Saturday, March 2, 2024
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Homeचुनावी चौपालइलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में सब कुछ जानिये

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में सब कुछ जानिये

प्रश्न 1 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है? इसकी कार्यप्रणाली किस तरह से मतदान की पारंपरिक प्रणाली से अलग है?

उत्तर – इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) मतों को दर्ज करने का एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन दो इकाइयों से बनी होती हैं – एक कंट्रोल यूनिट और एक बैलेटिंग यूनिट – जो पाँच-मीटर केबल से जुड़ी होती हैं। नियंत्रण इकाई पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास रखी जाती है और बैलेट यूनिट को मतदान कम्पार्टमेंट के अंदर रखा जाता है। मतपत्र जारी करने के बजाय, कंट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट पर मतपत्र बटन दबाकर एक मतपत्र जारी करेंगे। इससे मतदाता अपनी पसंद के अभ्यर्थी और प्रतीक के सामने बैलेट यूनिट पर नीले बटन को दबाकर अपना वोट डाल सकेगा।

प्रश्न 2 ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का निर्वाचनों में पहली बार कब इस्तेमाल किया गया था?

उत्तर – ईवीएम का पहली बार 1982 में केरल के 70-पारुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया था।

प्रश्न 3 जिन क्षेत्रों में बिजली नहीं है, वहां ईवीएम का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

उत्तर – ईवीएम के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती है। ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड/इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा जोड़ी गई एक साधारण बैटरी पर चलती है।

प्रश्न 4 ईवीएम में अधिकतम कितने वोट दर्ज किए जा सकते हैं?

उत्तर – भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रही ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) अधिकतम 2,000 मत दर्ज कर सकती है।

प्रश्न 5 अभ्‍यर्थियों की वह अधिकतम संख्‍या क्‍या है जिसके लिए ईवीएम काम कर सकती है?

उत्तर – एम2 ईवीएम (2006-10) के मामले में, ईवीएम से नोटा सहित अधिकतम 64 अभ्यर्थियों के निर्वाचन कराए जा सकते हैं। एक बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्यर्थियों के लिए प्रावधान होता है। यदि अभ्यर्थियों की कुल संख्या 16 से अधिक है, तो 4 बैलेटिंग यूनिटों को जोड़कर अधिक से अधिक 64 अभ्यर्थियों तक के लिए एक से अधिक बैलटिंग इकाईयां (16 अभ्‍यर्थी पर एक) जोड़ी जा सकती हैं। हालांकि, एम3 ईवीएम (2013 के बाद) के मामले में, ईवीएम से 24 बैलटिंग इकाइयों को जोड़कर नोटा सहित अधिकतम 384 अभ्‍यर्थियों के लिए निर्वाचन कराया जा सकता है।

प्रश्‍न 6 यदि किसी मतदान केंद्र विशेष में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) खराब हो जाती है तो क्या होगा?

उत्तर – यदि किसी मतदान केंद्र विशेष की ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) खराब हो जाती है, तो उसे नई ईवीएम के साथ बदल दिया जाता है। जब ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) खराब हुई हो तो उस समय (चरण) तक दर्ज किए गए मत कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में सुरक्षित पड़े रहते हैं और खराब ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को नए ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से बदलने के बाद मतदान प्रक्रिया को जारी रखना पूरी तरह से उपयुक्‍त होता है और मतदान को शुरूआत से शुरू करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मतगणना के दिन, दोनों नियंत्रण इकाइयों में दर्ज मतों को उस मतदान केंद्र का पूर्ण योग परिणाम प्राप्त करने हेतु गिना जाता है।

प्रश्न 7 ईवीएम को किसने डिजाइन किया है?

उत्तर – ईवीएम को दो सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बैंगलोर और इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद के सहयोग से निर्वाचन आयोग की तकनीकी विशेषज्ञ समिति (टीईसी) द्वारा तैयार और डिज़ाइन किया गया है। ईवीएम का विनिर्माण उपरोक्त दो उपक्रमों द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 8 वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) क्या है?

