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खाड़ी देशों तक जा पहुँची बनारसी सेंवईयों कि मिठास

होली, दीवाली हो या फिर ईद, बकरीद या रमजान सभी के घरों में त्योहारों के दौरान सेवइयां खूब पसंद की जाती हैं। और अगर सेवइयां बनारसी हो तो फिर कहने ही क्या! यहां की सेवइयों की मिठास और भीनी सुगंध देश-विदेश के रसोईघरों तक पहुंच चुकी है। खास बात यह कि यहां सेवइयों को मशीनों से नहीं बल्कि हाथों से तैयार किया जाता है। खाड़ी देशों में यहां की सेवइयों की खासी मांग है।

वाराणसी में तो वैसे कई इलाकों में सेवइयां बनाने का काम होता है लेकिन भदऊ चुंगी क्षेत्र के घर घर में बनारसी सेवई और बनारसी सेमी सेवई (दूध फेनी) का उत्पादन किया जाता है। इलाके के लोग इसे सेवई मंडी के नाम से भी जानते हैं। रमजान के पाक माह के लिए लगभग डेढ़ माह पूर्व से यहां सेवइयों के उत्पादन का काम शुरू हो जाता है। खास बात यह कि इस कारोबार से ज्यादातर हिंदू परिवार जुड़े हैं। सेवइयों के प्रमुख निर्माता रविशंकर गुप्ता ने बताया कि दूध फेनी के लिए अच्छे कारीगरों को कानपुर और बिहार से बुलाया जाता है, जो 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल की मजदूरी के हिसाब से सेवइयां तैयार करते हैं। रविशंकर ने बताया कि हस्तनिर्मित सेवइयों और दूधफेनी का स्वाद लाजवाब होता है। वैसे इलाके में सेवइयां बनाने के 70 से भी ज्यादा कारखाने हैं, लेकिन घरों में हाथों से बनाए जाई जाने वाली सेवइयों की मांग खूब है। यहां के मदनपुरा और बड़ी बाजार क्षेत्रो में पराठा सेवई का उत्पादन होता है।

यहां हर साल रोजाना 800 क्विंटल सेवइयों का उत्पादन होता है, वहीं होली, ईद व अन्य त्योहारों के मौके पर 1500 से 1600 क्विंटल सेवइयों का उत्पादन बढ़ जाता है। खाड़ी देशो में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी पहले से ऑर्डर देकर माल मंगवाते हैं। स्थानीय निर्माता एवं विक्रेता मुंबई, कोलकाता आदि शहरों के व्यापारी और निर्यातकों के माध्यम से सेवइयों का निर्यात करते हैं। सेवई कारोबार से जुड़े रामनरेश ने बताया इस बार महंगाई के कारण सेवई की कीमत में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें कीमामी सेवइयां 3000 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकती है, जबकि लच्छा सेवइयों के दाम 2400 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल है। हालांकि मशीन निर्मित सेवइयां 4100 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही हैं। हाथों से बने लच्छा दूधफेनी का भाव 4900 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल है।  उत्पादकों का मानना है कि सरकार इस सेवई उद्योग पर ध्यान दे तो इस उद्योग में संभावनाओं की कमी नहीं है। और उत्पादों को सीधे विदेशी खरीदारों तक पहुंचाया जा सकता है, जिसका लाभ उद्योग को मिलेगा।

साभार -बिज़नेस स्टैंडर्ड से 

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