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पुरस्कार लौटाने वालों के लिए एक प्राचीन लोक कथा

एक पिता की युवा औलाद एकदम नकारा थी । तंग आकर पिता ने ऐलान कर दिया की आज से खाना तभी मिलेगा जब 100 रुपये कमाकर लायेंगा । माँ ने नकारे बेटे को चुपचाप 100 रुपये दे दिये और कहा शाम को आकर बोल देना की कमाये है । शाम को लडका घर आया तो पिता को 100 रूपये दिखायें,पिता ने कहा इस नोट को नाली में फेँक आओं…..लडका तुरंत नोट नाली मे फेंक आया । पिता समझ चुका था की ये इसकी मेहनत की कमाई नही । पिता ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया ताकि वो बेटे की मदद ना कर पायें ।
आज फिर बेटे को 100 रुपये कमाकर लाने थे तो लडके के पास मेहनत करके कमाने के अलावा कोई चारा ना बचा 1 शाम को वो जब 100 रुपये कमाकर घर लोटा तो पिता नें फिर से उस नोट को नाली मे डालने को कहा तौ लडके ने साफ मना कर दिया क्यो की आज उसे इस नोट की कीमत पता चल गयी थी !! ‪

#‎पुरुस्कार‬ लौटाने वाले लेखक और फिल्मकार इस पोस्ट को दिल पर ना लें….क्योंंकि आप लोग तो (देश के गरीब लोगों की) मेहनत की कमाई ही खाते हो….

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