उत्तर – वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से जुड़ी एक स्वतंत्र प्रणाली है जो मतदाताओं को यह सत्यापित करने की अनुमति देती है कि उनका मत उनके इच्छा के अनुरूप पड़ा है। जब कोई मत डाला जाता है, तो अभ्यर्थी के नाम, क्रम संख्‍या और प्रतीक वाली एक पर्ची मुद्रित होती है और 7 सेकंड के लिए एक पारदर्शी खिड़की के माध्यम से दिखाई देती है। उसके बाद, यह मुद्रित पर्ची स्वचालित रूप से कट जाती है और वीवीपीएटी (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) के सीलबंद ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है।

प्रश्न 9 क्या वीवीपीएटी (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) बिजली से चलता है?

उत्तर – नहीं, वीवीपीएटी (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) पावर पैक बैटरी पर चलता है।

प्रश्न 10. भारत में पहली बार वीवीपीएटी का उपयोग कहाँ किया गया था?

उत्तर – वीवीपीएटी युक्‍त ईवीएम का पहली बार उपयोग नागालैंड के 51-नोकसेन (अ.ज.जा.) विधानसभा क्षेत्र के उप निर्वाचन में किया गया था।

प्रश्न 11ईवीएम और वीवीपीएटी की प्रथम स्तरीय जाँच कौन करता है?

उत्तर – विनिर्माताओं, नामत: भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के केवल अधिकृत इंजीनियर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि की मौजूदगी में जिला निर्वाचन अधिकारी के नियंत्रण में और उप जिला निर्वाचन अधिकारी की सीधी निगरानी में, ईवीएम और वीवीपीएटी की प्रथम स्तरीय जाँच (एफएलसी) करते हैं और इसकी वीडियोग्राफी की जाती है।

प्रश्न12 मशीनों की लागत क्या है? क्या ईवीएम का उपयोग करना बहुत महंगा नहीं है?

उत्तर – एम2 ईवीएम (2006-10 के बीच निर्मित) की लागत रु.8670/- प्रति ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) (बैलेटिंग यूनिट और कंट्रोल यूनिट) थी। एम3 ईवीएम की लागत अनंतिम रूप से लगभग रु.17,000 प्रति यूनिट नियत की गई है। यद्यपि शुरुआती निवेश कुछ अधिक प्रतीत होता है, किंतु इसकी प्रत्‍येक निर्वाचन के लिए लाखों की संख्‍या में मतपत्रों के मुद्रण, उनके परिवहन, भंडारण आदि से संबंधित बचत से और मतगणना स्‍टॉफ में और उन्‍हें प्रदत्‍त पारिश्रमिक में काफी कमी होने से कहीं अधिक मात्रा में भरपाई हो जाती है।

प्रश्न13 हमारे देश में जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा निरक्षर है। क्या इससे निरक्षर मतदाताओं को दिक्कत नहीं होगी?

उत्तर – ईवीएम के द्वारा मतदान करना पारंपरिक प्रणाली की तुलना में कहीं अधिक सरल है, जिसमें व्‍यक्ति को मतपत्र पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के प्रतीक पर या उसके निकट मतदान चिह्न लगाना होता है, उसे पहले लंबवत रूप से और फिर क्षैतिज रूप से मोड़ना होता है और तदुपरांत उसे मत पेटी में डालना होता है। ईवीएम में, मतदाता को अपनी पसंद के अभ्यर्थी और प्रतीक के सामने बैलट यूनिट पर सिर्फ नीला बटन दबाना होता है और मत दर्ज हो जाता है।

प्रश्न14 क्या संसद और राज्य विधानसभा के लिए एक साथ निर्वाचन कराने के लिए ईवीएम का उपयोग करना संभव है?

उत्तर – हाँ। हालांकि, समकालिक निर्वाचनों के दौरान ईवीएम के 2 अलग-अलग सेटों की आवश्यकता होती है, एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए और दूसरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए।

प्रश्न15 ईवीएम का उपयोग करने के क्या-क्‍या फायदे हैं?

