Thursday, June 20, 2024
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हिंदी को समृध्द करने में गैरहिंदीभाषियों का योगदान

1. हिंदी भाषा के इतिहास पर पहले साहित्य की रचना फ्रांसीसी लेखक ग्रासिन द तैसी ने की थी ।
2. हिंदी पर पहला विस्तृत सर्वेक्षण भी किसी भारतीय ने नहीं, सर जॉर्ज अब्राहम ने की थी जो अँगरेज़ थे । #हिंदी #Hindi
3. हिंदी भाषा पर पहला शोध कार्य (द थिओलाज़ी ऑफ़ तुलसीदास) को विश्वविद्यालय में पहली बार किसी भारतीय ने नहीं, अँगरेज़़ विद्वान जे. आर. कार्पेंटर ने प्रस्तुत किया था ।
4.फिजी में ‘फिजिबात’, सूरीनाम में ‘सरनामी’, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान में ‘पारया’, दक्षिण अफ्रीका में ‘नेताली’ हिंदी की ही नई शैलियां हैं। यहां तक की कुछ शैलियों ने तो अपने व्याकरण और कोश बना लिए हैं।
5.हिंदी भाषी सूर, तुलसी, कबीर, मीरा को हमने जितने सम्मान और रूचि के साथ अपने जीवन में शामिल किया है उतनी ही श्रद्धा और सम्मान के साथ रसखान, रहीम, ज्ञानेश्वर, नामदेव, गुरु नानक, चैतन्य महाप्रभु, नरसी मेहता को भी सर आंखों पर बैठाया है। #हिंदी #Hindi

6.महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से लौट कर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के पूर्व देश का भ्रमण किया। वे गुजराती भाषी थे और अंग्रेजी के अच्छे जानकार थे, किन्तु भारत पहुंच कर उन्होंने हिंदी में ही अपनी बात रखना शुरू किया।
7.मराठी भाषी केशव वामा पेठे ने १८९३ ई. में ‘राष्ट्रभाषा किंवा सर्व हिन्दुस्थानची एक भाषा करणे’ नामक पुस्तक पुणे से प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने हिंदी को सर्वस्वीकृत राष्ट्रभाषा बनाने पर जोर दिया था।
8. देश को एकसूत्रता में बांधने का संकल्प स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने लिया। उन्होंने हिंदी की शक्ति को पहचान लिया था। अपने सब से प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश की रचना हिंदी में की। वे गुजराती भाषी थे।
9.रा.स्व.संघ के द्वितीय सरसंघचालक माननीय माधव सदाशिव गोलवलकर मराठी भाषी थे। विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण उच्चशिक्षा अंग्रेजी में प्राप्त की थी, किन्तु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के रूप में उन्होंने अभिव्यक्ति का माध्यम हिंदी को बनाया।
10.हिंदी पत्रकारिता में जिन गैर हिंदीभाषी पत्रकारों का महत्वपूर्ण योगदान हैं, उनमें बाबुराव विष्णु पराडकर का नाम बड़ी श्रद्धा के साथ लिया जाता है। पराडकर जी के सहयोग से वाराणसी से हिंदी का ‘आज’ दैनिक प्रकाशित हुआ।

11.मुंबई में भारतीय विद्या भवन के संस्थापक और कुलपति गुजराती भाषिक स्व. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का हिंदी प्रेम जगजाहिर हैं। वे एक विद्वान राजनेता थे। लगभग पैंसठ वर्ष पूर्व उनके मार्गदर्शन में मुंबई से ‘नवनीत’ का प्रकाशन शुरू हुआ। यह हिंदी की पहली ‘डाईजेस्ट’ हैं।
12.मराठी भाषिक विनोबा भावे ने वर्धा में हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना का बीजारोपण महात्मा गांधी के इच्छानुसार विद्यालय के रूप में किया था।
14.पंजाबी भाषी अंग्रेजी के विद्वान डॉ. नरेन्द्र कोहली ने हिंदी को अपनाया। अपने व्यंग्य लेखन के द्वारा उन्होंने हिंदी हास्य-व्यंग लेखन को तो समृद्ध किया। रामकथा पर आधारित उपन्यास ‘अभ्युदय’ (चार खण्डों में) और महाभारत पर आधारित आठ खण्डों में ‘महासमर’ की रचना हिंदी में की।
15.हिंदी प्रेमी वरिष्ठ पत्रकार मराठी भाषिक लक्ष्मण नारायण गर्दे ने हिंदी में ‘भारत मित्र’ समाचार के प्रकाशन में योगदान और ‘महाराष्ट्र रहस्य’ नाम से लेखमाला लिखी। लखनऊ से जब ‘नवजीवन’ का प्रकाशन शुरू किया गया तो गर्दे जी को उसका प्रथम सम्पादक बनाया गया।

