Home Blog Page 1943

पाकिस्तान जाकर कैसी भाषा बोलते हैं नसीरुद्दीन शाह

पाकिस्तान के तमाम अखबारों और न्यूज पोर्टल्स में बॉलिवुड ऐक्टर नसीरुद्दीन का वह इंटरव्यू छाया हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान की इमेज दुश्मन देश के रूप में बनाने के लिए भारत में ब्रेन वॉशिंग हो रही है। नसीरुद्दीन के हवाले से यह भी लिखा गया है कि भारत में तो अक्सर पाक कलाकारो का विरोध होता है, मगर पाकिस्तान हमारा बाहें खोलकर स्वागत करता है।
 
पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार 'ट्रिब्यून' ने लिखा है, 'पाकिस्तान के सफल दौरे के बाद भारत लौटे दिग्गज बॉलिवुड ऐक्टर नसीरुद्दीन शाह ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि उनके देश में पाकिस्तान के प्रति नफरत बढ़ रही है।' पाक के अन्य बड़े अखबारों और टीवी चैनलों की वेबसाइट्स पर भी ऐसा ही जिक्र किया गया है। दरअसल नसीरुद्दीन ने ये बातें एंटरटेनमेंट वेबसाइट 'बॉलिवुड हंगामा' को दिए इंटरव्यू के दौरान कही थीं।
 
नसीरुद्दीन शाह फरवरी में अपनी किताब 'ऐंड देन वन डे: अ मेम्वार' के प्रमोशन के लिए पाकिस्तान में थे। इस दौरान उन्होंने लाहौर लिटररी फेस्टिवल में शिरकत की थी। उन्होंने कराची आर्ट काउंसिल में एक थिएटर वर्कशॉप का भी आयोजन किया था। वहां से लौटने के बाद दिए इंटरव्यू में शाह ने कहा है, 'यह दुखद है कि अक्सर पाकिस्तान के कलाकारों को देश में परफॉर्म करने से रोका जाता है। हाल ही में बड़ी बुरी घटना घटी, जब अहमदाबाद में पाकिस्तानी आर्टिस्ट की कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाया गया। मगर पाकिस्तान में तो हमारा बांहें फैलाकर स्वागत किया जाता है।'
 
ऐसे ही एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा, 'मैं पाकिस्तान जाता रहता हूं। मुझे लगता है कि लोगों में संपर्क बना रहना चाहिए, क्योंकि राजनेता तो जरूरत पड़ने पर रंग बदल लेंगे। भारतीयों की ब्रेन वॉशिंग हो रही है कि पाकिस्तान एक दुश्मन देश है। उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या रही है।'
 
शाह ने राजनीतिक गतिरोध को खत्म करते हुए रिश्ते जोड़ने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, 'रिश्ते जुड़ने चाहिए। इस बात का मेरे मुस्लिम होने से कोई नाता नहीं है। पाकिस्तान के खिलाफ नफरत से हमें मिलता क्या है? यह तो एक तरह से दादागीरी करने जैसा है। आखिर वे हमारे पड़ोसी ही तो हैं।'
 
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'जब मैं पाकिस्तान जाता हूं, तो सुनता हूं कि वहां से 25 फीसदी लोग भारत विस्थापित हुए हैं, जबकि यहां से सिर्फ 1 फीसदी वहां गए हैं। मुझे पता चला कि 1947 से पहले कराची में 95 फीसदी लोग सिंधी बोलते थे, लेकिन 1948 में सिर्फ 2 फीसदी लोग सिंधी बोलने वाले बचे। यह जानकर बहुत अफसोस हुआ।'
 
पाकिस्तान में भारतीयों के लिए प्यार का जिक्र करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'दोनों देशों के बीच जो दूरी है, वह राजनीतिक है। यह खत्म होनी चाहिए। यह दूरी तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक हम वहां के लोगों से बात नहीं करेंगे। भारत ने जो कुछ हासिल किया है, उसके प्रति पाकिस्तान में बड़ी जिज्ञासा और इज्जत है।'
 
नसीरुद्दीन ने इंटरव्यू में कहा है, 'पाकिस्तान में वे मुझे बहुत प्यार करते हैं। वे सलमान और शाहरुख खान जैसे स्टार्स के दीवाने हैं, मगर मेरे, ओम पुरी और फारूख शेख जैसे ऐक्टर्स को भी वे प्यार करते हैं। मुझे पाकिस्तान में बहुत स्पेशल महसूस होता है। मुझे अपनी किताब को लेकर पाकिस्तान में जैसे शानदार रेस्पॉन्स की उम्मीद थी, वैसी उम्मीद मुझे अपने यहां भारत में नहीं थी।'
 
 
साभार- एक्सप्रेस ट्रिब्यून से 

.

