Wednesday, May 29, 2024
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विश्व शेर दिवस

10 अगस्त को पूरी दुनिया भर में ‘विश्व शेर दिवस ‘के रूप में मनाया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस दिन के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके। जंगल के राजा के रूप में ज्ञात शेर पर्यावरण का अभिन्न अंग है और शेरों के जीवन में आज बहुत संकट बना हुआ है। उन पर निवासस्थान की हानि ,शिकार, अवैध शिकार जैसे कई खतरे उत्पन्न हो गए हैं ।

शेरों के वर्तमान दुर्दशा को देखते हुए उनके महत्व और सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल दुनिया भर में 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस का वैश्विक आयोजन किया जाता है। क्योंकि भारत गांव का देश है और ग्रामीण स्तर तक जागरूकता पहुंचाने के लिए जब तक आंदोलन स्तर पर कोई दिवस न मनाया जाए तब तक संपूर्ण लोगों को जागरूक नहीं किया जा सकता ।

अतः इस दिवस का आयोजन करके आम जनजीवन को वन्यजीवों के महत्व को बताना आवश्यक है। बढ़ती आबादी के कारण जहां एक ओर जंगल कटते जा रहे हैं वहीं दूसरे ओर जंगली जीवों का लगातार हनन होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में जंगल तथा जंगली जीवों का संरक्षण अति आवश्यक है। आम आदमी को बताना कितना आवश्यक है कि, जिस तरह पृथ्वी के संतुलन के लिए प्रकृति का होना आवश्यक है उसी प्रकार जंगल का होना भी आवश्यक है और जंगल के संतुलन के लिए जंगल में निवास करने वाले छोटे बड़े सभी पशुओं का सुरक्षित होना भी आवश्यक है।

‘एनिमल राइट्स’ तथा’ एनिमल एक्टिविट्स’ का मानना है कि शेर हमारे पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही जरूरी हैं इसीलिए शेरों की लगातार घटती संख्या को सही ढंग से नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 अगस्त को यह दिवस मनाया जाता है। देशभर में अलग-अलग प्लेटफार्म्स पर कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जनता को जंगल और जंगली जीवों तथा शेर के महत्व से अवगत कराया जाता है। इसके साथ ही इनके संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न संगठनें सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बातें पहुंचाती हैं तथा लोगों से शेर बचाओ अभियान के साथ जुड़ने व सहयोग देने के लिए अपील करते हैं।

भारत के संदर्भ में शेर दिवस का महत्व इसलिए भी अति आवश्यक है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ में शेर का चित्र विराजमान है। भारतीय संस्कृति में पूजी जाने वाली महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गे का सवारी भी शेर है। तभी तो हमें आशीर्वाद दिया जाता है कि शेर की तरह बहादुर बनो ,साहसी बनो ,निर्भय और निडर बनो ताकि आने वाली समस्याओं से कभी डरो नहीं ,कभी हारो नहीं।

इस दिवस का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। शेरों को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा मान्यता प्राप्त अभयारण्य ‘बिग कैट रेस्क्यू’ के संस्थापक ‘डेरेक और बवर्ली जौबर्ट’ ने दुनियाभर के शेरों की घटती आबादी की ओर ध्यान आकर्षित किया था। पति-पत्नी के इस जोड़े ने वर्ष 2009 में ‘नेशनल ज्योग्राफिक’ से संपर्क किया और ‘बिग कैट इनीशिएटिव( बीसीआई )की साझेदारी के लिए उनके साथ हाथ मिलाया और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए साल 2013 में इसी दिन को शेरों के संरक्षण के मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व शेर दिवस का आयोजन किया गया। यह दिवस इसलिए अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि पर्यावरण के अभिन्न अंग, शेरों को बचाने की दिशा में एक प्रयास है।

जानने के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि एशिया में सबसे ज्यादा शेर हमारे भारत में पाए जाते हैं। एशियाई शेर भारत में पाई जाने वाली सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक है। इसके अलावा रॉयल बंगाल टाइगर, इंडियन लेपर्ड ,क्लाउडेड लेपर्ड तथा स्नो लेपर्ड जैसे चार अन्य प्रजातियां पाई जाती हैं ।यह शेर बिल्ली की प्रजाति में आते हैं इसी लिए इन्हें विगकैट कहा जाता है। नर शेर के गर्दन पर बाल होते हैं जबकि मादा शेर यानी शेरनी के गर्दन पर बाल नहीं पाए जाते हैं। एक शेर का वजन 190 किलो तक होता है और शेरनी का वजन 130 किलो तक होता है ।एक शेर की उम्र 16 से 20 वर्ष की होती है। शेर 12 से 16 साल तक जीवित रहता है जबकि शेरनी 20 वर्ष तक जीवित रहती है और शिकार शेरनी ज्यादा करती है। इनके सुनने की क्षमता बहुत ही ज्यादा होती है।इस तरह साहस निर्भीकता और बहादुरी का प्रतीक ,जानवरों का राजा कहा जाने वाला शेर हर प्रकार से संरक्षण के योग्य हैं।

डॉ सुनीता त्रिपाठी
पड़रौना, कुशीनगर

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