Thursday, July 25, 2024
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बेकार सामग्री’’ से आकर्षक परिधान

भाविनी पारिख का स्टार्ट-अप बंको जंको फैशन इंडस्ट्री की बेकार सामग्री का इस्तेमाल कर आकर्षक परिधान तैयार करता है।

बंको जंको परिधान औद्योगिक कचरे, बेकार हो चुके स्टॉक और सदाजीवी सामग्री का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं।

बंको जंको उत्पाद विशिष्ट होते हैं। इनके चमकीले रंग, आधुनिक डिजाइन और बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले उत्पादों से बेहतरीन परिधान तैयार करना बंको जंको की संस्थापक भाविनी पारिख की सामाजिक उद्यमिता और टिकाऊ फैशन को लेकर उनके उत्साह की गवाह हैं। वह कहती हैं, ‘‘हम औद्योगिक कचरे, बेकार हो चुके स्टॉक और सदाजीवी सामग्री का उपयोग करके विशेष परिधानों का डिजाइन तैयार करते हैं, उन्हें उनके अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करते हैं और फिर विशेष परिधान तैयार करते हैं। प्रत्येक उत्पाद की अपनी दास्तां होती है और कोई भी दो उत्पाद एक जैसे नहीं होते।’’

पारिख एक टेक्सटाइल आर्टिस्ट और फैशन डिजाइनर हैं और बंको जंको एवं डिज़ाइनलाइफ सोशल वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। इन दोनों संगठनों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 1000 महिलाओं को रोज़गार दिया है। पारिख, अमेरिकी कांसुलेट जनरल चेन्नई से फंडिंग प्राप्त प्रोग्राम वुमेन इन इंडियन सोशल ऑंट्रिप्रिन्योरशिप नेटवर्क (वाइजन) प्रोग्राम का हिस्सा थीं, जो महिला सामाजिक उद्यमियों को अपने उद्यमों के विस्तार के लिए प्रबंध और नेतृत्व कौशल को विकसित करने में सहायता देता है।

बेकार सामग्री को लेकर जागरूकता

पारिख की रुचि फैशन में थी और वह कई मशहूर ब्रांडों के लिए डिजाइन करती थीं। वह कहती हैं, ‘‘उन वर्षों में मुझे बहुत सारा ज्ञान मिला और मैं इस इंडस्ट्री को बदलने के तरीकों के बारे में और अधिक जानने और शोध करने के लिए प्रेरित हुई।’’ उन्हें इस दौरान यह भी पता चला कि इस उद्योग से बड़ी मात्रा में कचरा भी निकलता है। वह बताती हैं, ‘‘किसी भी परिधान का 15 फीसदी कपड़ा सीधे लैंडफिल में जाता है। कभी-कभी तो यह प्रतिशत और भी ज्यादा होता है।’’

इसके बाद पारिख ने 2018 में बंको जंको की शुरुआत की- जापानी में बंको का मतलब कला, सजावट या रचना से होता है और जंको शब्द का अर्थ जंक से निकला है। अपनी स्थापना के बाद से उनके स्टार्ट-अप ने 36 टन कचरे को संसाधित किया है और 250 से अधिक उत्पादों का व्यवसायीकरण किया है। पारिख के शब्दों में, ‘‘हमारे स्टाइलिश कपड़े कभी कारखानों के फर्श पर स्क्रैप हुआ करते थे।’’

सदाजीविता की अवधारणा डिजाइन और उत्पादन प्रक्रियाओं का अभिन्न अंग है- कपड़े आरामदायक और उपयोगी होने के साथ बेकार समझी गई सामग्रियों के बेहतर इस्तेमाल से तैयार होते हैं और उत्पादन के दौरान कचरा एकदम पैदा न हो, इस बात का पूरा प्रयास किया जाता है। पारिख कहती हैं, ‘‘प्रॉडक्शन के बाद हर चीज़ को पैचवर्क, बैक फैब्रिक की बुनाई और सहायक चीजें तैयार करके वापस उपयोग में लाया जाता है। अपसाइक्लिंग से कचरे में कमी आती है और मौजूदा वस्तुओं के जीवनकाल को बढ़ाकर फैशन के प्रति अधिक टिकाऊ दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता है।’’

एक सामुदायिक प्रयास
पारिख बताती हैं, ‘‘इन्हें गांवों, आश्रय स्थलों और किशोर केंद्रों की गरीब महिलाओं द्वारा आजीविका के साधन के अलावा उन्हें सामाजिक रूप से जोड़ने में सहायता देने के लिए तैयार कराया जाता है।’’ बंको जंको में इन महिलाओं का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। पारिख कहती हैं, ‘‘वे ब्रांड की आपूर्ति शृंखला का एक अभिन्न हिस्सा हैं, वे परिधान और दूसरी चीजें बनाने के लिए अपने कौशल का इस्तेमाल करती हैं। उनकी हस्तकला और रचनात्मकता, उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिससे तैयार डिजाइनों को एक खास पहचान मिलती है।’’

बंको जंको से जुड़ी सलमा रिजवान के अनुसार, ‘‘यह सिर्फ काम ही नहीं है, बल्कि यह मेरी रचनात्मकता को दिखाने और किसी सार्थक चीज़ का हिस्सा बनने का अवसर है। बंको जंको महिलाओं को पारंपरिक शिल्प कौशल को प्रदर्शित करने और लोगों के व्यापक वर्ग से जुड़ने का एक मंच भी प्रदान करता है।’’

वाइजन प्रभाव
पारिख के अनुसार, ‘‘वाइजेन का हिस्सा होने के कारण, हमें अद्भुत नेटवर्किंग, साझेदारी, सहयोग और जानकारियों को साझा करने का अवसर मिला। बंको जंको को विशेषज्ञता, मार्गनिर्देशन और इस नेटवर्क के सहयोग से बहुत फायदा हुआ और इसके कारण वह अपने प्रभाव को बढ़ा पाने में सक्षम बना।’’

विशेष कार्याशालाओं, क्षमता निर्माण सत्रों और परामर्श कार्यक्रमों ने बंको जंको को अपनी कारोबारी रणनीतियों के विस्तार, उसके संचालन को मजबूती देने और उद्योग के रुझानों के साथ ताज़ातरीन रहने में मदद की। पारिख के अनुसार, ‘‘इससे हमारी दृश्यता और प्रतिष्ठा बढ़ी। वाइजन से प्राप्त मदद और मान्यता, बंको जंको को विश्वसनीयता हासिल करने, संभावित ग्राहकों और साझेदारों को आकर्षित करने में मदद कर सकी।’’

पारिख की योजना बंको जंको के कॉरपोरेट गि़फ्ट डिविज़न का और अधिक विस्तार करने की है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को सशक्त बनाने के साथ इससे एक बड़ा पर्यावरणीय प्रभाव पैदा किया जा सके। वह कहती हैं, ‘‘हमारे पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और कटौती रणनीतियों को और अधिक ठोस बनाने की ज़रूरत है। इसके अलावा हमें सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों पर निगाह के लिए अधिक पारदर्शी प्रभाव माप प्रणाली स्थापित करने की ज़रूरत है।’’

(पारोमिता पेन यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेवाडा, रेनो में ग्लोबल मीडिया स्टडीज़ विषय की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं।)
(फोटोग्राफः साभार भाविनी पारिख)

साभार-https://spanmag.com/hi/ से

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