Tuesday, April 23, 2024
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सेहत के लिए युवा नेतृत्व

यूएसएड-इंडिया के यश फेलोशिप कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के सस्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान के लिए युवा नेतृत्व को विकसित करना है। भारत में 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और जनसांख्यिकी की दृष्टि से देश की सामाजिक और स्वास्थ्य पहल में युवाओं की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। युवाओं की भागीदारी से न केवल यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि पहल न केवल उनकी अनूठी चुनौतियों और आकांक्षाओं को पूरा करती है, बल्कि उनमें नेतृत्व कौशल और महत्वपूर्ण चिंतनको विकसित करने में भी मदद करती है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, यूएसएड-इंडिया की मदद से देश के पांच राज्यों के युवाओं को 10 महीने की फेलोशिप दी जाती है। इसके तहत युवाओं को प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों के तहत जटिल समस्याओं के अभिनव समाधान में योगदान देने और जमीनी स्तर पर अनुसंधान एवं नीतियों की पैरवी करने के लिए और अधिक सशक्त किया जाता है। यूएसएड-इंडिया के लक्ष्यों के अनुरूप हाशिए पर पड़ी आबादी के स्वास्थ्य और उनके जीवन में सुधार के लिए यश फेलोशिप प्रोग्राम असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश और ओडिशा में युवाओं की प्रजनन स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर केंद्रित है।

यूएसएड-इंडिया की पारिवारिक स्वास्थ्य प्रभाग की प्रमुख मोनी सिन्हा सागर के अनुसार, ‘‘यश फेलोशिप प्रोग्राम युवा नेतृत्व को विभिन्न क्षेत्रों में योगदान करने के लिए एक मंच प्रदान करता है जो ऐसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करे जो सीधे तौर पर युवाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। युवा नेतृत्व और युवाओं के जुनून में निवेश करने से यूएसएड की युवा नीति में उल्लिखित व्यापक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में कई गुणा असर पड़ेगा।’’

यश फेलोशिप प्रोग्राम का पहला समूह नवंबर 2022 में शुरू हुआ और इसे द इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वुमेन के माध्यम से झपीगो द्वारा कार्यान्वित कराया गया। इसमें 20 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले 22 फेलो को सलाह, विषयगत विशेषज्ञों से विमर्श, ओपन हाउस सत्र और साझा कार्ययोजनाओं के जरिए क्षमता सुदृढ़ीकरण, ज्ञानवर्धन और कौशल विकास में सशक्त किया गया।

इन फेलो ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, यौन और प्रजनन अधिकारों पर स्कूल न जाने वाली लड़कियों तक पहुंच, परिवार नियोजन में पुरुषों की भूमिका और जेंडर एवं मर्दाना मानदंडों के प्रभाव जैसे विषयों पर नीतियों के विवरण एवं प्रकाशन तैयार किए। मौजूदा समय में फेलोशिप के पहले समूह के दौर के प्रभाव और परिणामों का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि भविष्य के समूहों को तैयार करने के लिए एक बुनियाद तैयार की जा सके।

झपीगो में फैमिली प्लानिंग, जेंडर एंड यूथ के कंट्री लीड अभिजीत पाठक के अनुसार, ‘‘‘नथिंग फ़ॉर देम विदाउट देम’ युवाओं की सक्रिय भागीदारी के महत्व को स्वीकार करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समाधान प्रासंगिक हैं और युवाओं के जीवन के अनुभवों के अनुरूप हैं और जिम्मेदारी एवं लोगों से जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देते हैं।’’

सभी फेलो जमीनी स्तर के संगठनों से संबंधित हैं जो प्रोग्राम से मिली समझ को स्थानीय कार्रवाई में बदलने में मददगार बनेंगे। सागर के अनुसार, ‘‘अपने जीवन के अनुभवों और पेशवर कौशल का लाभ उठा कर ये युवा अपने समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय रूप से योगदान दे सकते हैं।’’ अब आप तीन यश फेलो से मिलिए और उनकी प्रेरणाओं, नतीज़ों और योजनाओं के बारे में जानिए।

