Wednesday, May 29, 2024
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12 घंटे में दिल्ली से मुंबई पहुँचाएगी ये गाड़ी

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और दिल्ली के बीच रेलवे ट्रैक भले ही पुराना पड़ गया है, लेकिन अक्टूबर में इस ट्रैक पर स्पेन की एक ट्रेन दौड़ सकती है। मोदी सरकार ने स्पेन की लोकोमोटिव मेकर ताल्गो को अपनी हल्की और तेज रफ्तार वाली ट्रेनों के ट्रायल रन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन ट्रेनों से पुरानी रेल पटरियों को बदले बिना यात्रा का समय 40% तक कम किया जा सकता है।

ताल्गो के सीईओ जोस ओरियोल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद ईटी को बताया कि उन्हें अक्टूबर या नवंबर की शुरुआत तक अपनी ट्रायल ट्रेन भारत लाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन कंपनी अपने खर्च और जोखिम पर भारत लाएगी और इसका मकसद यह दिखाने का होगा कि इसके इस्तेमाल से मुंबई और दिल्ली के बीच यात्रा का समय मौजूदा 17 घंटों से घटकर 12 घंटों पर आ सकता है। इसकी स्पीड 160 से 220 किलोमीटर के बीच होगी। ट्रेन को भारत लाने के लिए औपचारिक मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

ओरिओल के मुताबिक, 'इसे लेकर टेक्निकल हल निकाल लिया गया है और अब इसके प्रैक्टिल तौर पर करना है। अभी तक हमारे पास एक अनौपचारिक मंजूरी है। अब हमें आगे बढ़ने के लिए एक दस्तावेजी मंजूरी चाहिए। मुझे नहीं लगता कि इसमें ज्यादा समय लगेगा।' उन्होंने बताया कि कंपनी ट्रायल के लिए अपनी कॉस्ट पर ट्रेन और टेक्निशियंस को भारत लाएगी।

रेलवे का प्रबंधन और सरकार कंपनी की टेक्नोलॉजी को लेकर उत्साहित हैं। सरकारी अधिकारी अपने स्पेन की यात्राओं के दौरान ताल्गो की ट्रेनों को पटरियों पर दौड़ते देख चुके हैं। कंपनी रेलवे की ओर से दिए जाने वाले एक ट्रेन सेट कॉन्ट्रैक्ट के लिए भी अलग से बिडिंग कर रही है।

ओरियोल ने कहा, 'भारत में 60,000 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक में से कुछ को अपग्रेड किया जाएगा, लेकिन ज्यादातर हिस्सा पुराना ही रहेगा। इसी को लेकर हम एक अंतर पैदा कर सकते हैं। हम ट्रैक के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदले बिना ट्रेन की स्पीड बढ़ा सकते हैं।' ताल्गो की पैसेंजर ट्रेनें 160 से 220 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर दौड़ सकती हैं। इनका इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पुराने रेल ट्रैक्स पर किया जाता है। इनमें मक्का से मदीना की लाइन के साथ ही मध्य एशिया और रूस के कई रूट शामिल हैं।

भारतीय रेलवे की 125 अरब डॉलर के इनवेस्टमेंट की महत्वाकांक्षी योजना के मद्देनजर ताल्गो देश में एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है। सरकार ने हाल ही में रेलवे सेक्टर में 100 पर्सेंट एफडीआई का रास्ता खोला था। ओरियोल ने कहा, 'हम चीन, जापान और मलेशिया में भी मौके तलाश रहे हैं। भारत में मौजूदगी होने से हमें इन देशों में पहुंचने में मदद मिलेगी।'

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से

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