Tuesday, April 23, 2024
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राम -राज्य की प्रासंगिकता

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी धर्म के प्रतीक थे। श्री राम जी का प्रत्येक कार्य उचित (राइटियसनेस) पर आधारित था। जिस व्यक्ति के भौतिक/ शरीर पर आत्मा (वासनविहीन स्थिति) का नियंत्रण होता है वह विवेकी होता है। इतिहास में, अनुश्रुतियों में, धार्मिक आयोजनों में और शासकीय संरचना में राम- राज्य की चर्चा होती है। श्री राम जी के ने” धर्मो रक्षति रक्षितः ” का अपने शासकीय संरचना में पालन किए हैं। राम- राज्य में नागरिकों के कल्याण( समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और जीवन का अधिकार) सर्वोपरि होता है। कोई भी राज्य/ व्यवस्था संविधान( मात्रात्मक भेद है, गुणात्मक स्तर पर तीनों एक ही है) अपने शासकीय कार्यों के लिए लोगों (संवैधानिक दृष्टि से सर्वाधिक उचित शब्द) के प्रति निःस्वार्थ भाव से उत्तरदाई और जवाबदेह हो वह व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ या सर्वाधिक लोकतांत्रिक मानी जाती है।

सवाल यह है कि राम- राज्य है क्या ? महात्मा गांधी जी के राजनीतिक दर्शन हो, दीनदयाल जी का राजनीतिक दर्शन हो, सभी विचारकों/ चिंतकों ने राज्य के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास (सुरक्षा, संरक्षा एवं औषधि तक पहुंच) के विचार को दिया है। राम-राज एक ऐसे आदर्श स्थिति की अवस्था है, जिसमें न्यायपूर्ण शासन, करुणा और लोक कल्याण के तत्व से परिपूर्ण हो। श्री राम जी के शासकीय व्यवस्था को राम-राज्य की उपमा दी जाती है, क्योंकि उनका शासकीय कार्यकाल निष्पक्ष (भय और अनुराग से तटस्थ), नैतिक मूल्यों के प्रति आभार और व्यक्तिगत इच्छाओं (लोभ और मोह की तुलना) में सार्वजनिक इच्छा (वास्तविक इच्छा + यथार्थ इच्छा, सबका भला और सामान्य इच्छा) का सम्मान करता है।

अयोध्या की शासकीय व्यवस्था राज तांत्रिक थी अर्थात राजा/ सम्राट अपने प्रत्येक राजकीय कार्य के लिए प्रजा के प्रति जवाबदेह होता था। तत्कालीन समय में श्री राम जी के राजकीय चरित्र में निःस्वार्थ, समर्पित शासन, प्रजावत्सल्य, और धार्मिकता का भाव था। व्यावहारिक आश्रम में कहें तो राम- राज का आशय सिद्धांत, राजनीतिक दर्शन, नैतिक मूल्य और आदर्श चरित्र का समावेश हो। श्री राम जी के राजतंत्र में इन शीलगुणों का सर्वाधिक प्रभाव था। राज्य सत्य (सच्चाई), अहिंसा (हिंसा का निषेध), सत्य निष्ठा, समानता, स्वतंत्रता, न्याय और करुणा (दया) पर आधारित था। श्री राम जी के जन्मस्थली जो धरती पर बैकुंठ, त्रेता की अवधपुरी, ऐतिहासिक स्थल के रूप में साकेत, कौशल और अयोध्या नगरी के नाम से प्रसिद्ध है, जो सरयू नदी के तट पर अवस्थित है। श्री राम जी एक आदर्श राजा थे और नीति परायणता को सर्वोच्च नियम मानते थे और प्रजा से भी नीति पारायण बनने की अपेक्षा करते थे।

राम-राज्य में गरीबी, पीड़ा अन्याय और भेदभाव नहीं था। राम-राज्य के कारण सर्व कल्याण की आशा की जाती थी। श्री राम जी स्वानुशासित, आज्ञाकारी, परोपकारी, गरिमामय, वचन के पक्के, विधि के पालक और सबको न्याय प्रदान करने वाले थे। राम-राज्य का केंद्रीय भाव है कि सबका कल्याण सबसे बड़ा धर्म है। विधि की दृष्टि में सभी समान है। राम-राज्य में राम शासक थे, लेकिन प्रजा को अपना पक्ष रखने की पूरी स्वतंत्रता थी। क्या वर्तमान सरकार के नीति-निर्माण और नीति-क्रियान्वयन में राम-राज्य के आदर्श और मूल्य हैं?

वर्तमान सरकार की “सबका साथ, सबका विश्वास और सबका कल्याण” राम-राज्य का आदर्श विचार है। यह आदर्श विचार सामूहिक समृद्धि, पारस्परिक विश्वास और नागरिक एकता के भाव को प्रतिध्वनि करता है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास पर उर्जित दृष्टिपात करता है। उज्ज्वला योजना की पहल न्याय पूर्ण और समावेशिता के विचार का उन्नयन कर रहा है। यह योजना प्रत्येक व्यक्ति के विकास का पुरजोर समर्थन करता है। स्वच्छ भारत अभियान राम-राज्य में स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के निष्पक्ष वितरण का संकेत करता है।

आयुष्मान भारत अभियान में सुरक्षा, संरक्षा और औषधि का अधिकार है। डिजिटल सशक्तिकरण के अंतर्गत श्री राम जी के दूरदर्शी शासन की उपादेयता, तकनीकी उन्नयन वाले समाज को संरक्षित करता है। कौशल विकास योजना, रोजगार सृजन और वित्तीय समावेशन उन तत्वों को स्मरण कराती है जो श्री राम जी के शासकीय संरचना में प्रत्येक साकेतवासी को सशक्त बनता है। नैतिक आचरण और नैतिक मूल्यों पर श्री राम जी के शासन के प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य कर रहा है, जो वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व की कार्यक्षमता, राजनीतिक निर्णय और विधि निर्माण में दिखाई दे रहा है।

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