Friday, April 19, 2024
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ऐ वतन मेरे वतन: साहस के बारे में सिनेमा का ओजस्वी गान

ऐ वतन मेरे वतन का निर्माण: “आज के दर्शकों के लिए एक व्यापक सिनेमाई अनुभव बनाने के लिए इतिहास से प्रेरणा लेना”

गोआ।  गोवा में 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में एक दिलचस्प पैनल चर्चा में, ‘ऐ वतन मेरे वतन’ के रचनाकारों ने व्यापक सिनेमाई अनुभव तैयार करने के लिए इतिहास से प्रेरणा लेने की कला पर प्रकाश डाला। पैनल में फिल्म के निर्देशक कन्नन अय्यर, निर्माता करण जौहर, मुख्य अभिनेत्री सारा अली खान, प्राइम वीडियो (ओरिजिनल्स) की प्रमुख (भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया) अपर्णा पुरोहित और धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता शामिल थे। पैनल चर्चा का संचालन प्राइम वीडियो इंडिया के सहयोग से रोहिणी रामनाथन द्वारा किया गया था।

एक प्रमुख गांधीवादी और स्वतंत्रता सेनानी, उषा मेहता (25 मार्च 1920- 11 अगस्त 2000) भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रेडियो प्रसारण के आयोजन में अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। उषा मेहता की न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और एक अनुकरणीय गांधीवादी के रूप में उनकी भूमिका उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्ति बनाती है। औपनिवेशिक शासन से आज़ादी पाने के उनके साहसिक प्रयासों के सम्मान में, भारत सरकार ने उन्हें 1998 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित किया। यह फिल्म उस असाधारण महिला की कहानी को जीवंत करती है जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

सत्र के दौरान खचाखच भरे हॉल में दर्शकों से बात करते हुए फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म के पीछे अपने दृष्टिकोण और प्रेरणा को साझा किया। निर्देशक कन्नन अय्यर ने फिल्म के लिए अपनी प्रेरणा और दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा, “यदि आपका दिल सही जगह पर है… तो यह चमत्कार ही होगा कि सब कुछ जादुई तरीके से कैसे बह निकलता है। मुख्य बात यह है कि पटकथा के मुताबिक कैसे अपनी भावना के साथ तालमेल बिठाया जाये। फिल्म की अनूठी विशेषता इसके मुख्य नायक, उषा मेहता में निहित है, जो स्वतंत्रता संग्राम की अक्सर अनदेखी की गई महिलाओं पर प्रकाश डालती है।

फिल्म में उषा मेहता की भूमिका निभाने वाली सारा अली खान ने अक्सर नजरअंदाज किए गए स्वतंत्रता सेनानियों और उनके बलिदान व वीरता की अनकही कहानियों पर प्रकाश डालने के लिए फिल्म की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, अपनी पसंदीदा चीज़ के लिए लड़ने के लिए आवश्यक मानसिक दृढ़ता पर प्रकाश डाला।

आईएफएफआई की ऊर्जा और उत्साह को साझा करते हुए, करण जौहर ने ‘ऐ वतन’ को सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक भावपूर्ण कथा के रूप में वर्णित किया, जो जुझारू उषा मेहता पर केंद्रित है। उन्होंने फिल्म में सच्ची कहानियों के चित्रण को रेखांकित किया, जिसमें अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली बाधाओं पर जोर दिया गया।

अपर्णा पुरोहित ने जनता को एकजुट करने में महिलाओं की शक्ति को रेखांकित करते हुए, इतिहास में खोए गुमनाम नायकों की कहानियों को बताने के महत्व पर जोर दिया। अपूर्व मेहता ने एक पीरियड फिल्म के लिए 1940 के साउथ बॉम्बे को फिर से बनाने, हर फ्रेम में प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के बारे में विचार साझा किये।

सत्र के समापन पर फिल्म निर्माताओं ने सामूहिक रूप से बताया कि ऐ वतन मेरे वतन सिर्फ एक व्यावसायिक फिल्म नहीं है, बल्कि एक भावपूर्ण रचनात्मक चित्रण है। उन्होंने देश से इस शक्तिशाली कथा को सुनने का आग्रह किया जो इतिहास के पन्नों में खोई हुई स्वतंत्रता सेनानियों की अनकही कहानियों को सामने लाती है।

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