Thursday, April 25, 2024
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आजादी के अमृत काल में युवाओं की भूमिका

भारतवर्ष वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक युवा आबादी (ऊर्जावान जनसंख्या) वाला राष्ट्र-राज्य (देश) है, जिसमे राष्ट्र-राज्य की 28.2 % यानी 40 करोड़ आबादी 15 – 29 (कार्यशील जनसंख्या) आयु वर्ग की है। राष्ट्र के इस ऊर्जावान युवा बल में राष्ट्र के उत्थान और प्रत्येक भारतीयों के जीवन स्तर को गुणात्मक बनाए रखने की क्षमता, धारिता और योग्यता है। युवाओं के सक्रिय भागीदारी और ऊर्जावान दक्षता से राष्ट्र की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक (राजनैतिक) समृद्धि को उत्प्रेरित करने की अनंत, अपार और असीम क्षमता है। भारत के ऊर्जावान प्रधानमंत्री/प्रधान सेवक (स्वयं दिया नामांकरण) श्रीमान नरेंद्र मोदी जी का कहना है, “समूचा  वैश्विक समुदाय भारत के युवाओं से उम्मीद/ आशा के निगाह से देख रहा है, क्योंकि युवा देश के  विकास प्रबोधक हैं और भारत संसार का विकास वाहक है। यह  समस्त युवा  वर्ग के सम्मान, जवाबदेही और जिम्मेदारी है।”

सवाल यह है  कि वैश्विक स्तर की वृहद जनसंख्या (140 करोड़) वाले राष्ट्र- राज्य में युवाओं के योगदान से वैश्विक स्तर पर विकासशील राष्ट्र-राज्य से विकसित राष्ट्र- राज्य हो सकता है? राष्ट्र निर्माण में युवाओं के योगदान को कैसे सार्थक बनाया जा सकता है?

21वीं शताब्दी एवं आजादी के अमृत काल में युवाओं की महत्वपूर्ण उपादेयता है, क्योंकि आजादी के अमृत काल में भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान और भूमिका निर्देशित कर रहा है और भारत वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक नेतृत्व देनेमें महत्वपूर्ण भूमिका का निष्पादन कर रहा है और वैश्विक स्तर के देश भारत की ओर आशावादी एवं सहयोगी भाव से देख रहे हैं। राष्ट्र के युवा विकास के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति है और राष्ट्र के सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि एवं तकनीकी नवाचार  के लिए प्रमुख प्रेरणा ऊर्जा है।

सरकार युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है कि युवा वैश्विक रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह सक्षम है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, सेवा क्षेत्र और आर्थिकी में युवा, शिक्षित, कुशल और लोक शक्ति को काम  पर रखने की प्रचुर  एवं वृहद क्षमता है और भारत इस मांग को पूरा करने के लिए कुशल जनशक्ति का एक बड़ा पुल विकसित कर रहा है।भारत एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र भी बनाया है जो स्टार्टअप का पोषण करता है और हमारे युवाओं में उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करता है।

भारत के उग्रवाद और आतंकवाद से त्रस्त क्षेत्र में युवाओं की शक्ति/ऊर्जा को रचनात्मक रूप से दिशा देने के लिए देश के अभिन्न भू- भागों में युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिता और राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में भारत के ऊर्जावान युवाओं के समग्र विकास की परिकल्पना की गई है। इसको प्राप्त करने के लिए प्रभावी रूप से आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए कौशल विकास, रचनात्मक कार्यक्रम और राष्ट्रोंपयोग कार्यक्रमों  पर जोर दिया गया है। माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के हुनर के उन्नत के लिए कार्पेंट्री, प्लंबिंग, बिजली के समान का मरम्मत, बागवानी, मिट्टी के बर्तन और कढ़ाई के कौशल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारत अपने युवाओं को समग्र शैक्षिक वृतांत प्रदान करने और विकास के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया हैं।

भारत के युवा  खेल प्रतिभाओं को पोषित करने, उन्हें सक्षम बनाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उभरते हुए व्यक्तित्व बनाना है। भारत के युवा ‘भारत का भविष्य’ होने के साथ-साथ’ भारत का वर्तमान’ है। युवा आत्मनिर्भर नवोन्मेष के इस युग में विचारों, प्रत्यय  और नवाचार के वाहक हैं। युवा मस्तिष्क शरीर( जिस पर आत्मा का नियंत्रण हो) और मन( वासनाओं पर नियंत्रण) स्वस्थ और संतुलित भारत का वाहक है। अमृत काल में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे स्वस्थ और संतुलित व्यक्तित्व के निर्माण से राष्ट्र-राज्य की समस्याओं का समाधान हो सकता है। अमृत काल में युवाओं को अपने दायित्व और कर्तव्य बोध से सावधान रहना चाहिए और भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर विकसित “भारत@ 2047 ” के लिए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।

भारत के द्वारा इस वर्ष जी-20 के सफल संचालन के साथ हमारे युवाओं के लिए अपने कौशल, प्रतिभा और कला  का प्रदर्शन करने और राष्ट्र को अधिक मजबूत बनाने के प्रति अपनी कर्तव्य निष्ठा और सबल  विश्वास प्रदर्शित करने का एक सफल अवसर प्रदान किया है।आध्यात्मिक राष्ट्रवाद के प्रणेता स्वामी विवेकानंद जी के सफल संदेश को “उठो, जागो और लक्ष्य तक चलते रहिए” के साकार करने के लिए आभार करना चाहिए। यही सफल और ऊर्जावान  युवा का  जीवन है। अमृत काल में राष्ट्र के उन्नयन के लिए युवाओं को अपने कर्तव्य के प्रति आभार और नैतिक उत्तरदायित्व को समझना होगा। ऐसा करके युवा अपने राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं, क्योंकि एक स्वस्थ काया  में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है।

नरेंद्र मोदी जी का युवाओं से आकर्षण जग जाहिर है। उनके नेतृत्व में सरकार युवाओं के प्रतिभा, ऊर्जा और शारीरिक क्षमता का सार्थक उपयोग कर रही है। वर्तमान  के युवा असंभव  के कहावत को संभव की कला से निपटा रहे हैं। भारतीय युवाओं की धारणा “आत्मसात कर सकते हैं” के  वाक्य को शुभ अवसर में बदलने के लिए प्रयासरत है। युवाओं के स्वप्न को साकार  के लिए समुचित प्रयास कर रहे हैं। युवाओं में रोजगार पाने की जगह रोजगार देने की दिलचस्पी बड़ी है। अमृत काल में ऐसा प्रोत्साहन सक्षम नेतृत्व के द्वारा प्राप्त हुआ है।  इससे परिवार, समाज और व्यवस्था की सोच में भी बदलाव आया है। मोदी जी और उनके सहयोगी संगठन युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। मोदी जी के विकसित भारत@ 2047 को  साकार करने में युवाओं का महत्वपूर्ण उपादान है।

 

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