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श्री कोश्यारी द्वारा पश्चिम रेलवे की पत्रिका “रेल दर्पण” के नये अंक का विमोचन

मुंबई। पश्चिम रेलवे की लोकप्रिय गृह पत्रिका ‘रेल दर्पण’ के नवीनतम अंक का विमोचन महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी द्वारा पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री आलोक कंसल के साथ मुंबई स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में किया गया। इस अवसर पर श्री कोश्यारी ने ‘रेल दर्पण’ की संपादकीय टीम के समग्र प्रयासों की सराहना की और इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस लोकप्रिय पत्रिका ने न केवल अपनी रचनात्मक उत्कृष्टता के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं, बल्कि साहित्यिक प्रतिभाओं को अपने विचारों और कृतियों को व्यक्त करने और साझा करने के लिए के लिए एक उत्कृष्ट मंच भी प्रदान किया है।


यह पत्रिका राजभाषा को बढ़ावा देने वाली एक राजदूत के रूप में भूमिका निभा रही है। यह विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले रेलकर्मियों को एक साथ एक सामान्य आधार से जोड़ती है जो हिंदी है। उन्होंने आगे कहा कि “रेल दर्पण” देश दर्पण की तरह है, जो विविधता को दर्शाती है। इस अवसर पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ही रेल दर्पण के संपादकीय बोर्ड के सदस्य भी उपस्थित थे।

महाप्रबंधक श्री कंसल ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि पश्चिम रेलवे की प्रतिष्ठित गृह पत्रिका “रेल दर्पण” वर्ष 2000 से प्रकाशित हो रही है और अब तक इसके 30 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान संस्करण ‘रेल दर्पण’ का 31 वाँ अंक है और ‘रेल दर्पण’ के इस नये अंक को बेहतर और रोचक बनाने के लिए सभी प्रयास किये गये हैं। महाप्रबंधक ने कहा कि ‘रेल दर्पण’ के नये अंक में कोविड महामारी के कठिन समय के दौरान भी पश्चिम रेलवे की प्रमुख गतिविधियों और उपलब्धियों को शामिल किया गया है। श्री कंसल ने कहा कि रेल दर्पण ने पिछले 20 वर्षों में विभिन्न मंचों पर अपनी रचनात्मक उत्कृष्टता के लिए 55 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित कई पुरस्कार जीते हैं।

रेल दर्पण के नये अंक में दिलचस्प कहानियों, व्यंग्य, स्वास्थ्य चर्चा, कहानी-कविता तथा नियमित कॉलम जैसे पुस्तक समीक्षा आदि की नियमित कॉलम शामिल हैं। इनके अलावा पत्रिका में ‘माई मराठी’ शीर्षक से क्षेत्रीय भाषा मराठी को समर्पित कुछ पृष्ठ और अंग्रेजी लेख भी शामिल हैं।

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