नम्रता पंडित, रांची, झारखंड

मौजूदा समय में मैं इस पर काम कर रही हूं: युवा इंडिया में एक विज्ञान शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह करते हुए विज्ञान की शिक्षा तक पहुंच को विस्तार दे रही हूं, औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा के मिलन स्थल पर। मैं झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आदिवासी समुदायों के किशोरों के साथ काम करती हूं। मेरा लक्ष्य लड़कियों को बाल विवाह के जंजाल से बचाते हुए उन्हें स्कूलों में बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक असर पैदा करना है।

मैं यश फेलो बनना चाहती थी क्योंकि: मैं युवा महिलाओं के लिए प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों और मानसिक सेहत पर उसके असर के बारे में और अधिक जानना चाहती थी। मै यह भी सीखने के लिए उत्सुक थी कि अमल में लाई जा सकने योग्य नीति विवरण तैयार करने में डेटा का कुशलतापूर्वक कैसे इस्तेमाल किया जाए, समाज विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कैसे किया जाए और जमीनी स्तर पर बड़े स्तर पर ले जाई जा सकने वाली परियोजनाओं की विकास प्रक्रियाओं को कैसे समझा जाए।

फेलोशिप ने मुझे सिखाया: मैंने एक निश्चित समयसीमा में बड़ स्तर पर ले जाई जा सकने वाली जमीनी स्तर की परियोजनाओं को बनाने में चुनौतियों के बारे में, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों और नेतृत्व कौशल में पुरुषों को शामिल करने के महत्व के बारे में सीखा। मैंने अनुसंधान और डेटा प्रबंधन में भी कौशल विकसित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने मुझे देश में यौन एवं प्रजनन अधिकारों और स्वास्थ्य के परिदृश्य को समझने के लिए व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से दूर रहना भी सिखाया।

इस अनुभव से मुझे मिली सबसे बड़ी सीख: भय आधारित दृष्टिकोण के बजाय अधिकार आधारित दृष्टिकोण के साथ अपना जीवन जीना। मैंने और अधिक समावेशी होना भी सीखा है। मेरे एक ऐसे काम का प्रभाव जिस पर मुझे सबसे अधिक गर्व है: यह देखना कि किशोर विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जानकारी तक पहुंचने के अधिकार के लिए प्रयासरत हैं। इन अधिकारों के बारे में उनकी जागरूकता और मांगों की प्रभावी अभिव्यक्ति, खासकर बाल विवाह के विरोध में, वास्तव में काफी सराहनीय है।

मेरी भविष्य की योजनाएं: हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए समावेशिता और पहुंच को विस्तार देते हुए विज्ञान शिक्षा नीति निर्माण के साथ जुड़ना। मैं विशेषतौर पर शिक्षकों की मदद करके जमीनी स्तर पर स्कूलों में शिक्षा नीतियों के कार्यान्वयन में योगदान देने की इच्छा रखती हूं। मेरा लक्ष्य स्थानीय स्तर पर हितधारकों की मदद से पारंपरिक स्कूली व्यवस्था के बाहर वयस्कों और किशोरों के लिए विविध विज्ञान शिक्षा संसाधनों की उपलब्धता को आसान बनाना भी है।

यश फ़ेलो नम्रता पंडित टर्म रिपोर्ट कार्ड दिवस पर एक विद्यार्थी और उसके संरक्षक से बात करते हुए। (फोटोग्राफः यूएसएड मोमेंटम)

श्रेया सिंह, बेगूसराय, बिहार

मौजूदा समय में मैं यह कर रही हूं: मै इस समय माहवारी स्वास्थ्य प्रबंधन और यौन उत्पीड़न की रोकथाम पर एक पूर्णकालिक अनुसंधान सलाहकार और अंशकालिक प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर रही हूं।

मैं यश फैलो बनना चाहती थी क्योंकि : मैं समान क्षेत्र वाले फेलो से संवाद, उनके साथ जुड़ना और सीखना चाहती थी। हालांकि मैंने इस फेलोशिप के माध्यम से जेंडर, जेंडर आधारित हिंसा और महिलाओं के लिए कानून पर प्रशिक्षण दिया था, लेकिन मुझे यह उम्मीद थी कि मैं यौन प्रजनन अधिकार जैसे विषय पर युवाओं के साथ किस तरह से जुड़ पाऊंगी, यह भी सीख सकूंगीं।