उत्तर – ईवीएम का उपयोग करने के फायदे:

यह ‘अविधिमान्‍य मत’ डाले जाने की संभावना को पूरी तरह से समाप्त कर देता है, जिसे कागज मतपत्र व्यवस्था के दौरान, प्रत्येक निर्वाचन के दौरान बड़ी संख्या में देखा जाता था। वास्तव में, कई मामलों में, ‘अविधिमान्‍य मतों’ की संख्या जीत के अंतर से अधिक हो जाती थी, जिसके कारण ढेरों शिकायतें और मुकदमे होते थे। इस प्रकार, ईवीएम ने निर्वाचक की पसंद के अधिक प्रामाणिक और ठीक-ठीक प्रतिफल को संभव बनाया।
ईवीएम के उपयोग के साथ, प्रत्‍येक निर्वाचन के लिए लाखों की संख्‍या में मतपत्रों की छपाई से छुटकारा मिल सकता है, क्योंकि व्यक्तिश: प्रत्येक निर्वाचक के लिए एक मतपत्र के बजाय प्रत्येक मतदान केंद्र पर बैलेटिंग यूनिट पर चिपकाने के लिए केवल एक मत पत्र की आवश्यकता होती है। इसके परिणामस्‍वरूप कागज, छपाई, परिवहन, भंडारण और वितरण की लागत के हिसाब से भारी बचत होती है।
मतगणना की प्रक्रिया अत्‍यन्‍त तीव्र होती है और परिणाम पारंपरिक मत-पत्र प्रणाली के तहत औसतन 30-40 घंटों की तुलना में 3 से 5 घंटे के भीतर घोषित किया जा सकता है।
प्रश्न16 मतपेटियों के साथ मतपत्रों को मिलाने के बाद मतगणना की जाती है। क्या ईवीएम का इस्तेमाल होने पर इस प्रणाली को अपनाना संभव है?

उत्तर – हां, ‘टोटलाइज़र’ नामक एक उपकरण के उपयोग के माध्यम से, जो एक विशेष मतदान केंद्र पर इस्तेमाल किए गए एकल ईवीएम की अभ्यर्थीवार गिनती को प्रकट किए बिना एक बार में 14 नियंत्रण इकाईयों को समायोजित कर सकता है। हालाँकि, वर्तमान में टोटलाइजर का उपयोग नहीं किया जाता है क्योंकि इसके तकनीकी पहलुओं और अन्य संबंधित मुद्दों की जांच चल रही है और यह एक न्‍यायालयीन मुकदमें का विषय भी है।

प्रश्न17 कंट्रोल यूनिट अपनी मेमोरी में कितने समय तक रिजल्ट स्टोर करता है?

उत्तर – नियंत्रण इकाई (कंट्रोल यूनिट) अपनी मेमोरी में परिणाम को तब तक स्टोर कर सकता है जब तक कि डाटा को हटा या क्‍लीयर न कर दिया जाए।

प्रश्न18. जहां कही भी निर्वाचन याचिका दायर की जाती है, वहां निर्वाचन का परिणाम अंतिम परिणाम के अधीन होता है। अदालतें, उपयुक्त मामलों में, मतों की पुनर्गणना का आदेश दे सकती हैं। क्या ईवीएम को उतने लंबे समय तक स्‍टोर किया जा सकता है और क्या न्यायालयों द्वारा अधिकृत अधिकारियों की उपस्थिति में परिणाम लिया जा सकता है?

उत्तर – एक ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की मियाद 15 वर्ष और इससे भी अधिक होती है और कंट्रोल यूनिट में दर्ज मतों को उसकी मियाद के लिए तब तक स्‍टोर किया जा सकता है जब तक कि उसे क्लियर न कर दिया जाए। यदि अदालत पुनर्मतगणना का आदेश देती है, तो बैटरी को ठीक करके कंट्रोल यूनिट को फिर से क्रियाशील किया जा सकता है और यह इसकी मेमोरी में संग्रहित परिणाम प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न19 क्या बार-बार बटन दबाने से एक से अधिक बार मतदान संभव है?

