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इस आईपीएस के सीने में धड़कता है लावारिस नवजात बच्चियों का दिल

अपराधियों के दिलों में खौफ भर देने वाले बिहार के दबंग आईपीएस शिवदीप वामन लांडे फिर चर्चाओं में हैं। एसपी लांडे के सख्त चेहरे के पीछे का यह नया रूप लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है।

पश्चिम बिहार के रोहताश जिले के एसपी के तौर पर छह महीने में ही लांडे ने अपने कारनामों से लोगों को अपना दीवाना बना लिया है। महाराष्ट्र में जन्में लांडे ने अब उन नवजात बच्चियों को अभियान छेड़ दिया है, जिन्हें गंभीर बीमारी या अन्य वजहों से मर जाने के लिए लावारिश छोड़ दिया जाता है।

कुछ दिन पहले रोहताश के सासाराम ‌स्थित जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर गोटपा गांव के पास रेलवे ट्रैक के निकट भैरव पासवान को एक बच्ची लावारिस हालत में शॉल में लिपटी हुई मिली थी। 45 साल के पासवान और उनकी पत्‍नी कलावती के कोई बच्चा नहीं था इसलिए वह इस नवजात को अपनाना चाहते थे।

लेकिन बच्ची की बीमारी के चलते उन्हें डर था कि वो इसे खो देंगे। जब भैरव और उनकी पत्‍नी को कुछ समझ नहीं आया कि वो क्या करें और कहां जाएं तो उन्होंने जिला पुलिस के मुखिया लांडे से संपर्क किया।

पासवान को मुसीबत में देख लांडे ने चंद मिनटों के अंदर मुफस्सिल पुलिस स्‍टेशन के इंचार्ज विवेक कुमार को पासवान के घर भेजा जो बीमार बच्ची को पुलिस की गाड़ी में लेकर तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे।

इसके बाद लांडे खुद अपनी डॉक्टर पत्‍नी गौरी के साथ अस्पताल पहुंचे। बच्ची को स्पेशल न्यू बोर्न गेयर यूनिट में भर्ती कराया गया था। इसके बाद एसपी लांडे ने ‌डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन को बुलाकर बच्ची को ‌दिए जाने वाले जरूरी इलाज पर बातचीत की।

लांडे की इस नेकदिली के कारण बच्ची पूरी तरह सुरक्षित रही। बच्ची को लाने वाले पासवान ने बताया ‌कि वह एक गरीब आदमी है अगर लांडे साहब और उनकी पत्‍नी ने इस पर ध्यान नहीं दिया होता तो कोई उम्‍मीद नहीं थी कि बच्ची जीवित रह पाती।

उनके बीच में आने से हम पर यह ‌दिव्य उपकार हो गया। बीते बुधवार को बच्ची को सीडब्लूसी के माध्यम से एंबुलेंस द्वारा नालंदा स्थित चाइल्ड केयर यूनिट में ले जाया गया जहां उसका बेहतर इलाज हो सके। सीडब्लूसी के सूत्रों ने बताया कि जब बच्‍ची पूरी तरह स्वस्‍थ हो जाएगी तब उसे गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वहीं लांडे ने बताया कि भैरव पासवान जिन्होंने इस बच्ची की जान बचाई फिलहाल वो इसके लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। मैं पूरा प्रयास करूंगा कि बच्ची का अधिकार उन्हें मिल सके।

हालांकि ऐसा यह पहली बार नहीं हुआ है कि लांडे ने किसी नवजात को बचाने के लिए इतना प्रयास किया हो। साल 2012 में जब वह अररिया में एसपी थे तब भी उन्होंने एक नवजात बच्ची की जान बचाई थी।

जिसे उसकी मां ने कड़कती ठंड में उनके सरकारी आवास के गेट के बाहर छोड़ दिया था। मासूम को रोना सुनकर लांडे घर से बाहर आए और उसे अपने सीने से लगाकर अंदर ले गए। बच्ची को गर्मी का एहसास कराने और उसकी सांसे सामान्य होने के बाद उन्होंने उसे  सीडब्‍ल्यूसी की अध्यक्ष रीता घोष के पास पहुंचा दिया जहां उसका जरूरी उपचार हो सका।

इसके अलावा बीते जनवरी को भी जब वह पटना के एसपी सिटी थे तब भी उन्होंने एक नवजात बच्ची को उस समय बचाया था जब एक प्राइवेट अस्पताल द्वारा 2.5 लाख रुपये का बिल बनाने के कारण उसका पिता उसे अस्पताल में ही छोड़ गया ‌था।

सपी सिटी रहते वाकये की जानकारी लांडे को हुई तो वह बच्ची की मां का पता लगाने के लिए इस हद तक चले गए कि पूर्वी बिहार के कटिहार जिले में उसके घर पहुंच गए।

उनके वहां पहुंचने पर सामने आया कि अस्पातल के पैसे न चुकाने के कारण बच्ची के पिता ने अपनी पत्‍नी से बता रखा था कि जन्म के दौरान ही उसकी मौत हो गई और वहीं उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

लांडे ने बच्ची को ही उसके घर तक नहीं पहुंचाया बल्कि उसके इलाज का भी इंतजाम किया जिससे वह जिंदा रह सकी। पटना में एसपी सिटी रहते हुए भारी संख्या में युवतियों को अपना प्रशंसक बनाने वाले लांडे कहते हैं कि, 'बच्चियों को बचाने के लिए मुझे महादेव का आशीर्वाद प्राप्‍त है। उन्होंने मुझे और मेरी पत्‍नी को पहली औलाद के रूप में बेटी ही दी'।

साभार- हिन्दुस्तान टाईम्स से 



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