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जियो तो ऐसे जियो
 

  • जिसके आगे नतमस्तक थे नेता, मंत्री, अफसर ; उसका किला ढहा दिया इन दो अफसरों ने

    स्व. दुष्यंत कुमार की इन दो पंक्तियों को सार्थक किया है साीबीआई के दो जांबाज अधिकारियों सतीश डागर और मुलिंजा नारायणन ने। जिनकी ताकत के आगे सरकारें और प्रभावशाली लोग भी सिर झुकाते थे, उस डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की हकीकत सामने लाने और रेप के मामले में उसे सजा दिलाने में सीबीआई के दो जांबाज अफसरों ने अहम भूमिका निभाई।

  • तीन साल में पहाड़ खोदकर लकवाग्रस्त आदमी ने लकवाग्रस्त सरकार को दिखाया आईऩा

    तीन साल में पहाड़ खोदकर लकवाग्रस्त आदमी ने लकवाग्रस्त सरकार को दिखाया आईऩा

    तिरुअनंंतपुरम। लकवाग्रस्त एक व्यक्ति जो ठीक से चल नहीं सकता, ज्यादा देर तक खड़ा नहीं हो पाता और चीजों को ठीक तरह से पकड़ भी नहीं पाता.. 3 साल पहले तक केरल के एक गांव के रहने वाले मेलेथुवेट्टील ससी की यही पहचान थी.

  • हिन्द वतन को  सलाम

    हिन्द वतन को सलाम

    स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए एक मंगल दिवस और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसकी अमर कहानी इतिहास में स्वर्णिम अच्छरों से दर्ज है.

  • कल की चिंता आज क्यों करें?

    कल की चिंता आज क्यों करें?

    कभी ऐसे भी लोगों को हम देखते हैं जो उम्र से युवा हैं पर चेहरा बुझा-बुझा है। न कुछ उनमें जोश है न होश। अपने ही विचारों में खोए-खोए---, निष्क्रिय ओर खाली-खाली से, निराश और नकारात्मक तथा ऊर्जा विहीन---। हाँ सचमुच ऐसे लोग पूरी नींद लेने के बावजूद सुबह उठने पर खुद को थका महसूस करते हैं, कार्य के प्रति उनमें उत्साह नहीं होता। ऊर्जा का स्तर उनमें गिरावट पर होता है।

  • जन्म दिन के बहाने एक लाख पेड़ों का संकल्प

    जन्म दिन के बहाने एक लाख पेड़ों का संकल्प

    किसी का जन्म दिन एक लाख पेड़ों को लगाने के संकल्प की पूर्ति में बदल जाए, ऐसा सुनने में भले ही अच्छा लगे लेकिन वास्तविकता के धरातल पर यह इतना आसान नहीं होता जितना समझा जाता है।

  • यूँ ही कोई कैलाश सत्यार्थी नहीं हो जाता

    यूँ ही कोई कैलाश सत्यार्थी नहीं हो जाता

    शांति का नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले कैलाश सत्यार्थी मध्य प्रदेश के विदिशा में बचपन के दिनों में लाइब्रेरी से किताबें लाते थे और लैंप पोस्ट के नीचे बैठकर पढ़ते थे। उनका बचपन विदिशा की तंग गलियों में बीता। उन्होंने प्राइमरी से लेकर इंजीनियरिंग तक की शिक्षा यहीं से हासिल की।

  • एक डोर में बांध रहा किताबों का प्यार

    एक डोर में बांध रहा किताबों का प्यार

    संकोची स्वभाव वाली एक महिला जैसे ही लोगों से भरे एक कमरे में दाखिल होती है तो उसे सारे लोग चुप्पी साधे हुए नजर आते हैं। वह हिचकिचाहट के साथ एक किताब उठाती है और उसे पढ़ना शुरू कर देती है। थोड़ी देर बाद वह भावविभोर हो रहे श्रोताओं की तरफ देखती है तो कुछ लोग अपनी हथेलियों पर ठुड्डी को रखे हुए आराम की मुद्रा में दिखाई देते हैं।

  • मार्क्स और लेनिन को पढ़ने वाला, लिख-गा रहा है नर्मदा के गीत

    मार्क्स और लेनिन को पढ़ने वाला, लिख-गा रहा है नर्मदा के गीत

    ऐसा कहा जाता है- 'जो जवानी में कम्युनिस्ट न हो, समझो उसके पास दिल नहीं और जो बुढ़ापे तक कम्युनिस्ट रह जाए, समझो उसके पास दिमाग नहीं।' यह कहना कितना उचित है और कितना नहीं, यह विमर्श का अलग विषय है।

  • बचपन में घर में टीवी तक नहीं था आज अरबपति है

    बचपन में घर में टीवी तक नहीं था आज अरबपति है

    गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का आज जन्म दिन है। 44 साल पहले चेन्नई के एक साधारण परिवार में जन्म हुआ था। तब उनके परिवार में टीवी सेट नहीं था। उनके कैरियर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। 1993 में पहली बार अमेरिका पहुंचने पर उन्होंने एक बैकपैक खरीदने की सोची।

  • इसलिए हमें अपने सैनिकोॆ और जवानों पर गर्व है …

    इसलिए हमें अपने सैनिकोॆ और जवानों पर गर्व है …

    भारतीय सशस्त्र बलों के जवान किस मुस्तैदी, अनुशासन और निष्ठा के साथ अपना कर्त्तव्य निभाते हैं इसका शानदार उदाहरम ये जवान है जिसका फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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