उत्तर – नहीं। जैसे ही बैलेटिंग यूनिट पर एक विशेष बटन दबाया जाता है, उस विशेष अभ्यर्थी के लिए मत दर्ज हो जाता है और मशीन लॉक हो जाती है। यहां तक कि अगर कोई उस बटन को दोबारा या किसी अन्य बटन को दबाता है, तो भी आगे कोई मत दर्ज नहीं किया जाएगा। इस तरह, ईवीएम “एक व्‍यक्ति, एक मत” के सिद्धांत को सुनिश्चित करती है। अगला मत केवल तभी संभव हो पाता है जब कंट्रोल यूनिट के पीठासीन अधिकारी/प्रभारी मतदान अधिकारी मतपत्र बटन को दबाकर मतपत्र जारी करते हैं। यह मतपत्र प्रणाली की तुलना में एक विशिष्‍ट लाभ है।

प्रश्न 20 एक मतदाता यह कैसे सुनिश्चित कर सकता है कि ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिग मशीन) काम कर रही है और उसका मत अभिलिखित किया गया है?

उत्तर – जैसे ही मतदाता अपनी पसंद के अभ्यर्थी और प्रतीक के सामने `नीला बटन’ दबाता है, उस अभ्यर्थी विशेष के प्रतीक के सामने की बत्ती लाल रंग में चमक उठती है और एक लंबी बीप ध्‍वनि सुनाई देती है। इस प्रकार, मतदाता को यह आश्‍वस्‍त करने के लिए श्रव्‍य और दृश्‍य दोनों संकेत मिलते हैं कि उसका मत सही तरह से दर्ज हो गया है। इसके अलावा, वीवीपीएटी पेपर स्लिप के रूप में मतदाता को एक अतिरिक्त दृश्‍य सत्यापन उपलब्‍ध कराता है ताकि वह इस बात के प्रति सुनिश्चित हो सके कि उसका मत उसकी पसंद के अभ्यर्थी के लिए सही ढंग से दर्ज हो गया है।

प्रश्न21 क्या यह सच है कि कभी-कभी शॉर्ट-सर्किट या अन्य कारण से इस बात की संभावना होती है कि `नीले बटन’ को दबाने पर मतदाता को बिजली का झटका लग जाए?

उत्तर – नहीं। ईवीएम बैटरी पर काम करती है और `नीले बटन’ को दबाने या ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को हैंडल करने के समय किसी भी मतदाता को किसी भी समय बिजली का झटका लगने की कोई संभावना नहीं है।

प्रश्न22 क्या ईवीएम को इस तरह से क्रमादेशित करना संभव है कि शुरू में, मानिए कि 100 मत तक, मत उसी तरह से दर्ज हों जैसे कि `नीले बटन ‘दबाए जाते हैं, लेकिन उसके बाद, मत केवल एक अभ्यर्थी विशेष के पक्ष में दर्ज होंगे चाहे उस अभ्यर्थी या किसी अन्य अभ्यर्थी के सामने ‘नीला बटन’ दबाया गया हो या नहीं?

उत्तर – ईवीएम में इस्तेमाल किया जाने वाला माइक्रोचिप एक बार का क्रमादेशन-योग्‍य/मास्क्ड चिप होता है, जिसे न तो पढ़ा जा सकता है और न ही ओवरराइट किया जा सकता है। इसलिए, ईवीएम में उपयोग किए जाने वाले क्रमादेशन को एक विशेष तरीके से पुन: क्रमादेशित नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, ईवीएम पूर्णतया पृथक मशीनें होती हैं जिस तक न तो किसी भी नेटवर्क से दूरचालित रूप में पहुंचा जा सकता है और न ही किसी बाहरी उपकरण से जोड़ा जा सकता है और इन मशीनों में कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग नहीं किया जाता है। इसलिए, किसी भी विशेष उम्मीदवार या राजनीतिक पार्टी का चयन करने के लिए ईवीएम को एक विशेष तरीके से क्रमादेशित करने की बिल्‍कुल भी संभावना नहीं है।

प्रश्न23 क्या ईवीएम को मतदान केंद्रों तक ढोकर ले जाना मुश्किल नहीं होगा?

उत्तर – नहीं। इसके उलट, मतपेटियों की तुलना में ईवीएम को ढोकर ले जाना आसान है, क्योंकि ईवीएम अधिक हल्के, वहनीय होते हैं और ढुलाई/परिवहन की सहूलियत के लिए ग्राहकोनुकूलित पॉलीप्रोपीलिन केरिंईंग केस के साथ आते हैं।

प्रश्न24 देश के कई क्षेत्रों में, बिजली कनेक्शन नहीं है और यहां तक कि उन जगहों पर भी जहां बिजली कनेक्शन है, बिजली की आपूर्ति अनियमित है। इस परिदृश्य में क्या इससे बिना एयर कंडीशनिंग के मशीनों को स्टोर करने में समस्या उत्‍पन्‍न नहीं होगी?

