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कोविड़ के बहाने दिन रात केंद्र सरकार को कोसने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कुल 40 पत्रकारों के लिए पांच पांच लाख रूपए की सहायता राशि स्वीकृत कर दी है । इनमें से 26 पत्रकारों की कोरोना से और 11 पत्रकारों की सडक दुर्घटना , और अन्य गंभीर बीमारियों से मृत्यु हो गयी थी । तीन पत्रकार ऐसे हैं जो लंबे समय से शारीरिक रूप से अक्षम हैं और बिस्तर पर हैं । सरकार पर हिंदुत्ववादी होने का आरोप लगाने वाले ये भी जान लें कि किसी भी आवेदन की राशि स्वीकृत करने का आधार धर्म या जाति बिल्कुल नहीं है । मैं जानबूझ कर यहां नहीं लिखना चाहती कितने मुस्लिम और ईसाई पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक मदद दी गयी है । केवल सभी स्पोर्टिंग पेपर सही होने चाहिएं । सभी अपेक्षित प्रमाण पत्र होने चाहिएं । पत्रकार की विचारधारा क्या थी इससे भी कमेटी को कुछ लेना देना नहीं है । जैसा कि आजकल चलन हो गया है पत्रकारों को भी खांचे में बांटने का ।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत गठित पत्रकार कल्याण योजना कमेटी की बैठक मंत्रालय के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में आज हुई । खरे ने कहा कि कोरोना के हालात देखते हुए अब हर सप्ताह गुरूवार को कमेटी की बैठक होगी यदि एक केस भी हुआ तो उस पर भी विचार किया जाएगा । कमेटी में 6 पत्रकार हैं जिनमें से एक मैं भी हूं । कमेटी के अध्यक्ष मंत्रालय के वर्तमान सचिव अमित खरे हैं । दो अन्य अधिकारी भी सदस्य हैं । पिछले साल गठित कमेटी में मुझे सदस्य बनाया गया था । हर बैठक में मैं सचिव अमित खरे का एक अत्यंत मानवीय चेहरा देखती हूं । हम आज की बैठक में मंत्रालय से अनुरोध करने वाले थे कि बैठक महीने में एक बार की जाए । लेकिन इससे पहले की हम अपनी बात रखते सचिव अमित खरे ने स्वयं ही घोषणा कर दी कि अब हर गुरूवार को शाम को चार बजे पत्रकार कल्याण योजना कमेटी की बैठक हुआ करेगी यदि एक केस भी होगा तो उस पर विचार किया जाएगा । जाहिर सी बात है सरकार ने तय किया तो सचिव ने घोषणा की । इससे ज्यादा सरकार इन मामलों में क्या कर सकती है । आलोचना आप भले ही कितनी भी कर लिजिए लेकिन जब कोई अच्छा काम हो तो उसकी भी सराहना होनी चाहिए ।

इससे पहले मंत्रालय ने साल 2020-21 में कोविड़ से मरने वाले 39 पत्रकारों के परिवारों को मार्च में पांच पांच लाख रूपए की सहायता राशि दी थी । कमेटी के पत्रकार सदस्यों ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि सहायता राशि बढ़ायी जाए और पत्रकारों को आजीवन सीजीएचएस कार्ड दिया जाए । मंत्रालय के संयुक्त सचिव विक्रम सहाय ने भरोसा दिलाया कि इस पर विचार किया जाएगा और राशि बढ़ाने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा ।

यदि मैं कमेटी की सदस्य न होती तो शायद इतने दावे के साथ ये सब न लिख सकती । मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय का प्रैस रिलेशंस विभाग लॉक डॉऊन के समय में भी आर्थिक सहायता के लिए आने वाले आवेदनों पर दिन रात काम करता है । परिवारों को जल्द सहायता मिले इसलिए छुट्टी के दिन भी काम करके आवेदन फाइलें पूरी की गयीं । मंत्रालय और पीआईबी का मानवीय चेहरा आपदा के इस समय में देखने को मिल रहा है । प्रैस फेसिलिटी की अतिरिक्त महानिदेशक कंचन प्रसाद का विभाग आवेदनकर्ताओं से निरंतर संपर्क में रहता है । हर पत्रकार की पत्नी इतनी शिक्षित नहीं होती कि वो ऑन लाईन फॉर्म भर सकें । विभाग का स्टॉफ पत्रकारों के परिवारों को फोन पर एक एक बात समझाते हैं इतना ही नहीं उनसे सहानुभूति भी जताते है । जितनी बार फोन करना पड़े करते हैं । कोशिश यही रहती है कि कोई भी केस दस्तावेजों के कारण अटक न जाए । कोविड़ काल में जब आधे से ज्यादा पीआईबी के कर्मचारी स्वयं कोरोना ग्रस्त हैं या उनके परिवार के लोग कोरोना ग्रस्त हैं । चाार पीआईबी अफसरों की पिछले दिनों कोरोना से मौत हुई । ऐसे माहौल में पत्रकारों के परिवारों के लिए चिंता करना उन्हें जल्द सहायता राशि दिलाना । कंचन प्रसाद , शंभुनाथ चौधरी और अग्रवाल जी का मानवता के प्रति एक एक केस के पेपर मंगवाने के लिए दिन रात एक करना ये बहुत प्रशंसनीय हैं । सूचनाऔर प्रसारण मंत्रालय को साधुवाद ।

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