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श्री प्रभु सुनेंगे व्यापारियों के मन की बात

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु आगामी 18 फरवरी को देश के व्यापारियों, उद्योग एवं निर्यातकों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा सीधा संवाद करेंगे. इस मौके पर वो व्यापार एवं उद्योग के बारे में सरकार का पक्ष रखेंगे और भविष्य की योजनाओं का खाका भी सबके सामने रखेंगे. साथ ही व्यापार एवं उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापारियों की राय भी जानेंगे. इसके लिए देश के सभी राज्यों की राजधानियों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 37 एनआईसी केंद्रों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रबंध किया गया है जहाँ कांफ्रेंस में भाग लेने वाले व्यापारी एकत्र हो सकते हैं वहीँ दूसरी ओर कुछ अन्य स्थानों पर विभिन्न संगठनों द्वारा वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के इंतज़ाम को भी एनआईसी के द्वारा लिंक किया जाएगा. इसके अलावा इस कार्यक्रम को वेबकास्ट के जरिये देश भर में हजारों स्थानों पर देखा जा सकेगा.

व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे देश के व्यापार एवं उद्योग के ढांचे को चुस्त दुरुस्त करने की दिशा में एक ठोस सकारात्मक कदम बताया. उन्होंने कहा की इससे देश के व्यापार को करीब से समझने में मदद मिलेगी. खंडेलवाल ने कहा की घरेलू व्यापार को वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत लाने के बाद यह पहला कार्यक्रम है, इस दृष्टि से देश भर के व्यापारियों के लिए इस कार्यक्रम का महत्व बेहद अधिक है. देश में पहली बार हो रहा है जब कोई वाणिज्य मंत्री व्यापार एवं उद्योग के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये सीधा रूबरू होगा. व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार की यह कोशिश निश्चित रूप से व्यापारिक मुद्दों को प्रमुखता से रखने में मददगार साबित होगी.

देश के खुदरा बाजार में लगभग 13 करोड़ छोटे दुकानदार और छोटे-मंझोले व्यापारी लगे हुए हैं। इस बाजार के माध्यम से देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। लेकिन बढ़ते ऑन लाइन बाजार के कारण खुदरा बाजार बेहद मुश्किल में नजर आ रहा था। ऑन लाइन मार्केट में ग्राहकों को मिल रही भारी छूट उन्हें अपनी तरफ खींच रही थी जिसका सीधा नुकसान खुदरा व्यापारियों को उठाना पड़ रहा था।

लेकिन सरकार ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए एक फरवरी से ऑन लाइन व्यापार से जुड़े कई ऐसे नियम बना दिये जिसके कारण ऑनलाइन कंपनियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। अमेजन को अपनी ऑनलाइन लिस्टिंग से भारी मात्रा में सामान को हटाना पड़ा है। व्यापारियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। व्यापारियों की मांग है कि इस नियम को बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक ही सीमित न रखकर, घरेलू ऑनलाइन कंपनियों पर भी लागू करना चाहिए। क्योंकि ऐसा न करने पर विदेशी कंपनियां देशी कंपनियों से टाइअप करके पिछले दरवाजे से प्रवेश कर सकती हैं और घरेलू बाजार के लिए एक बार फिर खतरा बन सकती हैं।

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