उत्तर – उस कमरे/हॉल को वातानुकूलित करने की कोई आवश्यकता नहीं है जहां ईवीएम रखे जाते हैं। जरूरी केवल इतना है कि कमरे/हॉल को धूल, नमी और कृन्तकों से मुक्त रखा जाए जैसा कि मतपेटियों के मामले में किया जाता है।

प्रश्न 25 परंपरागत प्रणाली में, किसी भी विशेष समय-बिंदु में पड़े मतों की कुल संख्या को जानना संभव होगा। ईवीएम में ‘परिणाम’ भाग को सील कर दिया जाता है और उसे मतगणना के समय ही खोला जाएगा। मतदान की तारीख को कुल कितने वोट मिले, इसे कैसे जाना जा सकता है?

उत्तर – ‘परिणाम’ बटन के अलावा, ईवीएम के कंट्रोल यूनिट पर एक ‘टोटल’ बटन होता है। इस बटन को दबाने से अभ्यर्थीवार परिणाम सूचित किए बिना बटन दबाने के समय तक पड़े मतों की कुल संख्या प्रदर्शित हो जाएगी।

प्रश्न26 बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्यर्थियों के लिए प्रावधान होता है। एक निर्वाचन क्षेत्र में, केवल 10 अभ्यर्थी हैं। मतदाता 11 से 16 तक के किसी भी बटन को दबा सकता है। क्या ये मत निष्‍फल नहीं होंगे?

उत्तर – नहीं। यदि एक निर्वाचन-क्षेत्र में नोटा सहित केवल 10 अभ्यर्थी हैं, तो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) तैयार करने के समय क्रम. सं. 11 से 16 पर दिए गए ‘कैंडिडेट’ बटन को छिपा दिया जाएगा। इसलिए, किसी भी मतदाता द्वारा 11 से 16 के अभ्यर्थियों के लिए कोई अन्‍य बटन को दबाने का सवाल ही नहीं है।

प्रश्न27 मतपेटियों को उत्कीर्ण किया जाता है ताकि इन बॉक्सों को बदले जाने की शिकायत के किसी भी संभावना से बचा जा सके। क्या ईवीएम के संख्‍यांकन की कोई व्यवस्था है?

उत्तर – हाँ। प्रत्येक बैलेटिंग यूनिट और कंट्रोल यूनिट में एक विशिष्‍ट आईडी संख्‍या होती है, जिसे प्रत्येक यूनिट पर उकेरा जाता है। किसी विशेष मतदान केंद्र में प्रयुक्‍त की जाने वाली ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की आईडी संख्‍या वाली सूची तैयार की जाती है और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों/उनके एजेन्टों को उपलब्ध कराई जाती है।

प्रश्न28 पारंपरिक प्रणाली में, मतदान शुरू होने से पहले, पीठासीन अधिकारी उपस्थित मतदान एजेंटों को दिखाता है कि मतदान केंद्र में इस्तेमाल की जाने वाली मतपेटी खाली है। क्या मतदान एजेंटों को आश्‍वस्‍त करने के लिए ऐसा कोई प्रावधान है कि ईवीएम में पहले से दर्ज मत अव्‍यक्‍त रूप में नहीं हैं?

उत्तर – हाँ। मतदान शुरू होने से पहले, पीठासीन अधिकारी परिणाम बटन दबाकर उपस्थित मतदान एजेंटों को प्रदर्शित करता है कि मशीन में पहले से छिपे हुए मत नहीं हैं। इसके बाद, वह मतदान एजेंटों की उपस्थिति में कम से कम 50 मतों के साथ मतदान एजेंटों को इस बात से पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए मॉक पोल का संचालन करता है और सीयू में संग्रहीत इलेक्ट्रॉनिक परिणाम से मिलान करता है कि दर्शित परिणाम पूरी तरह उनके द्वारा दर्ज किए मतों के अनुसार है। तदुपरांत पीठासीन अधिकारी वास्तविक मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल के परिणाम को हटाने के लिए क्लियर बटन दबाएगा। वह ‘टोटल’ बटन दबाकर फिर मतदान एजेंटों को दिखाता है कि वह ‘शून्य’ दर्शित कर रहा है। फिर वह मतदान एजेंटों की उपस्थिति में वास्तविक मतदान शुरू करने से पहले कंट्रोल यूनिट को सीलबंद करता है। अब, हरेक पोलिंग बूथ पर 100% वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) के उपयोग के साथ, मॉक पोल के बाद, वीवीपीएटी पेपर स्लिप भी गिने जाते हैं।

