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मोदीजी देश आपसे इन बदलावों की उम्मीद रखता है

महोदय

“नोटबन्दी” के उत्साहवर्धक परिणाम से उत्साहित मोदी जी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में संकेत दिया है कि व्यवस्था सुधार के लिए यह आखिरी कदम नहीं है और ‘गरीब’ के कल्याण के लिए समर्पित मोदी जी अभी और कठोर निर्णय लेने में भी हिचकेंगे नहीं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि “नये वर्ष में नये भारत का निर्माण” उनका संकल्प है। अतः अब आगे के क्रांतिकारी निर्णय कैसे हो पता नहीं परंतु क्या मोदी जी भविष्य में निम्न बिंदुओं पर कोई सकारात्मक विचार करेंगे–

➖बंग्लादेश , पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यंमार व सूडान आदि से करोड़ों की संख्या में आये हुए घुसपैठियों से कब देश को मुक्ति मिलेगी? जिनके कारण देश की अर्थव्यवस्था पर भारी चोट पड़ रही है।विभिन्न अपराधों व आतंकवादी षडयंत्रो में भी इनकी संलिप्तता पायी जाती है।
➖क्या कश्मीरी अलगाववादियों व वहां की जनता पर केंद्र द्वारा वर्षो से दिए जा रहें विशेष आर्थिक पैकेज की कोई उपयोगिता है ?
➖ क्या राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप को बिगाड़ने वाला अल्पसंख्यक आयोग व मंत्रालय गरीब बहुसंख्यकों को आहत नहीं कर रहा है ?
➖ क्या वर्तमान सभी शासन-प्रशासन के अधिकारियों व सांसदो व विधायकों की सुख सुविधाओं के नियमों में सुधार हो सकता है ?
➖क्या सरकारी कार्यालयों में बिना “सुविधा शुल्क” कार्य करने की प्रवृति का प्रचलन बंद नहीं होना चाहिये ?
➖ क्या भूतपूर्व सभी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसदो और विधायकों आदि के “प्रिवी पर्सो” पर भी कोई संशोधन हो सकता है ?
➖क्या उन करोडो “भूतपूर्व” सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पेंशन नीतियों में भी उचित परिवर्तन की सम्भावना है ?
➖क्या विभिन्न जेलों में बंद आतंकियों व अपराधियों का बढ़ता बोझ बड़ी चिंता का विषय नहीं ?
➖क्या सम्भ्रांत लोगों (जेंटलमेन) का खेल “क्रिकेट” में हो रही सट्टेबाजी पर रोक लगा कर काले धन पर भी अंकुश लगेगा ?

उपरोक्त के अतिरिक्त और भी अनेक समस्यायें है जिनके समाधान को भी मोदी जी को प्राथमिकता से लेना होगा। निसंदेह एक सशक्त व कुशल प्रशासक मोदी जी का राष्ट्र के प्रति समर्पण और दूरदर्शिता उनकी कठोर निर्णायक क्षमता का परिचय कराती है। “नोटबंदी” के क्रांतिकारी कदम ने देश में दशकों की भ्रष्टाचारी व्यवस्था के उत्तरदायी राजनेताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों, पूंजीपतियों, उद्योगपतियों व व्यापारियों आदि के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है । साथ ही साथ आतंकियों के आर्थिक स्रोत्र जाली करेंसी, नशीले पदार्थ व अवैध हथियारों आदि पर भी नियंत्रण संभव होगा ?
अतः आतंकवाद व भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण के लिए भारतवासियों को इस “आर्थिक अघोषित आपातकाल” में थोड़ा धैर्य रखना होगा।किसी भी लंबी बीमारी के उपचार के लिए अंततः “शल्य चिकित्सा” आवश्यक हो जाती है ।

भवदीय
विनोद कुमार सर्वोदय
ग़ाज़ियाबाद



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