Wednesday, May 29, 2024
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राजभाषा विभाग में बैठे अंग्रेजी के मानस पुत्रों, हम अंग्रेजी न जानने वालों पर कुछ तो कृपा कीजिए

महोदय,
भारत सरकार के सभी मंत्रालय सामाजिक माध्यमों (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टा) का प्रयोग कर रहे हैं, आम जनता की शिकायतों पर तुरंत जवाब देते हैं पर आपका राजभाषा विभाग ऑनलाइन युग में सबसे पीछे है इसलिए सामाजिक माध्यमों (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टा) पर आने से कतरा रहा है। आपका विभाग ट्विटर, फेसबुक, इंस्टा पर आने में संकोच क्यों कर रहा है या फिर अन्य विभाग आपको आने से रोक रहे हैं?

तालाबंदी में भी राजभाषा विभाग ने ऑनलाइन संसाधनों से दूरी बना रखी है जो चिंताजनक है।

आपके विभाग को समस्या ईमेल पर भेजने पर कभी भी कोई भी उत्तर नहीं दिया जाता है, तालाबंदी और कोरोना महामारी के संबंध में मैंने गत् ढाई महीनों में कई शिकायतें व अनुस्मारक भेजे पर आज तक आपके विभाग ने न तो उत्तर दिया है और न ही किसी समस्या पर कोई कार्रवाई की है। जब आप ही कार्यवाही करने में सक्षम नहीं है तो हम लोग किसके पास जाएँ? लगता है आपके पास ईमेल पर प्राप्त शिकायतों पर कार्यवाही करने व उनका रिकार्ड रखने की कोई व्यवस्था नहीं है तालाबंदी के कारण में लिखित शिकायत डाक से भेज नहीं पा रहा हूँ।

दुनिया ऑनलाइन बैठकें कर रही है, हमारी मध्यप्रदेश सरकार तो व्हाट्सएप पर हर प्रश्न का उत्तर हिन्दी में दे रही है और आप लोग ईमेल पर शिकायतें भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं, सचमुच आपका राजभाषा विभाग नये युग में अप्रासंगिक न हो जाए, उससे पहले कुछ बदलाव कर लीजिए। प्रधानमंत्री जी ने तो मई 2014 में ही सभी सरकारी कार्यालयों को तकनीक और सामाजिक माध्यमों के तेज, सघन व जनोन्मुखी प्रयोग के लिए सार्वजनिक घोषणा की थी, क्या ये सब आप पर लागू नहीं है ?

कोरोना संकट के समय स्वास्थ्य मंत्रालय, आयुष मंत्रालय व गृह मंत्रालय 100 प्रतिशत काम अंग्रेजी में कर रहे हैं और मैंने इसके कारण हम गाँव वालों को हो रही परेशानी के ईमेल संबंधित मंत्रालयों व इस लोक शिकायत पोर्टल पर भेजे हैं जिन पर गत् ढाई महीनों में आपने कोई कार्यवाही करना तो दूर उन शिकायतों के उत्तर भी नहीं दिए हैं।

संकट काल में स्वास्थ्य मंत्रालय, आयुष मंत्रालय व गृह मंत्रालय 100 प्रतिशत काम अंग्रेजी में करने से आम जनता त्रस्त है, लोगों में अफवाहें फैल रही हैं, लोग परेशान हैं, बड़े शहरों से करोड़ों प्रवासी मजदूर भाग रहे हैं, दुर्घटनाओं में मर रहे हैं क्योंकि उन्हें भारत सरकार की ओर से कोई भी आधिकारिक सूचना राजभाषा हिन्दी अथवा स्थानीय भाषाओं में नहीं दी जा रही है। मैंने शिकायतें की तो उन्हें बिना समाधान अंग्रेजी में उत्तर लिखकर बार-2 बंद किया जा रहा है।

क्या आपका विभाग अपने सांविधिक कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए इस आपात्काल में आम जनता के लिए कोई राहत नहीं दे सकता है, क्या हम सब केवल अंग्रेजी की लाठी खाकर मरने के लिए अभिशप्त हैं, यदि ऐसा है तो बहुत ही निराशाजनक है। इस देश के 97 प्रतिशत अंग्रेजी न जानने वाले नागरिकों की कोई सुनवाई नहीं होती है क्यों?

आपके द्वारा उत्तर की आशा कर सकता हूँ या ईमेल भी आप कूड़ेदान में फेंक देंगे?

निवेदक
अभिषेक कुमार,
ग्राम- सुल्तानगंज, तहसील-बेगमगंज
जिला-रायसेन 464570 (मध्यप्रदेश)

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एक निवेदन

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