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ओबामा सरकार अदालत में कहेगी, संघ आतंकवादी संगठन नहीं

अमेरिकी सरकार एक सिख समूह द्वारा भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने की अर्जी का विरोध करेगी। अमेरिका की सरकार ने देश की एक अदालत में कहा कि वह आरएसएस कोआतंकवादी संगठन घोषित करने के लिए दायर मुकदमे को खारिज करने को याचिका दायर करना चाहती है और इसके लिए उसे 14 अप्रैल तक का समय चाहिए। इस मामले में सिख समूह ने अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी को तलब किया है। 

सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) की ओर से दायर याचिका में उनके वकील गुरपतवंत एस पन्नुन का आरोप है कि आरएसएस फासीवादी विचारधारा में यकीन रखता है, उसी का अनुसरण करता है और भारत को समान धर्म तथा सांस्कृतिक पहचान वाले हिन्दू राष्ट्र के रूप में तब्दील करने के लिए अनैतिक अभियान चला रहा है। न्यू यॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रक्टि के अटॉर्नी प्रीत भराड़ा ने जज लॉरा टेलर स्वेन से आग्रह किया है कि एसएफजे की ओर से दायर 26 पृष्ठों वाली शिकायत पर जवाब देने के लिए सरकार को और अधिक समय दिया जाए। समूह ने जनवरी में मुकदमा दायर किया था और जॉन केरी को भी एक पक्ष बनाया गया था। केरी को मामले में समन जारी करते हुए कोर्ट ने जवाब देने के लिए दो महीने का वक्त दिया था। 

इसके हिसाब से शिकायत पर सरकार को 24 मार्च तक जवाब देना था और भराड़ा ने आवेदन दाखिल करने के लिए 14 अप्रैल तक का समय देने का आग्रह किया है। भराड़ा ने कहा, 'जवाब देने की जगह सरकार शिकायत को खारिज कराने की दिशा में बढ़ना चाहती है और अपने आवेदन व इससे संबंधित दस्तावेजों को अंतिम रूप देने के लिए उसे और अधिक समय की जरूरत है।' गुरपतवंत सिंह पन्नून ने कहा कि एसएफजे के मुताबिक, मुकदमा दायर करने के समय से भारतीय मीडिया में ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा के कई मामले खबरों में छाए रहे हैं। 

पन्नून ने कहा कि 'धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ खतरे के बढ़ने और लगातार हिंसा के इस्तेमाल' को इसमें शामिल करने के लिए समूह शिकायत को संशोधित करेगा। भराड़ा के ऑफिस ने हालांकि यह स्वीकार किया कि इस मामले में सरकार की ओर से जवाब देने की अंतिम अवधि मंगलवार थी, जिससे सरकार चूक गई और इसलिए सरकार को अतिरिक्त समय की जरूरत है। भरारा के मुताबिक, सरकार हालांकि इस मामले में जवाब देने के बजाय शिकायत को रद्द करने को लेकर हलफनामा दायर करना चाहती है।

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