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दोपहिया वाहनों के ‘हीरो’ का जाना

दोपहिया वाहन उद्योग के सिरमौर कहे जाने वाले 92 वर्षीय बृजमोहन लाल मुंजाल का निधन रविवार शाम हो गया। मुंजाल ने दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन कंपनी हीरो मोटोकॉर्प की स्थापना की थी। मुंजाल के तीन बेटे हैं सुमन कांत, पवन कांत और सुनील कांत। मुंजाल के छोटे भाई ओ पी मुंजाल का निधन भी इस साल अगस्त में हो गया था। बृजमोहन मुंजाल ने मोटरसाइकिल बनाने के लिए 1980 के दशक में होंडा के साथ समझौता किया मगर उनकी दिलचस्पी स्कूटर बनाने में थी क्योंकि उन दिनों भारत मुख्यत: स्कूटर का बाजार हुआ करता था। हालांकि होंडा ने पहले ही स्कूटर तैयार करने के लिए फिरोदिया समूह की कंपनी काइनेटिक से गठजोड़ कर लिया था।

1984 के समझौते के बाद हीरो होंडा अस्तित्व में आई और इस कंपनी ने भारत के मोटरसाइकिल बाजार में अपना दबदबा कायम कर लिया। वर्ष 2011 में हीरो ने होंडा से अपने रास्ते अलग कर हीरो मोटोकॉर्प का नाम दिया। उस वक्त से लेकर होंडा और हीरो दोनों ने काफी तरक्की की हालांकि हीरो वित्त वर्ष 2015 में 27,500 करोड़ रुपये की कमाई के साथ इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। इस साल जून में बृजमोहन मुंजाल ने हीरो मोटोकॉर्प में अपनी सक्रिय भूमिका को छोड़ते हुए अध्यक्ष पद त्याग दिया था और वह सेवामुक्त अध्यक्ष बन गए। उन्होंने कंपनी की कमान अपने बेटे पवन को सौंप दी थी जो अब कंपनी के अध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक हैं।

 

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फोब्र्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक हीरो में अपनी 35 फीसदी हिस्सेदारी की वजह से वह अमीर भारतीयों में शुमार हुए जिसे उन्होंने अपने बेटों के साथ साझा किया। अक्टूबर में हीरो समूह के सिरमौर फोब्र्स एशिया के भारतीय अमीरों की सूची में 27वें पायदान पर शामिल किए गए और उनके परिवार में 3 अरब डॉलर की संपत्ति बताई गई। उन्होंने मोटरसाइकिल को स्कूटर के मुकाबले कम ईंधन खपत वाले सक्षम वाहन के तौर पर पेश किया जो किफायत को तरजीह देने वाले भारतीय खरीदारों के हिसाब से एकदम सटीक थी। देश के कॉरपोरेट इतिहास में इस कंपनी का यह विज्ञापन अभियान, ‘फिल इट, शट इट, फॉरगेट इट’ सबसे प्रभावी रहा था। इस कंपनी के प्रतिस्पद्र्धी और बजाज ऑटो के अध्यक्ष राहुल बजाज ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को जून में बताया था कि उन्होंने बृजमोहन मुंजाल को हमेशा अपना गुरु माना है।

 

 

बृजमोहन मुंजाल ने किफायती और आसान वाहन के रूप में अपनी शुरुआत पहली बार मोटरसाइकिल से नहीं की थी। पंजाब के कमालिया (अब पाकिस्तान में) में वर्ष 1923 में जन्मे बृजमोहन मुंजाल और उनके भाई 1943 में अमृतसर और उसके बाद लुधियाना आ गए जहां उन्होंने साइकिल के कलपुर्जे बनाने का कारोबार शुरू किया। मुंजाल कभी कॉलेज नहीं गए और साइकिल निर्माण का लाइसेंस पाने से पहले उन्होंने साइकिल के पुर्जे बनाने शुरू किए। धीरे-धीरे कारोबार बढऩे के साथ साइकिल बनाने की शुरुआत भी हुई और 1975 में हीरो सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बनी और इसने एटलस जैसी प्रतिस्पद्र्धी कंपनी को पीछे छोड़ दिया। लंबे समय तक ‘हीरो साइकिल’ दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी बनी रही। मुंजाल को अभी लंबा सफर तय करना था इसी वजह से उन्होंने मोपेड में मौका देखा। ऐसा तब हुआ जब उन्होंने भारत सरकार से मोपेड बनाने के लिए ‘मैजेस्टिक ब्रांड’ के तहत लाइसेंस हासिल कर लिया। वर्ष 1983 तक घरेलू मोपेड बाजार में मैजेस्टिक की हिस्सेदारी एक-तिहाई थी।

मुंजाल अपने कर्मचारियों, वेंडरों और वितरकों के साथ अपनापन रखने के लिए जाने जाते थे। वह उनके सुख-दुख में उनके साथ खड़े होने के वादे के साथ मौजूद होते थे। उन्होंने दोपहिया वाहन क्षेत्र में डीलरशिप की अवधारणा की शुरुआत की। वह सभी डीलरों की नियुक्ति में निजी तौर पर दिलचस्पी लेते थे। मुंजाल लगभग सभी डीलरों को उनके नाम से जानते थे। उन्होंने डीलरों को विदेश दौरा कराने का चलन भी शुरू किया था। कारोबार और उद्योग क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए उन्हें वर्ष 2005 में पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा गया था। हीरो ग्रुप के अलावा वह कई राष्ट्रीय स्तर के संगठनों मसलन सीआईआई, सायम और भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय बोर्ड के सदस्य भी रहे। मुंजाल ने कई मेडिकल, शैक्षणिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सेवाएं स्थापित करने में मदद की। मुंजाल ने लुधियाना में लुधियाना स्टॉक एक्सचेंज, लुधियाना एविएशन क्लब, लुधियाना मैनेजमेंट एसोसिएशन और दयानंद मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल की स्थापना में अपना योगदान दिया।

शानदार विरासत

1923: बृजमोहन लाल मुंजाल का जन्म कमालिया में हुआ जो अब पाकिस्तान में है
1943: लुधियाना में अपने भाइयों के साथ साइकिल के पुर्जों का कारोबार शुरू किया
1956: मुंजाल ने हीरो साइकिल की स्थापना की
1975: हीरो साइकिल, एटलस को पछाड़कर सबसे बड़ी घरेलू साइकिल कंपनी बनी
1983: इस समूह के मैजेस्टिक मोपेड ने घरेलू बाजार के एक-तिहाई हिस्से पर कब्जा किया
1984: होंडा के साथ मोटरसाइकिल निर्माण के लिए करार, हीरो होंडा अस्तित्व में आई
2001: हीरो होंडा देश और दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी बनी
2005: मुंजाल को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया
2011: हीरो और होंडा ने रास्ते अलग किए। कंपनी को नया नाम मिला हीरो मोटोकॉर्प
2015: मुंजाल ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया और वह सेवामुक्त अध्यक्ष बने, उनके बेटे पवन कंपनी के सीईओ, एमडी और अध्यक्ष बने
अगस्त: उनके छोटे भाई ओ पी मुंजाल का निधन
नवंबर: बृजमोहन मुंजाल का निधन

साभार- http://hindi.business-standard.com/ से

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