Saturday, April 27, 2024
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Homeहिन्दी जगत'हिंदी भाषा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान' विषयक ऑनलाइन व्याख्यानमाला संपन्न

‘हिंदी भाषा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान’ विषयक ऑनलाइन व्याख्यानमाला संपन्न

हैदराबाद। उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास के आंतरिक गुणवत्ता प्रमाणन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं पी जी विभाग, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘हिंदी भाषा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान’ विषयक ऑनलाइन व्याख्यानमाला संपन्न हुई।

आंतरिक गुणवत्ता प्रमाणन प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. सुभाष जी. राणे की अध्यक्षता में संपन्न इस व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य वक्ता प्रमुख कवि, तेवरीकार, समीक्षक, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने हिंदी भाषा के विकास में पत्र-पत्रिकाओं के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता की शुरूआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को जाता है। राजा राममोहन राय ने ही प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा। उन्होंने 1819 में भारतीय भाषा का पहला समाचार-पत्र ‘संवाद कौमुदी’ (बांग्ला भाषा) प्रकाशित किया। 1822 में गुजराती भाषा का साप्ताहिक ‘मुंबईना समाचार’ प्रकाशित हुआ।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने जोर देकर कहा कि हिंदी पत्रकारिता और हिंदी भाषा के विकास में हिंदीतर भाषियों का योगदान उल्लेखनीय है। प्रो. शर्मा ने अनेक उदाहरण देकर यह प्रतिपादित किया कि नए युग के नए विषयों की अभिव्यक्ति के लिए नई संप्रेषणीय भाषा के निर्माण में हिंदी पत्रकारिता सदा सृजनात्मकता को साथ लेकर चली है। उन्होंने बताया कि सृजनात्मकता के अभाव में लोकप्रिय नई भाषा निर्मित नहीं हो सकती तथा इस अभाव ने ही प्रशासनिक हिंदी को जटिल और अबूझ बना दिया है।

इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि डॉ. शोडषीमोहन दां (कुलपति, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास) और मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा (कुलसचिव, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास) ने शुभाशंसा प्रस्तुत की। इस अवसर पर 70 से अधिक विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित होकर व्याख्यान से लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम का संयोजन पी जी विभाग, हैदराबाद की आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. पी. राधिका ने किया तथा डॉ. गोरखनाथ तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। ●

(रिपोर्ट: डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा)
सह संपादक ‘स्रवंति’
असिस्टेंट प्रोफेसर
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
हैदराबाद

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