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ज़ी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिशेंः डॉ. सुभाष चन्द्रा

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लि.’ (ZEEL) ने ‘सोनी पिक्चर नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Picture Networks India) के साथ हाल ही में विलय की घोषणा की है। इसके बाद से ही ‘जी’ के सबसे बड़े निवेशक ‘इनवेस्को’ (Invesco) ने जी एंटरटेनमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ पुनीत गोयनका समेत दो अन्य निदेशकों को हटाने और छह नए निदेशकों की नियुक्ति के साथ बोर्ड के पुनर्गठन की मांग शुरू कर दी है। इसी मद्देनजर इनवेस्को की मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि उसके पीछे किसका हाथ है? इस सवाल से इनवेस्को भाग क्यों रहा है? क्या चीन से उसे मदद मिल रही है? चीन ZEEL के खिलाफ साजिश क्यों कर रहा है? क्या किसी कॉरपोरेट घराने के इशारे पर सब हो रहा है?

सुभाष चन्द्रा और सुधीर चौधरी की बातचीत का ये वीडियो जरुर देखिये
https://www.youtube.com/watch?v=ZvpbDXYhSaw

इस मुद्दे पर पिछले दिनों ज़ी ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अनुरोध किया है कि वह ईजीएम बुलाने के इनवेस्को के अनुरोध को गैरकानूनी व अमान्य करार देने पर विचार करे। वहीं, ज़ी के संस्थापक श्री सुभाष चंद्रा ने इनवेस्को की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

बुधवार को अपने लोकप्रिय शो ‘डीएनए’ (DNA) में ‘जी मीडिया’ (Zee Media) के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ सुधीर चौधरी ने इस मुद्दे पर ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘जब 1992 में ‘जी’ नेटवर्क आया, तब सिर्फ दूरदर्शन था और वह मनोरंजन के क्षेत्र में सक्रिय नहीं था। हमने उस रिक्त स्थान को भरने का काम किया है। आज कोई 10 लाख करोड़ रुपए भी खर्च करे तो ‘जी’ जैसा ब्रैंड नहीं खड़ा कर सकता। हमारे गोदामों में आज भी 1992 से लेकर 1996 के बीच आई 10 करोड़ चिट्ठियाँ पड़ी हैं।’

डॉ. चंद्रा का कहना था, ‘ये चैनल इनवेस्को और मेरा या किसी और का नहीं है। हमारे ढाई लाख शेयर होल्डर्स का चैनल है। विदेशी खतरा तो 1994 में भी आया, जब मुझे 500 मिलियन डॉलर ऑफर किए गए थे, वो भी विदेशी मीडिया ही था। मैंने उस समय भी उनको कहा था कि इंडिया सेल के लिए नहीं है इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि इनवेस्को सिर्फ निवेशक है, मालिक नहीं है।’ डॉ. सुभाष चंद्रा के अनुसार, ‘इनवेस्को का मैं अभी तक समझ नहीं पा रहा कि इनके पीछे किसका हाथ है। लेकिन कोई तो है, जो पुनीत गोयनका को बदलने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, वो लालची हैं और इसको टेकओवर करना चाहते हैं। सीधे रास्ते से वो आ नहीं सकते इसलिए वो इस प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं। एक कंपनी कानून के प्रावधान का इस्तेमाल करके वो इस मीडिया कंपनी को हथियाना चाहते हैं।’

उनका कहना था, ‘आज ज़ी के छह बोर्ड मेंबर हैं और उस पर किसी का कंट्रोल नहीं है। सातवां पुनीत है, लेकिन वह भाग नहीं ले सकता है। सभी बोर्ड मेंबर ने कानूनी राय ली है और जितना मुझे मालूम है कि इनवेस्को की मांग कानूनी रूप से बिल्कुल गलत है। इनवेस्को आज का नहीं, बल्कि पुराना निवेशक है। पुनीत की क्षमता पर तो उन्हें पहले भी भरोसा था, लेकिन आज अचानक से कैसे उनकी राय बदल गई, ये बड़ा सवाल है।’

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है और मेरी ये निजी राय है कि इनवेस्को में कोई बेईमानी कर रहा है और अपने बड़े अधिकारियों को गुमराह कर रहा है। अगर इनवेस्को ने पहले से कोई डील करके रखी है तो वो कानूनी रूप से गलत है और इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आती है। इनवेस्को चाहे तो हम साधारण सभा की मीटिंग करने को भी तैयार हैं, लेकिन इससे पहले आप ये बताइये कि आपकी सोनी से क्या डील है? उसके बाद हम अपने शेयर धारकों को बताएंगे कि हमारी क्या योजना है।’