फेलोशिप से मुझे क्या मदद मिली: मुझे अपने मौजूदा ज्ञान का इस्तेमाल करते हुए यौन एवं प्रजनन अधिकारों के संरक्षण करने वाली नीतियों के बारे में एक बेहतर समझ मिली। फेलोशिप ने मुझे इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बातचीत का अवसर दिया जिससे सेक्सुएलिटी के बारे में मेरी समझ और मेरे शोध लेखन कौशल, दोनों में ही सुधार हुआ।

इस अनुभव से मुझे मिली सबसे बड़ी सीख: इस अध्ययन का उद्देश्य हमने निर्रित किया जो देश के विभिन्न क्षेत्रों से मिली समझ और टिप्पणियों पर आधारित था। निष्कर्षों की समीक्षा ज्ञानवर्धक है, जिससे पितृसत्तात्मक समाज के व्यापक प्रभाव और पारिवारिक फैसलों में पुरुषों के दबदबे का पता चला।

मेरे कार्य का एक प्रभाव जिस पर मुझे सबसे अधिक गर्व है: मेरे प्रशिक्षण सत्रों के बाद प्रशिक्षुओं के चेहरे पर आने वाली मुस्कराहट से मिलने वाली खुशी का कोई जवाब नहीं। शुरुआत में प्रतिभागी थोड़े संदेह में रहते हैं लेकिन बाद में जब सहज हो जाते हैं तो उस बदलाव को महसूस करना, उनके सवाल और उनका अपने अनुभवों को साझा करना काफी लाभकारी होता है। यही बातें मेरी बुनियादी प्रेरणा की वजह बनती हैं।

मेरी भविष्य की योजनाएं: महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों के समावेशन और समानता की नीति को मजबूती देने में मदद करने के लिहाज से कार्रवाई आधारित अनुसंधान के साथ गंभीरता से जुड़ना।

श्रेया सिंह (दाएं से दूसरे नंबर पर) ग्रामीण समुदायों की महिलाओं से माहवारी स्वास्‍थ्य और स्वच्छता पर संवाद करते हुए।
(फोटोग्राफः यूएसएड मोमेंटम)

स्वातिरेखा दास, केंद्रपाड़ा, ओडिशा

मौजूदा समय में मैं यह कर रही हूं: मैं इस समय ओडिशा के नयागढ़ जिले में स्थित सेंटर फॉर कैटेलाइजिंग चेंज के साथ बाल विवाह, कम उम्र में और जबरन विवाह को रोकने और लड़कियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रही हूं।मैं यश फेलो बनना चाहती थी क्योंकि: मैं अपने क्षेत्र में कुछ नया करना चाहती थी, जो मेरे जुनून के अनुरूप हो और मेरे काम का व्यापक प्रभाव डालने की क्षमता रखने वाला हो।

फेलोशिप से मैंने यह सीखा: फेलोशिप ने मुझे एक विश्वास से भरे सामाजिक संगठनकर्ता बनने में मदद दी। पिछले साल मैंने खुद में बदलाव करते हुए अपने रचनात्मक विचारों को ठोस स्वरूप देते हुए फेलोशिप प्रोग्राम के भीतर ही अंतरविषयक सहयोग को बढ़ावा दिया। इस अनुभव ने समवन्वय, सहयोग, संवाद और सामुदायिक भागीदारी में मेरे कौशल को और निखारा है।

इस अनुभव से मुझे मिली सबसे बड़ी सीख: अब मैं बिना डरे लोगों के साथ संवाद करती हूं और मुझमें आपसी बातचीत को कुशलता के साथ संभालने का विश्वास पैदा हो चुका है। मेरे काम का एक प्रभाव जिस पर मुझे सबसे अधिक गर्व है: मेरे काम को समुदाय से स्वीकृति मिली, जो यह दर्शाता है कि मेरे प्रयासों का लोगों पर सकारात्मक असर पड़ा है।

मेरी भविष्य की योजनाएं: सहयोग, विविधता और लचीलेपन को बढ़ावा देते हुए समुदायों के साथ अटूट साझेदारी कायम करना। मेरा लक्ष्य एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देना है जिसमें जवाबदेह शासन और बच्चों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता हो।

यश फ़ेलो स्वातिरेखा दास (बाएं से दूसरे नंबर पर) बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और ज़बरन विवाह पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करते हुए। (फोटोग्राफः यूएसएड मोमेंटम)

साभार-https://spanmag.com/hi/

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