भाषाई सद्भावना के लिए काम रही मीडिया विमर्शः बृजमोहन

गुजराती पत्रकारिता विशेषांक का विमोचन

रायपुर। भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ प्रदेश के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अपने निवास पर जनसंचार के सरोकारों पर केन्द्रित पत्रिका “मीडिया विमर्श” के गुजराती पत्रकारिता विशेषांक का विमोचन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर, पत्रिका के प्रबंध सम्पादक प्रभात मिश्र, संपादक मंडल की सदस्य डॉ सुभद्रा राठौर,वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी सहित युवा पत्रकार हेमंत पाणिग्राही, बिकास कुमार शर्मा, मनीष शर्मा एवं रोहित साहू उपस्थित थे।

   इस अवसर पर बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित जनों को नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि मीडिया विमर्श पत्रिका लगातार मीडिया के विभिन्न विषयों पर सामग्री उपलब्ध करा रही है जो मीडिया से जुड़े लोगों एवं मीडिया छात्रों के लिए बहुत उपयोगी है। भारत में हिंदी भाषा के साथ साथ समस्त क्षेत्रीय भाषाओँ एवं स्थानीय बोलियों का अपना अलग महत्त्व है,हमें सभी भाषाओं समृद्ध करने की दिशा में कार्य करना चाहिये।मीडिया विमर्श का प्रयास इस दिशा में सराहनीय है। उन्होंने कहा कि उर्दू पत्रकारिता के बाद पत्रिका ने गुजराती पत्रकारिता का विशेषांक प्रकाशित है। इससे देश में भाषाई सद् भाव पैदा होगा और भारतीय भाषाओं में अंतरसंवाद भी होगा। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय भाषाएं मातृभाषाएं भी हैं इसलिए इनके लिए आपसी संवाद के क्षेत्र तलाशे जाने चाहिए।

    पत्रिका के प्रबंध सम्पादक प्रभात मिश्र ने इस विशेषांक के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी पत्राकारिता के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय भाषायी पत्रकारिता पर भी मीडिया विमर्श सामग्री उपलब्ध करा रही है। पत्रिका अपने प्रकाशन का एक दशक जल्द ही पूरा करने जा रही है। पत्रकार श्री रमेश नैयर ने कहा कि पत्रिका सही मायने में मीडियाकर्मियों के आत्मचिंतन और आत्ममंथन का मंच बन गयी है, इसका हर अंक संग्रहणीय और पठनीय है,साथ ही विमर्श के नए द्वार खोलता है।

क्या है गुजराती पत्रकारिता अंक मेः
    मीडिया विमर्श के गुजराती पत्रकारिता पर आए विशेषांक में समूची गुजराती पत्रकारिता पर पठनीय और संग्रहणीय सामग्री है। गुजराती पत्रकारिता के दिग्गज पत्रकारों के अलावा अन्य मीडिया विशेषज्ञों ने गुजराती पत्रकारिता पर अपनी कलम चलाई है। गुजराती पत्र-पत्रिकाओं, अखबारों, टेलीविजन चैनल्स, वेब मीडिया के साथ ही गुजराती फिल्मों के संबंध में भी मीडिया विमर्श का यह अंक महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है। इसमें शशिकांत वसानी, पिंकी दलाल, भगवती कुमार शर्मा, मनीष मेहता, किरीट गणात्रा, कौशिक मेहता, काना बाटवा, डा.महेश परिमल और आशीष जोशी के साक्षात्कार प्रकाशित किए गए हैं। खण्ड ‘नया दौर, नई चुनौतियां’ के अंतर्गत शैलेष रावल, पिंकी दलाल, कुलवंत हैप्पी, जयेश चितलिया, अर्चना गुसाणी, तुषार त्रिवेदी, विक्रम वकील, जयेश ठकरार और डॉ. यासीन दलाल के लेख प्रकाशित हैं। स्वर्णिम अध्याय खण्ड में कमल शर्मा, कौशिक मेहता, डॉ. किषोर दवे और बादल पंड्या के लेख शामिल हैं। अजय नायक, हिमांशु किकाणी और कल्याणी देशमुख ने गुजरात की वेब पत्रकारिता को रेखांकित किया है।
 
संपर्क
– संजय द्विवेदी, 
अध्यक्षः जनसंचार विभाग,
 माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, 
प्रेस काम्पलेक्स, एमपी नगर, भोपाल-462011 (मप्र)
मोबाइलः 09893598888
http://sanjayubach.blogspot.com/
http://sanjaydwivedi.com/

.

कश्मीरी पंडितों का अपमान करने के बाद उनके नाम फिल्म समर्पित कर दी

"हैदर" के लिए पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करने वाले निर्माता-निर्देशक विशाल भारद्वाज ने इन्हें कश्मीरी पंडितों को समर्पित करने की घोषणा की है। हालांकि, उनकी इस घोषणा पर विवाद हो गया है। वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर और फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य अशोक पंडित ने विशाल की मंशा पर सवाल उठाया है।

