Friday, April 19, 2024
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कर्नाटक में दिखने लगा है कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण का दुष्परिणाम

देश में जब यूपीए की सरकार थी तो देश के विभिन्न हिस्सों में बार बार बम विस्फोट हो रहे थे। विस्फोट एक सामान्य घटना हो गई थी। लेकिन 2014 के बाद दिल्ली में नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद शायद ही कोई बम विस्फोट हुआ हो। लेकिन अब फिर से बेंगलुरु के एक कैफे में विस्फोट हुआ है। हालांकि भगवान की कृपा से इसमें बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

बेंगलुरु के प्राइम इलाके में स्थित कैफे में आईडी विस्फोट ने अनेक प्रश्नो को जन्म दिया है। विस्फोट के बारे में जानकारी मिलने के बाद तुरंत ही कुछ कांग्रेस समर्थक तथा अपने आप को सेकुलर- लिबरल होने के दावा करने वाले लोगों ने सोशल मीडिया हैंडल में इस खबर को लेकर भ्रांति फैलाने का प्रयास किया। वे बिना किसी जांच के इसे सिलिंडर ब्लास्ट बताने लगे। लेकिन बेंगलुरु से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने तत्काल उस कैफे के मालिक से बात कर सोशल मीडिया के जरिये स्पष्ट किया कि यह सिलिंडर ब्लास्ट नहीं है बल्कि आईडी ब्लास्ट है। उनके इस प्रयास के कारण ही स्थिति स्पष्ट हुई। अन्यथा कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया हैंडल तो इसे प्रकार से सिलिंडर ब्लास्ट प्रमाणित करने का प्रयास शुरु कर दिया था। यहां पर यह सवाल उठता है कि कांग्रेस समर्थक हैंडल बिना किसी जांच पडताल के इस आतंकी घटना को सामान्य दुर्घटना क्यों सिद्ध करना चाहते थे और वे किसे बचाने का प्रयास कर रहे थे?

जैसाकि ऊपर उल्लेख किया गया है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संभवतः नागरिक इलाकों में पहली विस्फोट की घटना है। अब सवाल उठता है कि कर्नाटक में ही क्यों यह घटना घटी है। कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन होने के बाद कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद इस तरह की विघटनकारी शक्तियों पर नरमी बरता जाना व उन्हें प्रोत्साहित किया जाना क्या इसके लिए जिम्मेदार है? कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में आने के बाद गत कुछ दिनों में राज्य में जो घटनाक्रम हुआ है उस पर नजर डालने पर एक साफ तस्वीर मिल सकेगी।

गत 27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के एक प्रत्याशी नासिर हुसेन को जीत मिली थी। उस दिन कर्नाटक के विधान सौध मे उनके समर्थकों द्वारा पाकिस्ताव जिंदाबाद का नारा दिया गया था। इस बारे में वीडियो सोशल मीडिया में वाइरल होने के बाद इस पर तीखी प्रतिक्रिय दिखी तथा विपक्षी भाजपा ने सिद्धारमैया सरकार को कठघरे में खडा़ किया। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र तथा राज्य सरकार के मंत्री प्रियक खड़गे ने इसका खंडन किया और कहा “जब भी भाजपा किसी प्रकार का चुनौती का सामना करती है उसे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे सुनने को मिलता है।” स्वाभविक है कि प्रियंक ने इस तरह का बयान बयान देकर इस गंभीर मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया था।

लेकिन अब जांच के बाद इसकी सच्चाई सामने आ चुकी है। वीडियो की एफएसएल जांच के बाद बेंगलुरु पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस प्रत्याशी हुसैन के जीत के बाद उनके समर्थकों ने पाकिस्तान का जिंदाबाद का नारा लगाया था।

अब यहां सवाल आता है कि कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय बचाने का प्रयास क्यों किया था। जाहिर सी बात है कि प्रियंक कांग्रेस के वोट बैंक के लिए कट्टरपंथियों व पाकिस्तान समर्थकों के तुष्टीकरण में लगे हुए थे।

अब कर्नाटक के एक और मंत्री वीके हरिप्रसाद द्वारा दिए गये एक बयान पर नजर डालते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के बारे में एक चकित करने वाला बयान दिया है। नासिर हुसैन के समर्थकों द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे दिये जाने के संदर्भ में उन्होंने का कि ‘पाकिस्तान भाजपा का शत्रु हो सकता है। लेकिन पाकिस्तान मारे लिये शत्रु नहीं है। हम पाकिस्तान को शत्रु नहीं मानते।

हरिप्रसाद का यह बयान पाकिस्तान के लिए कांग्रेस की मानसिकता को समझने के लिए पर्याप्त है। शायद कांग्रेस के इसी मानसिकता के कारण पाकिस्तान जब भी भारत पर हमला करता है या यदि कभी मुंबई जैसे स्थान पर आतंकवाद के जरिये निरपराध लोगों की हत्या करता है तब कांग्रेस की सरकार पाकिस्तान के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई हीं करती है। केवल इतना ही नहीं भारत में रहने वाले पाकिस्तान परस्त लोगों के खिलाफ कांग्रेस की सरकार कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान करती रहती है।

केवल इतना ही नहीं है। कुछ दिन पूर्व कर्नाटक सरकार ने एक सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें कांग्रेस सरकार ने पाकिस्तान व आईएसआई की भाषा बोलने वाली एक महिला को अतिथि लके रूप में बुलाया था। यह अलग बात है कि भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने उस महिला को हवाई अड्डे से ही वापस भेज दिया था।

कर्नाटक सरकार का तुष्टीकरण की नीति की सूची काफी लंबी है। हाल ही में राज्य सरकार ने पशुपालन विभाग की 5 सौ करोड रुपए की संपत्ति को वक्फ बोर्ड को देने का निर्णय लिया है। हिन्दू मंदिरों पर टैक्स लगाने का निर्णय किया है। ऐसे अनेकों उदाहरण मिलेंगे।

कर्नाटक सरकार के तुष्टीकरण की नीति का दुष्परिणाम अब दिखने लगा है। बेंगलुरु में हुए विस्फोट इसका उदाहरण है। कर्नाटक सरकार के तुष्टीकरण के कारण पाकिस्तानी समर्थक कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ रहा है। पाकिस्तानी समर्थक कट्टरपंथियों को लगता है कि राज्य सरकार उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी। यदि यही भावना उनमें आयेगी तो आगामी दिनों में तो सुरक्षा की दृष्टि से इसका खामियाजा केवल कर्नाटक को ही नहीं बल्कि पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।

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