Tuesday, March 5, 2024
spot_img
Homeअप्रवासी भारतीयशंकरा आई फाउण्डेशन ने दानदाताओं के साथ बिताई यादगार शाम

शंकरा आई फाउण्डेशन ने दानदाताओं के साथ बिताई यादगार शाम

लॉस एंजलिस। स्पाइस अफेयर ,बेवर्ली हिल्स ,कैलिफोर्निया ,अमेरिका में शंकरा आई फाउण्डेशन ने अपने दानदाताओं के सम्मान में एक रात्रि भोज का आयोजन किया। इसमें शाम से ही लोगों ने आना प्रारम्भ कर दिया था कार्यक्रम का संचालन करते हुए संगीता जी ने डॉ पुनीत को मंच पर आमंत्रित किया।

डॉ. पुनीत ने कहा कि एक बार कुछ पलों के लिए अपनी आँखें बंद कीजिये और देखिये कि आपको कैसा महसूस हो रहा है। वहाँ मौजूद लोगों ने ऐसा किया भी। फिर उन्होंने कहा कि थोड़ी देर अँधेरा हमसे सहा नहीं जाता तो सोचिये जिनके जीवन में अँधेरा होगा उनका क्या हाल होगा ? पुनीत जी ने पूछा कि कौन है जिसने शंकरा अस्पताल को भारत में देखा है तो रचना जी और संगीता जी ने, जो कि भारत के शंकर अस्पताल में गयीं थीं अपना अनुभव बताया। रचना जी कहा कि वह जयपुर गयीं थीं वहाँ अस्पताल बहुत ही साफ सुथरे और व्यवस्थित हैं। ऑपरेशन की बहुत उच्कोटि की व्यवस्था है। संगीता जी ने कहा कि वह बहुत भाग्यशाली हैं की वह १८ सालों से शंकरा आई फाउण्डेशन से जुड़ी हैं।

गुजरात का आनन्द अस्पताल जो पहला अस्पताल है २००८ में खुला था। मैं दो बार वहाँ गयी हूँ। यह अस्पताल दुनिया के अच्छे अस्पतालों में से एक है। जब वह अस्पताल गयीं और सबको पता चला की ये अमेरिका से आयीं हैं और यही लोग सहायता करते हैं तो सभी पैर छूने लगे। वहाँ बसें मरीज़ों को गाँव से ले कर आती है और ठीक होने पर उनको पुनः वापस छोड़ने भी जाती है सारी व्यवस्था बहुत सुव्यवस्थित है। अस्पताल में ऑपरेशन के लिए लिये तमाम सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कितने नवजवानो को यहाँ काम मिला है।

संगीता जी ने विस्तृत परिचय देते हुए एक्जीक्यूटिव चेयरमैन श्री मुरली कृष्णमूर्ति को आमंत्रित किया। मुरली जी ने कहा कि शंकरा आई फाउंडेशन उन्होंने अपने अंकल के कहने पर शुरू की गयी थी। शंकरा आई फाउण्डेशन, अमेरिका की स्थापना १९९८ में हुयी थी। शुरू में सभी कहते थे कैसे होगा पर स्वामी विवेका नन्द जी की एक बात याद आयी कि जो करना है उसको हिम्मत से करो काम पूरा होगा ही। २००२ से हमारा काम प्रारम्भ हुआ और २००४ में हमारा पहला अस्पताल खुला। तब से हमने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हमारे ९ अस्पतालों में आँखों के १.८ मिलियन मुफ्त ऑपरेशन हो चुके हैं। जैसा कि मेरे भाई ने कहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा आँखों के ऑपरेशन का हॉल है। मुरली जी ने आगे कहा कि इस समय भारत में ३ और अस्पताल हैदराबाद ,इन्दौर ,मुम्बई में बनने वाले हैं । गुजरात में आनन्द अस्पताल डॉ रमणी की सहायता से खुला । मुम्बई में झुनझुनवाला ने ज़मीन दी और कहा जब तक अस्पताल खुद को फण्ड करने लायक नहीं हो जाता वह इसकी सहायता करेंगे।

चैरिटी नेविगैटर (Charity Navigator) , की ओर से शंकरा आई फाउण्डेशन को लगातार कई सालों से चार स्टार मिल रहे हैं। पिछले ६ सालों में लगातार अमेरिका की मात्र ५ प्रतिशत संस्थाओं को ४ स्टार मिले हैं। मुरली जी जोकि स्वामी विवेकानन्द जी से बहुत प्रभावित हैं, उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है कि यदि आपके भाई बन्धु सेहतमंद नहीं है विद्या नहीं हैं तो आप चैन की नींद कैसे सो सकते हैं ? मुरली जी ने सभी से दिल खोल कर दान करने की अपील की । मुरली जी ने कहा आप आँख बंद कर के दान कीजिये आँख खोलने के लिए। स्वयंसेवकों की प्रशंशा करते हुए मुरली जी ने कहा कि हमारे स्वयं सेवक निष्ठा के साथ काम करते हैं। इनके ही कारण हम इतना काम कर सकें हैं। इन्होने ने बहुत सुन्दर गीत ‘ज्योति से ज्योति जलाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो’ गा कर अपनी बात समाप्त की.

शंकरा आई फाउंडेशन स्वयंसेवको की संस्था है इस से हर व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से जुड़ा है। कोई इस से १० सालों से जुड़ा है तो को १३ सालों से। अन्नु जी ने बताया कि आज यानी के १६ दिसम्बर को शंकरा के साथ जुड़े हुए १० वर्ष पूरे हो गए। कितने नवजवानो को यहाँ काम मिला है। कार्यक्रम का संचालन संगीता जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से किया। शंकरा आई फाउण्डेशन के लिए लिखे गए रचना श्रीवास्तव के मुक्तक को भी लोगों ने बहुत पसन्द किया। spice Affair के स्वादिष्ट खाने की सभी ने भूरि-भूरि प्रशंशा की। इंडी बीट्ज़ म्यूजिक (indie beatz music )ने अपने संगीत से शाम को और भी मनोरंजक बना दिया।

http://www.giftofvision.org पर जा कर आप इस इस संस्था को अपना सहयोग दे सकते हैं।

रचना श्रीवास्तव अमरीका में रहती हैं और वहाँ रह रहे भारतीय लोगोॆं की गतिविधियों पर नियमित रूप से लिखती हैं। )

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Rachana Srivastava
Freelance writer and Poet
Los Angeles, CA

http://rachana-merikavitayen.blogspot.com/

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -spot_img

वार त्यौहार