16.हर वर्ष १० जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। वस्तुतः इसी तारीख को वर्ष १९७५ में मराठी भाषी पत्रकार अनंत गोपाल शेवडे के सत्प्रयास से नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मलेन आयोजित किया गया था।
17. बंगाल के केशवचन्द्र सेन, राजा राम मोहन राय, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस; पंजाब के बिपिनचन्द्र पाल, लाला लाजपत राय; गुजरात के स्वामी दयानन्द, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी; महाराष्ट के लोकमान्य तिलक तथा तमिल सुब्रह्मण्यम भारती, मोटूरि सत्यनारायण ने हिंदी बढ़ायी।1
18.सन् 1916 में कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में गाँधी जी ने हिन्दी में भाषण दिया तथा स्पष्ट घोषणा कीः ‘हिन्दी का प्रश्न मेरे लिए स्वराज्य के प्रश्न से कम महत्वपूर्ण नहीं है’।
19. गाँधी जी के सभापतित्व में ‘एक भाषा एक लिपि’ विषयक सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें सर्वसम्मति से संकल्प पारित हुआ कि ‘हिन्दी भाषा और देवनागरी का प्रचार प्रसार देश के हित एवं एकता की स्थापना हेतु करना चाहिए”।तमिल भाषी रामास्वामी अय्यर और रंगस्वामी अय्यर इस प्रस्ताव के समर्थक थे।
20. मराठी भाषिक काका कालेलकर जी का नाम आदर के साथ लिया जाता है. दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार के वे कर्णधार रहे और गुजरात में रहकर हिन्दी प्रचार के कार्य को आगे बढ़ाया. 1942 में वर्धा में जब राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना हुई तो काका साहब ने हिंदी का प्रचार देश में किया।

21.दिल्ली के अर्थ शास्र के प्राध्यापक और हिंदी के सुप्रसिद्ध व्यंग्य लेखक, अनेक हिंदी समाचार पत्रों के स्तंभ लेखक श्री आलोक पुराणिक जी मूल मराठी भाषिक है। हिंदी साहित्य में उनकी व्यंग्य रचनाओं ने महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।
22. हिन्दी साहित्य में सर्वाधिक चर्चा के केन्द्र में रहने वाले मराठी भाषी मुक्तिबोध कहानीकार भी थे और समीक्षक भी। उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
23. हिंदी में एमए पास करने वाले बांग्ला भाषी पहले व्यक्ति डॉ नलिनीमोहन सान्याल (1861 – 1951) थे, जिन्होंने 1921 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक किया था। 1939 में क्लासिक #Tamil भाषा पाठ तिरुक्कुरल का #Bengali में अनुवाद करने वाले पहले व्यक्ति भी थे।
मोटूरि सत्‍यनारायण (२ फ़रवरी १९०२ – ६ मार्च १९९५) दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचार आन्दोलन के संगठक, हिन्दी के प्रचार-प्रसार-विकास के युग-पुरुष। वे दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा तथा केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निर्माता भी हैं।
25. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,वर्धा,मधुकरराव चौधरी कहते है कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की प्रेरणा से स्थापित यह संस्था शुरू से ही राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के रचनात्मक कार्य करके और भारत के सभी हिंदीतर देशवासियों में राष्ट्रभाषा का सन्देश पहुँचाने में सफल हुई है |

26. समिति की माँग और प्रयासों से तथा विश्व हिन्दी सम्मेलनों के मंतव्य पर आधारित ‘महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविध्यालय’ संसद में प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार द्वारा वर्धा में स्थापित किया गया तथा मॉरिशस में ‘विश्व हिन्दी सचिवालय’ की स्थापना की गई |
27.राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा गांधीजी के सिद्धांतो के अनुरूप देशभर में फैले हजारो अवैतनिक, सेवाभावी तथा रचनात्मक कार्यों में रूचि रखने वाले प्रचारको के माध्यम से हिन्दी का प्रचार कर रही है | अब तक करीब एक करोड़ साठ लाख हिंदीतर भाषियों को हिन्दी में प्रवीणता दिलाई गई है |
28.हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के नागपुर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुसार महात्मा गांधीजी द्वारा ४ जुलाई, १९३६ को उनके निवास आश्रम सेवाग्राम में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की स्थापना की गई |
29.हिन्दीसेवी इयान वुल्फोर्ड अमेरिकी नागरिक हैं , वे ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में रहते हैं। ला ट्रोब यूनिवर्सिटी में वे हिंदी भाषा एवं साहित्य के लेक्चरर हैं। अमेरिका में रहकर उन्होंने हिंदी की उच्च स्तर की पढ़ाई की है, हिंदी भाषा एवं साहित्य में वे एमए एवं पीएचडी हैं।

30. हिंदी भाषा के संवर्धन में मॉरीशस की अनेक संस्थाओं की अहम भूमिका रही है। कुछ संस्थाओं के नाम इस प्रकार है – हिंदी संगठन, विश्व हिंदी सचिवालय, हिंदी प्रचारिणी सभा, महात्मा गाँधी संस्थान, आर्य सभा मॉरीशस, इंदिरा गाँधी सांस्कृतिक केंद्र, हिंदी लेखक संघ आदि।

साभार- https://twitter.com/vipranagarkar से

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