों पर लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) से लदे तीन टैंकरों को लेकर 18.03 रवाना बजे हुई रो – रो सेवा 26 अप्रैल, 2021 को महाराष्ट्र के कलंबोली पहुंचेगी। इन ऑक्सीजन टैंकरों की आपूर्ति मैसर्स रिलायंस इंडस्ट्रीज, जामनगर द्वारा की गई है। लगभग 44 टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का परिवहन कर रही यह ऑक्सीजन एक्सप्रेस अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 860 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस की सुचारू आवाजाही के लिए कम समय में भी हापा गुड्स शेड में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई। यह ट्रेन रेल स्तर से टैंकरों की ऊंचाई, समय-समय पर दबाव की निगरानी आदि जैसे सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए वाया वीरमगाम, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और वसई रोड होते हुए चलायी जायेगी। परिस्थिति की गंभीरता और ऑक्सीजन की आवश्यकता को देखते हुए, ऑक्सीजन एक्सप्रेस के जल्द गंतव्य तक पहुंचने के लिए निर्बाध पथ उपलब्ध कराया गया है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के परिचालन के द्वारा, रेलवे यह सुनिश्चित कर रही है कि देश भर में कोविड -19 मरीजों को मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाए, जिससे जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

क्रायोजेनिक कार्गो होने के कारण लिक्विड ऑक्सीजन के परिवहन में अधिकतम गति जिस पर इसे ले जाया जा सकता है,अधिकतम त्वरण और मंदी( acceleration & deceleration) तथा लिक्विड ऑक्सीजन टैंकरों की उपलब्धता और लोडिंग रैंप आदि जैसी सीमाएं शामिल है। रूट में विभिन्न सड़क निचले पुलों और पैदल ऊपरी पुलों के कारण उपलब्ध अधिकतम क्लीयरेंस को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के मार्ग का खाका तैयार किया जाता है। पिछले साल लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं, चिकित्सा उपकरणों आदि की आपूर्ति के लिए विशेष पार्सल गाड़ियों का परिचालन हो या किसान रेल चलाकर किसानों की मदद करना हो और अब आक्सीजन एक्सप्रेस का परिचालन, भारतीय रेलवे सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला तथा भारत के लोगों की हरसंभव मदद कर रही है। रेलवे हर समय और विशेषकर आपात स्थिति के दौरान राष्ट्र की सेवा में सदैव तत्पर रहती है। रेलवे ने हर समय विशेषकर आपात परिस्थितियों में देश की सेवा जारी रखी है।

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