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जियो तो ऐसे जियो
 

  • पिछड़े गाँव को रोशन करने करोड़ों की नौकरी छोड़ भारत लौट आया

    पिछड़े गाँव को रोशन करने करोड़ों की नौकरी छोड़ भारत लौट आया

    यह कहानी है युवा वैज्ञानिक पुनीत सिंह की, जो इस समय बस्तर, छत्तीसगढ़ के माचकोट वन परिक्षेत्र स्थित ग्राम कावापाल में डटे हुए हैं। घनघोर जंगलों से घिरा हुआ गांव है। सूरज की रोशनी भी छन-छन कर पहुंचती है।

  • मराठी अभिनेत्री ने  बदल दिया सूखा प्रभावित गाँव का नक्षा

    मराठी अभिनेत्री ने बदल दिया सूखा प्रभावित गाँव का नक्षा

    महाराष्ट्र। हाल ही में मुंबई सबसे बड़ा किसान आंदोलन हुआ था। अपने अधिकार की मांग और समस्याओं को लेकर कई किसान 180 किलोमीटर तक पैदल सफर करके मुंबई पहुंचे थे। इस खबर ने लोगों के बीच किसानों की दुर्दशा को दिखाया और लोग चर्चा करने लगे।

  • मल से मालामाल करने वाले शख्स थे ध्रुवज्योति घोष

    मल से मालामाल करने वाले शख्स थे ध्रुवज्योति घोष

    कोलकाता रोजाना लगभग 75 करोड़ लीटर सीवेज निकालता है।

  • अंगदान को जनजागरण आंदोलन में बदला महावीर इंटरनेशनल ने

    अंगदान को जनजागरण आंदोलन में बदला महावीर इंटरनेशनल ने

    मुंबई। मुंबई के जैन समाज के सेवाभावी, सदाशयी और समर्पित लोगों द्वारा संचालित महावीर इंटरनेशनल समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में तो सक्रियता से काम कर ही रही है

  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राज्य वीरता पुरस्कार प्राप्त बच्चों को आशीर्वाद दिया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राज्य वीरता पुरस्कार प्राप्त बच्चों को आशीर्वाद दिया

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से आज यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वीरता पुरस्कार से सम्मानित बहादुर बच्चों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साहस और बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने की समझाईश दी। बच्चों ने बड़ी उत्सुकता से मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने हेलीकाप्टर में बैठकर नया रायपुर और रायपुर शहर देखा। अपनी यात्रा से रोमांचित इन बच्चों ने मुख्यमंत्री को इस यात्रा के लिए धन्यवाद दिया। बच्चों ने बताया कि उन्होंने आकाश से मरिन ड्राइव तेलीबांधा सहित शहर के अनेक स्थलों को देखा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनकी बहादुरी के किस्से भी बड़ी आत्मीयता के साथ सुने। राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन राजधानी रायपुर में आयोजित गणतंत्र दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में इन बच्चों को राज्य वीरता पुरस्कार से सम्मानित करेंगे।

  • ज़ी टीवी के पत्रकार ने बनाई होली पर प्रेरक लघु फिल्म

    होली के मौके पर एक लघु फिल्म यूट्यूब पर खासी चर्चित हो रही है। इस वीडियो में होली के साथ साथ बंधन तोड़ देने का एक अनोखा कोण भी है। सबसे अनोखी बात तो ये है कि इसे नोएडा में ही ज़ी ग्रुप में काम करने वाले एक पत्रकार ने निर्देशित किया है।

  • झारखंड की दो बेटियाँ अकेली ही साईकिल पर भारत भ्रमण पर निकल पड़ी

    झारखंड की दो बेटियाँ अकेली ही साईकिल पर भारत भ्रमण पर निकल पड़ी

    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कई पैरेंट्स अपनी बेटियों को सुरक्षा की दृष्टि से घर से अकेले भेजने से कतराते है, वहीं बिहार (पटना) व झारखंड (जमशेदपुर) की दो बेटियों का जज्बा यह है कि वो साइकिल से अकेले ही देश भ्रमण पर निकली है। घर वालों व मित्रों ने भी उन्हें मना किया लेकिन उनके हौंसलों और कुछ अलग करने की जिद को कोई नहीं रोका पाया। बिहार की हर्षा कुमारी और झारखंड की सावित्री मुर्मू पांच महीने से साईकिल की यात्रा करते हुए अभी 10 राज्य से होकर इंदौर पहुंची है।

  • अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

    अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

    आज से तकरीबन 20 साल पहले एक पिता अपनी नन्ही सी बच्ची को गोवा के एक अनाथालय में छोड़ आया था. किन हालात में उसने ये फ़ैसला लिया, उसकी क्या मजबूरियां थीं, कोई नहीं जानता.

  • गरीब मजदूर ने 600 किलोमीटर सायकिल चलाकर खोजी अपनी पत्नी

    रांची। कभी अपनी पत्नी की मौत का बदला लेने के लिए दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीर दिया था। यहां झारखंड के एक 'मांझी' ने खोई पत्नी को ढूंढ़ने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। लगातार 24 दिन वह साइकल से चलते रहे। गांव दर गांव भटकते रहे। 24 दिन में 600 किलोमीटर साइकल चलाने के बाद आखिरकार मेहनत रंग लाई और उनकी लापता पत्नी उन्हें मिल गईं।

  • पंचायतों से जानकारी लेकर गरीब महिलाओं को बांट देते हैं अपनी पेंशन

    पंचायतों से जानकारी लेकर गरीब महिलाओं को बांट देते हैं अपनी पेंशन

    इंदौर। एक शिक्षक लोगों को सही दिशा व ज्ञान देने के लिए समर्पित होता है। इसी उद्देश्य को ताउम्र अपनाते हुए 90 वर्षीय शिवराम आर्य 25 साल से सेवा कर रहे हैं। गांवों में सरपंचों को पत्र लिखकर दिव्यांग, विधवा, अतिवृद्ध बेसहारा महिलाओं की जानकारी मांगते हैं। इसके बाद हर माह मिलने वाली लगभग 18 हजार रुपए की पेंशन समान रूप से सभी में बांट देते हैं।

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