प्रश्न29 मतदान समाप्‍त होने के बाद और मतगणना शुरू होने से पहले हितबद्ध पक्षकारों द्वारा किसी भी समय और अधिक मतों को दर्ज करने की संभावना को कैसे खारिज किया जा सकता है?

उत्तर – मतदान पूरा होने के बाद अर्थात जब आखिरी मतदाता मतदान कर ले, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी अधिकारी/ पीठासीन अधिकारी ‘क्लोज’ बटन दबाता है। तदुपरांत, ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) कोई भी वोट को स्वीकार नहीं करती है। मतदान समाप्त होने के बाद, कंट्रोल यूनिट को स्विच ऑफ कर दिया जाता है और उसके बाद बैलेटिंग यूनिट को कंट्रोल यूनिट से अलग कर दिया जाता है और संबंधित कैरिईंग केस में अलग से रखा जाता है और सीलबंद कर दिया जाता है। इसके अलावा, पीठासीन अधिकारी को प्रत्येक मतदान एजेंट को दर्ज किए गए मतों के लेखे की एक प्रति सौंपनी होती है। मतगणना के समय, एक विशेष कंट्रोल यूनिट में दर्ज कुल मतों का इस लेखे से मिलान किया जाता है और यदि कोई असंगति है, तो काउंटिंग एजेंटों द्वारा उसे इंगित किया जा सकता है।

प्रश्न30 यदि प्रिंटर द्वारा उत्‍पन्‍न पेपर पर्ची उस अभ्यर्थी से इतर अभ्‍यर्थी के नाम या प्रतीक को दर्शाती है जिसके लिए उसने मतदान किया है तो क्या उसके लिए शिकायत करने का कोई प्रावधान है?

उत्तर – हां, अगर कोई निर्वाचक अपना मत दर्ज करने के बाद यह आरोप लगाता है कि प्रिंटर द्वारा मुद्रित पेपर पर्ची में उस अभ्‍यर्थी से इतर अभ्‍यर्थी का नाम या प्रतीक दर्शाया गया है जिसके लिए उसने मतदान किया है तो निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 49डक के प्रावधानों के अनुसार पीठासीन अधिकारी निर्वाचक को झूठी घोषणा करने के परिणाम के बारे में चेतावनी देने के पश्चात आरोप के बारे में उनसे लिखित घोषणा प्राप्त करेगा।

यदि निर्वाचक नियम 49डक के उप-नियम (1) में निर्दिष्ट लिखित घोषणा देता है, तो पीठासीन अधिकारी निर्वाचक को अपनी उपस्थिति में और अभ्यर्थियों या मतदान अभिकर्ताओं, जो मतदान केंद्र में उपस्थित हो सकते हैं, की उपस्थिति में वोटिंग मशीन में एक परीक्षण मत रिकॉर्ड करने और प्रिंटर द्वारा उत्पन्न पेपर स्लिप का निरीक्षण करने की अनुमति देगा।

यदि आरोप सत्य पाया जाता है, तो पीठासीन अधिकारी रिटर्निंग ऑफिसर को तथ्यों की तुरंत रिपोर्टिंग करेगा, उस वोटिंग मशीन में वोटों की आगे रिकॉर्डिंग रोक देगा और रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार कार्य करेगा।

हालांकि, यदि आरोप गलत पाया गया है और उप-नियम (1) के तहत इस तरह उत्पन्न पेपर स्लिप का मिलान उप-नियम (2) के तहत निर्वाचक द्वारा दर्ज किए गए परीक्षण मत से हो जाता है, तो, पीठासीन अधिकारी –

