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‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में नवरसों का स्वादः डॉ. सुभाष चंद्रा

दिल्ली में चौथे साहित्यकार सम्मेलन ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ को संबोधित करते हुए एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि हमें साहित्य के जरिए नौ रसों का स्वाद लेने का मौका मिलता है। ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ हिंदू-उर्दू और पंजाबी साहित्य का सम्मेलन है। इस सम्मेलन के जरिए भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाता है।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डॉ. सुभाष चंद्रा ने लेखन के इतिहास और साहित्य के नव रसों की चर्चा करते हुए कहा, ‘मैं साहित्य की दुनिया का नहीं हूं लेकिन इतने सालों में लोगों से मिलने पर बहुत सारी बातें समझ आईं, जिस दौर से हम गुजर रहे हैं उस दौर में हम साहित्य के नव रसों को महसूस कर रहे हैं। विज्ञान ने भी मान लिया है कि दिमाग की क्षमता का हम दस फीसदी भी इस्तेमाल नहीं करते। ज्ञान ज्यादा होगा तो नज़रिया भी अलग होगा। हिन्दुस्तान में आज भी अखबार की बिक्री कम नहीं हुई है। गालिब के वक्त में कैसे सोचते थे, तो साहित्य से समझ में आता है किसी भी विषय को जानने में साहित्य मददगार होता है। बैठक करेंगे और वो तरीका निकालेगे कि कैसे इस कार्यक्रम को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल से भी बड़ा बनाएं। हमारी कोशिश ‘महफिल-ए-गंगो-जमन’ में छह अवॉर्ड और जोड़ने की होगी।’

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