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शोध में समाज हित जरूरी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में ‘पुनरुत्थान के लिए शोध’ विषय पर व्याख्यान

भोपाल। भारत में शोध की वर्तमान प्रवृत्ति नौकरी और नौकरी में तरक्की पाने तक सीमित है। जबकि शोध का उद्देश्य व्यक्तिगत हित नहीं, बल्कि समाज हित होना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि भारत की जरूरतें क्या हैं? हम शोध के जरिए समाज की किन समस्याओं का हल खोज सकते हैं? हमें सबसे पहले देखना चाहिए कि हमारे शोध में समाज कहाँ है? यह विचार डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव ने व्यक्त किए। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘पुनरुत्थान के लिए शोध’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. चक्रदेव बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थीं।

शोध विशेषज्ञ डॉ. चक्रदेव ने बताया कि शोध के प्रति रुचि जागृत करने और शोध की दिशा स्पष्ट करने के लिए ‘रिसर्च फॉर रिसर्जेंस फाउंडेशन’ महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि शोध अतीत के लिए नहीं है, बल्कि भविष्य की बेहतरी के लिए है। हमारे देश में अभी शोध का अर्थ पीएचडी की उपाधि प्राप्त करना है। यही कारण है कि पीएचडी की उपाधि मिलने के बाद शोधार्थी शोध से विमुख हो जाता है। क्योंकि, शोध का उद्देश्य उसके लिए सिर्फ पीएचडी और फिर पीएचडी के आधार पर नौकरी एवं तरक्की प्राप्त करना ही था। यदि उसके शोध का उद्देश्य समाज की समस्याओं का हल खोजना होता, तब शोध अधिक सार्थक होता। उन्होंने कहा कि सरकारें अनेक महत्त्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा करती है। इन योजनाओं की सफलता सुनिश्चित करने के लिए शोध आवश्यक हैं। योजनाएं कैसे सफल हों, इसके लिए शोधार्थियों और विश्वविद्यालयों को शोध करने चाहिए।

‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर शोध करें : डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव ने कहा कि हम क्यों नहीं ‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर शोध करते? भारत में गंदगी के कारणों को चिन्हित क्यों नहीं करते हैं? स्वच्छता कैसे आएगी? क्या यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि सरकार को बताएं कि भारत को स्वच्छ बनाने के लिए क्या प्रयास होने चाहिए? कैसे यह महत्त्वपूर्ण अभियान सफल हो सकता है? उन्होंने कहा कि पीएचडी के लिए अनिवार्यता हो कि शोधार्थी यह सिद्ध करे कि उसके शोध से समाज को लाभ होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिस विषय में हम शोध करना चाहते हैं। पहले उस विषय के बारे में समझ और अनुभव प्राप्त करना चाहिए। विषय के प्रति अच्छी समझ और गहरा अनुभव हमारे शोध को अधिक उपयोगी बनाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने शोध के महत्त्व को रेखांकित करते हुए बताया कि आम आदमी भी अपनी रोजमर्या की समस्याओं का हल शोध के जरिए खोजता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने निर्णय किया है कि शोध में एक अध्याय ऐसा होना चाहिए, जिसमें स्पष्ट हो कि प्राचीन समय में उस विषय पर क्या कहा गया है। वहीं, कुलसचिव दीपक शर्मा ने कहा कि यह शोध का पुनरुत्थान नहीं है, बल्कि पुनरुत्थान के लिए शोध है। कार्यक्रम के संयोजक मीडिया प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अविनाश बाजपेयी थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया।

(डॉ. पवित्र श्रीवास्तव)
निदेशक, जनसंपर्क

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