आप यहाँ है :

इन रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी

कुछ रंगन में भंग परी है,
कुछ रंगन में हाला,
कुछ रंगन में गोरी,
कुछ रंग गड़बड़ झाला।
वीरू-जय औ पप्पू-टीपू
ले रंगन को प्याला,
हाथी, झाडू़, सीटी, नारियल
हर रंग शतरंज वाला।
कौन रंग वोटर मन भावे,
जो रंगरेज़, सोई जाने
ईवीएम को तो कमीशन जाने,
हम तो जाने रंग तिरंगो वाला।

इन रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी।

धो डारो मैल मनन को भैया
ताकि डरे न कोई छोरी।
ऐसे रंग की नीति डारो,
खुश हो गांव को होरी।
एकरंगी नहीं देस आपनो,
बहुरंगी हंसी-ठिठोरी।
इस विविध रंग को बचा रहन देव
इससे न करो बरजोरी।
इन रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी।

लाल रंग सूरज को भैया,
नीरो निर्मल जल को।
हरियाली सब को है भावे,
भूरो है भूमि तन को।
पीत रंग पावन है प्यारे,
नारंगी ध्यान करन को।
रंग गुलाबी नारी सोहे,
और श्याम रंग है प्रभु को।
श्वेत रंग में सब रंग छिपे है,
रंग डारो तन-मन को।
इस रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी।

अरुण तिवारी
amethiarun@gmail.com
9868793799

Print Friendly, PDF & Email


सम्बंधित लेख
 

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top