इस शो के दौरान डॉ. सुभाष चंद्रा ने यह भी कहा, ‘मैं ये क्लियर करना चाहता हूं कि इनवेस्को सबसे बड़ी निवेशक भले ही हो सकती है लेकिन 18 फीसदी हिस्से का मतलब यह नहीं है कि आप मालिक हो गए हैं। आज मनोरंजन की दुनिया में अगर कोई ऐसा चैनल है, जिसको पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है, तो वो जी के चैनल्स हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इस देश का कानून इनवेस्को को इस तरह टेकओवर करने की इजाजत नहीं देता। इनवेस्को पैसे के बल पर कुछ भी कर सकता है। मैं इनवेस्को को साफ कह देना चाहता हूं कि अगर आप गैरकानूनी तौर से हथियाने की सोच रहे हैं तो न तो ये हो सकता है और न ही हम ऐसा होने देने वाले हैं। इनवेस्को आज ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह बर्ताव कर रही है, लेकिन वो भूल गए कि उसी कंपनी को मैं 1995 में खरीद चुका हूं। आज भी वो डील कागज पर है और मेरे ढाई लाख पाउंड वहीं हैं। उस देश के पीएम तक से मेरी बात हुई थी लेकिन टेकओवर के नियम ऐसे थे कि वो कंपनी मेरे हाथ नहीं आई।’

उनका यह भी कहना था, ‘मुझे इस देश के लोगों पर पूरा भरोसा है कि वो इनवेस्को की मंशा को सफल नहीं होने देंगे। कई लोग यह भी कह रहे होंगे कि सोनी भी विदेशी कंपनी है लेकिन मैं साफ कह दूं कि उन्होंने पूरे पांच साल पुनीत को डायरेक्टर बनाने की हामी भरी है। वो भारत के हिसाब से ही चीजों को बनाना चाहते हैं। मीडिया संस्थान चलाना किसी बैंक को चलाने से कम नहीं है। ये सीधे लोगों के दिल और दिमाग पर असर करता है, इसलिए सरकार ने कानून बनाया हुआ है कि आपको अगर एक डायरेक्टर भी बदलना है तो भी आपको सरकार से इजाजत लेनी होगी। मुझे उम्मीद है कि सरकार भी इस मामले को पूरी तरह से देखेगी।’

इस बातचीत में डॉ. सुभाष चन्द्रा ने बताया कि जी टीवी (Zee TV) का सफर कैसे शुरू हुआ और उसका मालिक कौन है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि ‘जी टीवी’ एक ऐसे दौर में (1992 में) लॉन्च हुआ, जब हमारे देश में दूरदर्शन केवल एक चैनल था। दूरदर्शन की अपनी मर्यादा होती है। उनको पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर का काम करना पड़ता है इसलिए वे एंटरटेनमेंट के प्रोग्राम ज्यादा नहीं दिखा पाते थे। जगह खाली थी इसलिए जी 1992 में आया और ये जगह भर गई और ऐसे जी टीवी का जन्म हुआ।

इस दौरान उन्होंने कहा कि आज कोई 10 लाख करोड़ रुपए भी खर्च करे तो ऐसा चैनल रिक्रिएट नहीं हो सकता। चूंकि इस नेटवर्क को देखकर देश की 3-4 जनरेशन बड़ी हुई हैं। सबने इसे प्यार दिया है। आज भी हमारे यहां मुंबई में एक गोडाउन है, वहां 10 करोड़ चिट्ठियां 1992 से लेकर 1996 तक की पड़ी हुई हैं। तो ये चैनल मेरा चैनल नहीं है, ये चैनल इन्वेस्को का नहीं है, ये चैनल देश के 2.5 लाख शेयरहोल्डर का चैनल है। इसके ऊपर विदेशियों का अटैक 1994 में भी हुआ, उस समय मुझे एक विदेश की कंपनी द्वारा 500 मिलियन डॉलर ऑफर किए थे। मैंने उस समय भी उस कंपनी से कहा था, ‘india Is not For Sale’. आज भी ऐसी कोई स्थित बनती दिख रही है तो मैं ये कहता हूं कि इन्वेस्को एक शेयरहोल्डर है, वो मालिक नहीं है। वो शेयरहोल्डर की तरह ही व्यवहार करें, ना कि मालिक की तरह। जो शेयरहोल्डर हैं, जो मालिक हैं 2.5 लाख लोग उनको निर्णय करने दें।

आज कौन हैज़ी टीवी का मालिक?

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘ज़ी टीवी के 2.5 लाख शेयरहोल्डर (पब्लिक) का है। इस नेटवर्क का मालिक कोई अकेला व्यक्ति नहीं है। इस देश के 90 करोड़ व्यूअर्स हैं, जो रोज Zee TV को देखते हैं। वो मालिक हैं। 90 करोड़ भारत में और 60 करोड़ लोग विदेशों में इसे देखते हैं, वो 150 करोड़ लोग इसके मालिक हैं। इसका कोई एक व्यक्ति मालिक नहीं है, मैं भी इसका मालिक नहीं हूं। इसलिए मैं कहूंगा ये चैनल मेरा या इन्वेस्को का नहीं है। ये देश का चैनल है। देशावासियों का चैनल है।’

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