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किड्स लाईब्रेरीज एट 360 : दी रूटस ऑफ रीडींग ” का लोकार्पण

कोटा। बच्चों में ज्ञानवृद्धि, नैतिक-मूल्यों का विकास, पुस्तकों के प्रति प्रेम व उन्हें पढने की रूचि बनाने में सहायक सिद्ध होना ही बाल पुस्तकालय का ध्येय है। बाल विकास एवं संस्कार संवर्धन मे सार्वजनिक बाल पुस्तकालयो का स्थान सम्पुर्ण जगत मे अति महत्वपुर्ण है लेकिन इसको सुव्यव्स्थित प्रबंधन के लिये वन स्टोप सोल्युशन का अभाव है । इसी बात को ध्यान मे रखकर इनेली साउथ एशिया मेंटर डा. दीपक कुमार श्रीवास्तव मण्डल पुस्तकालयाध्यक्ष राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा ने “किड्स लाईब्रेरीज एट 360 : दी रूटस ऑफ रीडींग” का लेखन किया है जिसकी सह- लेखिका बाल पुस्तकालयाध्यक्ष शशि जैन तथा योगेन्द्र सिंह है ।

डा. दीपक कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखित ग्रंथ “किड्स लाईब्रेरीज एट 360 : दी रूटस ऑफ रीडींग” का लोकार्पण डा. डी .सी .जोशी कुलपति कृषि विश्वविधालय कोटा द्वारा किया गया ।

इस अवसर पर डा. डी .सी .जोशी ने “किड्स लाईब्रेरीज एट 360 : दी रूटस ऑफ रीडींग” ग्रंथ को लेकर कहा कि – यह पुस्तक बाल पुस्तकालय प्रबंधन एवं व्यव्स्थापन पर लिखा गया ऐसा डाक्युमेंट है जिसमे बाल पुस्तकालयों के विभिन्न प्रभागो को व्यवस्थापित करने लिये अंतराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रावधानो का उल्लेख कियागया है यह पुस्तक भावी सृजनशील चिन्तक, डिजाईनर, वैज्ञानिक, नेता, राष्ट्रभक्त एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में बालको के सतत विकास केलिये प्रेरक बाल पुस्तकालय संवर्धन मे अति महत्वपुर्ण है ।

इस अवसर पर इस ग्रंथ के लेखक डा दीपक ने कहा कि – पीपुल्स लाईब्रेरीयन होने के नाते यह ग्रंथ मैने अपने युरोपीयन ट्योर के दौरान किये गये अनुभव एवं वर्तमान मे उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को सम्म्लित करते हुये पाठक केन्द्रित सेवाओं पर लिखा है जो बाल सार्वजनिक पुस्तकालयो के क्षेत्र मे रुचि रखते है उनके लिये “ आई ऑपनर” सांबित होगा । कोवीड -19 के दौरान बालको मे “ लोस ऑफ लर्निंग” के केस काफी बढे है जिनका निदान बाल पुस्तकालय ही है , लेकिन उनका स्रजन स्तरीय हो इसके लिये यह पुस्तक एक माईल स्टोन है ।

इस लोकार्पण मे इस ग्र्ंथ की सह लेखिका शशि जैन ने कहा कि – “ यह पुस्तक बाल पुस्तकालय के प्रबंधन के लिये ज्योति किरण है वही सह लेखक योगेन्द्र सिंह ने कहा कि कैसे 21 वी सदी के बाल पुस्तकालय के स्वरूप को आधुनिकतम एवं स्तरीय बनाने के लिये की बुक है ।

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