उस निर्वाचक से संबंधित दूसरी प्रविष्टि के प्रति प्ररूप 17क में उस अभ्‍यर्थी की क्रम संख्या और नाम का उल्लेख करते हुए एक टिप्पणी करेगा, जिसके लिए इस तरह का परीक्षण मत दर्ज किया गया है;

ऐसी टिप्पणियों के सामने उस निर्वाचक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान प्राप्त करेगा; तथा प्ररूप 17ग के भाग I में मद 5 में इस तरह के परीक्षण मत के बारे में आवश्यक प्रविष्टियां करेगा। ”

प्रश्न31 निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों को आवंटित क्रम संख्याएं, अभ्यर्थियों के नाम और प्रतीकों को वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) इकाई में कौन लोड करता है?

उत्तर – उन्हें आवंटित क्रम संख्याएं अभ्यर्थियों के नाम, और प्रतीक विनिर्माता अर्थात ईसीआईएल/बीईएल के इंजीनियरों की मदद से वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) यूनिट में लोड किए जाते हैं।

प्रश्न32 क्या क्रम संख्याओं, वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) में लोड किए गए अभ्यर्थियों के नामों और प्रतीकों के परीक्षण प्रिंटआउट आवश्यक हैं?

उत्तर – हाँ। वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) में लोड की क्रम संख्‍याएं अभ्यर्थियों के नामों और प्रतीकों के परीक्षण प्रिंटआउट की जांच बैलट यूनिट पर रखे गए बैलेट पेपर के साथ की जानी अपेक्षित होती है। उसके बाद, प्रत्येक अभ्‍यर्थी को एक मत यह जांचने के लिए दिया जाएगा कि वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) सभी अभ्यर्थियों के संबंध में पेपर पर्चियों का सही ढंग से मुद्रण कर रहा है।

प्रश्न33 क्या वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) इकाई को हैंडल करने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र में अतिरिक्त मतदान कार्मिक की आवश्यकता होती है?

उत्तर – हाँ। प्रत्येक ऐसे मतदान केंद्र पर अतिरिक्त मतदान कार्मिक की आवश्यकता होती है, जहां ईवीएम के साथ एम2 वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) लगाए जाते हैं। इस मतदान कार्मिक का कर्तव्य पूरे मतदान प्रक्रिया के दौरान पीठासीन अधिकारी की मेज पर रखी हुई वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) स्टेटस डिस्प्ले यूनिट (वीएसडीयू) पर नजर रखना होगा।

हालांकि, एम3 वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) के मामले में वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) को हैंडल करने के लिए किसी अतिरिक्त मतदान कार्मिक की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न34 मतदान केंद्रों पर पेपर रोल बदलने की अनुमति है या नहीं?

उत्तर – मतदान केंद्रों पर पेपर रोल को बदलने की सख्त मनाही है।

प्रश्न35 क्या मतगणना के दिन वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की मुद्रित पेपर पर्चियों की गिनती की जानी अनिवार्य है?

उत्तर – वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की मुद्रित पेपर पर्चियों की गिनती केवल निम्नलिखित मामलों में की जाती है:

(क‍) राज्य विधान सभा के निर्वाचन के मामले में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र और (ख) लोक सभा के निर्वाचन के मामले में प्रत्येक विधानसभा खंड के यादृच्छिक रूप से चयनित 01 मतदान केंद्र की मुद्रित वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) पेपर पर्चियों का अनिवार्य सत्यापन कंट्रोल यूनिट से परिणाम का कोई प्रदर्शन न होने की स्थिति में, संबंधित वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की मुद्रित पेपर पर्चियों की गणना की जाती है।

यदि कोई भी अभ्‍यर्थी या उसकी अनुपस्थिति में, उसका निर्वाचन एजेंट या उसका कोई भी मतगणना एजेंट निर्वाचनों का संचालन नियम,1961 के नियम 56 घ के तहत किसी भी मतदान केंद्र या मतदान केंद्रों के संबंध में वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की मुद्रित पेपर पर्चियों की गिनती करने के लिए लिखित अनुरोध करता है, तो रिटर्निंग ऑफिसर विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता है और लिखित आदेश जारी करता है, कि उस विशेष मतदान केंद्र (केन्द्रों) की वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) के मुद्रित पेपर पर्चियों की गिनती की जानी है या नहीं।

प्रश्न36 परिणाम की घोषणा के बाद, क्या वीवीपीएटी (वोटर वेरिफॉयबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की मुद्रित पेपर पर्चियों (गिनी हुई या न गिनी हुई) को वीवीपीएटी प्रिंटर इकाई के ड्रॉप बॉक्स से बाहर निकाले जाने की जरूरत होती है?

