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विज्ञान को आत्मसात करते हुए जड़ों से जुड़े रहें : डॉ. सदानंद सप्रे

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के सन्दर्भ में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में कार्यशाला का आयोजन

भोपाल। मीडिया का कार्य है कि वह सरल भाषा में आम आदमी और आज की युवा पीढ़ी तक विज्ञान एवं वैज्ञानिकों की उपलबल्धियों को पहुंचाएं। विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना के प्रचार-प्रसार में हमारा विश्वविद्यालय लगातार प्रयास कर रहा है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह विचार कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने व्यक्त किये। वहीं, मुख्य वक्ता प्रो. सदानंद सप्रे ने कहा कि हमें विज्ञान और उसके माध्यम से आ रहे नये ज्ञान को आत्मसात तो करना है, परन्तु अपनी जड़ों से भी जुड़े रहना है।

सिंधु घाटी, हड़प्पा सभ्यता, खगोल शास्त्र, अजंता-एलोरा की गुफा, मंदिर निर्माण, कैमिकल इंजीनियरिंग एवं विमान आदि का उदाहरण देते हुए डॉ. सप्रे ने कहा कि हमारे देश में वैज्ञानिक परंपरा पूर्व से ही चलती आ रही है। आज भी अवसर मिलने पर हमारे वैज्ञानिक अपनी मेधा का परिचय देते हैं। उन्होंने पोखरण परीक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे विज्ञान में भारत की अपनी पहचान है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रेरणा देने वाले और सकारात्मक समाचारों को अवश्य ही प्रकाशित करते रहना चाहिए। डॉ. सप्रे ने कहा कि पत्रकारों को भारतीय वैज्ञानिकों के कार्यों, उपलब्धियों को भी विशेष तौर पर युवाओं को अवश्य बताना चाहिए।

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि युवा पीढ़ी को आर्यभट्ट, भास्कर, चरक, शुश्रुत एवं वर्तमान वैज्ञानिकों और उनके योगदान के बारे में अध्ययन करना चाहिए। कुलपति ने कहा कि पत्रकारिता का विश्वविद्यालय होने के नाते विज्ञान को जनसंचार के माध्यम से आगे ले जाना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना जैसी महामारी में न केवल टीका बनाया बल्कि दुनिया के कई देशों को सस्ते दामों में उपलब्ध भी कराया।

इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि अरविंद रानाडे एवं सर्वेश शुक्ला ने कहा कि भारत विज्ञान के क्षेत्र में गौरवशाली देश बनकर उभरेगा। कुलसचिव प्रो. अविनाश वाजपेयी ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश पांडे ने किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य और विद्यार्थी ऑफलाइन एवं ऑनलाइन शामिल हुए।

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