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आयुष में शामिल विधाएं केवल परंपराएं नहीं, ये विज्ञान हैं : वैद्य राजेश कोटेचा

लोकहित में सभी चिकित्सा पद्धतियों में सामंजस्य होना चाहिए: प्रो. केजी सुरेश

एमसीयू में कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता गतिविधियों के अंतर्गत ‘कोविड-19: आयुष और कोरोना’ विषय पर व्याख्यान एवं जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन

भोपाल। आयुष के अंतर्गत शामिल विधाएं सिर्फ परंपराएं नहीं हैं, ये विज्ञान हैं। ये सभी विधाएं केवल उपचार की ही बात नहीं करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य को बनाए रखने पर जोर देती हैं। आयुष में शामिल विधाओं को चिकित्सा विज्ञान की अपेक्षा स्वास्थ्य विज्ञान के रूप में देखना चाहिए। यह विचार भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने ‘कोविड-19: आयुष और कोरोना’ विषय पर आयोजित व्याख्यान और जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने कोरोना महामारी के प्रति जागरूकता गतिविधियों के अंतर्गत किया। कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों ने हमें बता दिया है कि लोकहित के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों को सामंजस्य बनाकर कार्य करना चाहिए।

पद्मश्री से सम्मानित वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि होस्ट डिफेंस मैकेनिज्म यानी हमारी इम्युनिटी यदि ठीक है तो हम बीमारियों से स्वयं को बचाकर रख सकते हैं। आयुष की विधाएं हमारे इम्युनिटी को भी मजबूत बनाती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के प्रारंभ में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुष विशेषज्ञों के साथ बैठक की और कहा कि महामारी को लेकर आपको केस स्टडीज करनी चाहिए और आयुष की सभी विधाएं कैसे लोगों की मदद कर सकती हैं, इसमें वैज्ञानिक पद्धति से कार्य करना चाहिए। उसके बाद देश के आयुष विशेषज्ञों ने मंत्रालय द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस दिशा में कार्य किया। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत हमने आयु रक्षा किट बनाई गई। जिन लोगों ने इस किट में शामिल औषधियां लीं, उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा बाकी लोगों की अपेक्षा कम रहा। हमने आब्जर्वेशन में पाया है कि आयुष की औषधि लेने वाले संक्रमित मरीज जल्दी ठीक हुए हैं। आयुष कोविड सेंटर का रिकवरी रेट 99 प्रतिशत रहा है। उन्होंने बताया कि आयुष-64 मेडिसन कोरोना संक्रमण में कारगर साबित हुई है। यह वैज्ञानिक परीक्षणों से साबित हुआ है। वैद्य श्री कोटेचा ने बताया कि आयुष विभाग ने आयुर्वेद संजीवनी एप बनाया है, जिसको बुधवार को केन्द्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने लान्च किया। इसका उपयोग उन मरीजों से फीडबैक लेने में किया जाएगा, जो आयुष मेडिसन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम समय में हमने एक बार फिर कठिन परिस्थितियों को संभाल लिया है, इसमें सबकी भूमिका है। ऐसा करने वाला भारत दुनिया में अकेला देश है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि जिस प्रकार हम अन्य चिकित्सा पद्धति में विशेषज्ञ डॉक्टर्स का परामर्श लेकर दवा लेते हैं, आयुर्वेद एवं अन्य चिकित्सा विधाओं में भी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को लेकर जागरूक होने की आवश्यकता है। कोरोना संक्रमण ने आयुर्वेद की ओर हमारी दृष्टि बदल दी है। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि आज सभी चिकित्सा पद्धतियों को सामंजस्य के साथ लोगों की बेहतरी में कार्य करना चाहिए है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण में हम पहले विश्वविद्यालय हैं, जिसने कोविड रेस्पान्स टीम गठित की है। हमने कोरोना संक्रमण में समाज को जागरूक करने की भूमिका को स्वीकार किया है। यह भूमिका पत्रकारिता के राष्ट्रीय संस्थान के कारण हमें लेनी ही चाहिए थी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्राध्यापक लाल बहादुर ओझा ने और धन्यवाद ज्ञापन कम्प्यूटर विभाग के अध्यक्ष प्रो. सीपी अग्रवाल ने किया।

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