उत्तर – नहीं। वीवीपीएटी को निर्वाचन याचिका की अवधि पूरी होने तक ईवीएम के साथ एक सुरक्षित स्ट्रांग रूम में संग्रहित किया जाता है।

प्रश्न37 मैं ईवीएम और वीवीपीएटी के बारे में और अधिक जानकारी कहां से प्राप्‍त कर/पढ़ सकता हूं?

उत्तर – और अधिक पढ़ने-जानने के लिए आप निम्नलिखित का संदर्भ ले सकते हैं:

ईवीएम मैनुअल https://eci.gov.in/files/file/9230-manual-on-electronic-voting-machine-and-vvpat/ पर उपलब्ध है

ईवीएम पर स्टेटस पेपर https://eci.gov.in/files/file/8756-status-paper-on-evm-edition-3/ पर उपलब्ध है।

प्रश्न38 क्या किसी विशेष मतदान केंद्र में ईवीएम की तैनाती के बारे में पहले से जानना संभव है?

उत्तर – नहीं, यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मतपत्र में, और इसलिए बैलट यूनिट में अभ्यर्थियों के नामों की व्यवस्था वर्णमाला के क्रम में, पहले राष्ट्रीय और राज्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए, उसके बाद अन्य राज्य पंजीकृत दलों के लिए और फिर निर्दलीयों के लिए होती है। इस प्रकार, अभ्यर्थी जिस क्रम में बैलेट यूनिट पर दिखाई देते हैं, वह अभ्यर्थियों के नामों और उनकी दलीय संबद्धता पर निर्भर होती है और उसका पहले से पता नहीं लगाया जा सकता है।

ईवीएम को आयोग द्वारा विकसित ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर के माध्यम से यादृच्छिकीकरण प्रक्रिया के दो चरणों के द्वारा मतदान केंद्र के लिए आवंटित किया जाता है। ईवीएम की प्रथम स्तरीय जाँच के बाद उन्हें विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रवार आवंटित करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर पर ईवीएम का पहला यादृच्छिकीकरण राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि की उपस्थिति में किया जाता है। उसके बाद, ईवीएम की कमीशनिंग से पहले, रिटर्निंग ऑफिसर स्तर अभ्यर्थियों/उनके एजेंटों की उपस्थिति में ईवीएम का दूसरा यादृच्छिकीकरण किया जाता है ताकि उन्‍हें मतदान केंद्रवार आवंटित किया जा सके।

प्रश्न39 क्या यह सत्य है कि न्यायालयों में ईवीएम के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं? इसका परिणाम क्या है?

उत्तर – हाँ। 2001 के बाद से, विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष ईवीएम (इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के साथ संभव रूप से गड़बड़ करने का मुद्दा उठाया गया है। उनमें से कुछ का उल्‍लेख नीचे किया गया है:

  • मद्रास उच्च न्यायालय-2001
  • केरल उच्च न्यायालय-2002
  • दिल्ली उच्च न्यायालय –2004
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय- 2004
  • बॉम्बे उच्च न्यायालय (नागपुर बेंच) –2004
  • उत्तराखंड उच्च न्यायालय – 2017
  • भारत का सर्वोच्च न्यायालय – 2017

    ईवीएम के इस्‍तेमाल से जुड़ी प्रौद्योगिकीय सुरक्षा और प्रशासनिक रक्षोपायों के विभिन्न पहलुओं के विस्तृत विश्लेषण के बाद, विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा ईवीएम की साख, विश्वसनीयता और त्रुटिमुक्‍तता को सभी मामलों में विधिमान्‍य ठहराया गया है। इनमें से कुछ मामलों में, माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के आदेशों जो ईवीएम के पक्ष में थे के खिलाफ कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया है, ।

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