अनुपम खेर ने इसे कश्मीरी पंडितों के साथ धोखाधड़ी करार दिया है। उन्होंने कहा कि विशाल को राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के लिए मैं बधाई देता हूं, लेकिन उन पुरस्कारों को कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को समर्पित करना धोखाधड़ी है। उन्होंने पूछा कि कश्मीरी पंडितों के पलायन पर विशाल ने कब सवाल उठाया था? दरअसल, हमारे मंदिर में शैतानी नृत्य कर वे हमें अपमानित कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि "हैदर" विलियम शेक्सपीयर के नाटक "हैमलेट" का फिल्मी रूपांतरण है। इसे कश्मीरी आतंकवाद की पृष्ठभूमि में फिल्माया गया है। निर्माता-निर्देशक विशाल भारद्वाज पर फिल्म में इस समस्या का एक ही पक्ष दिखाने का आरोप है। इसको लेकर विशाल का कहना है कि कश्मीरी पंडितों की समस्या बहुत बड़ी है। इसे कुछ दृश्यों में नहीं समेटा जा सकता। इस मसले पर एक पूरी की पूरी फिल्म ही बनाई जानी चाहिए। इसलिए मैंने अपने सभी राष्ट्रीय पुरस्कार कश्मीरी पंडितों को समर्पित करने का फैसला किया है।

.

श्री मदन मोहन जोशी एवं श्री श्यामलाल यादव को गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान

भोपाल।  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2012-2013 दिये जाने वाले प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की घोषणा कर दी गई है.  वर्ष 2012 के लिए यह सम्मान देश के जाने-माने पत्रकार श्री मदन मोहन जोशी को एवं  वर्ष 2013 के लिए यह पुरस्कार प्रख्यात पत्रकार श्री श्यामलाल यादव को प्रदान किया जायेगा। सम्मान समारोह का आयोजन 7 अप्रैल 2015 को भोपाल में किया जाएगा।

        भारतीय भाषायी पत्रकारिता के माध्यम से मूल्यों की स्थापना और संवर्धन] सत्यान्वेषण] जनपक्षधरता] गहरे सामाजिक सरोकार] स्वातंत्र्य चेतना के प्रसार और अप्रतिम सृजनात्मक योगदान के लिये माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की स्थापना की है। यह सम्मान किसी एक कृति] रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिये देय है। विगत वर्षों में इस सम्मान से श्री आलोक मेहता] श्री राजेंद्र शर्मा, डा. नंदकिशोर त्रिखा, श्री रामबहादुर राय एवं श्री रमेश नैयर को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान के अंतर्गत राशि रूपए दो लाख एक नकद तथा प्रशस्ति-पट्टिका प्रदान की जाती है.

        वर्ष 2012 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री मदनमोहन जोशी नवभारत, क्रोनिकल तथा नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठत समाचारपत्रों से जुड़े रहे हैं। नईदुनिया में एक संवाददाता के रूप से कार्य प्रारम्भ कर वे उसी संस्थान में सम्पादक रहे हैं। उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी के दो साप्ताहिक स्तम्भों के 20 वर्षों तक लेखन का कीर्तिमान बनाया। देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके 5000 से अधिक आलेख, रिर्पोताज प्रकाशित हुए। उन्होंने एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं। पुस्तकों के अतिरिक्त उनके निबन्ध संग्रह एवं कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए। वे भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र के संस्थापक भी रहे हैं। उन्हें अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से विभूषित किया जा चुका है।

        वर्ष 2013 के लिए सम्मानित श्री श्यामलाल यादव हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में पत्रकारिता करते हुए सतत लेखन कर रहे हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से 1992&93 में पत्रकारिता की पढ़ाई पूर्ण की। वे जनसत्ता, अमर उजाला, इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस जैसे समाचारपत्रों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं। उन्हें रूरल रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित ^^स्टेट्समेन*^ अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। खोजी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें ‘रामनाथ गोयनका, अवॉर्ड मिला है। पी.सी.आर.एफ. एवं एन.डी.टी.वी. द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय आर.टी.आई. पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2010 में उन्हें ^लारेन्जो नेताली* अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।
       

(डॉ. पवित्र श्रीवास्तव)
निदेशक, जनसंपर्क प्रकोष्ठ

.

नेटवर्क18 के संचालक मंडल में शामिल हुई निरुपमा राव

नेटवर्क18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड, सीएनबीसी टीवी 18 के ब्रॉडकास्टर, सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन7, ईटीवी और कलर्स ने देश की सेवानिवृत्त राजनयिक निरुपमा राव को अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया है। राव की नियुक्ति पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मुहर से बुधवार दोपहर स्टॉक एक्सचेंज को अवगत कराया गया।

निरुपमा राव भारत की विदेश सचिव रह चुकी हैं और कोलंबो, बीजिंग व वॉशिंगटन में भारतीय मिशन की अगुवाई कर चुकी हैं। वह विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव, प्रवक्ता भी रही हैं।

नेटवर्क18 के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई ने कहा कि निरुपमा बाहरी दुनिया और मीडिया की एक अंतदृष्टि लेकर आती हैं। वह डिजिटल दुनिया में एक पथप्रदर्शक हैं और हम अपनी उभरती रणनीतियों में उनके योगदान को लेकर वाकई उत्सुक हैं।

.

स्वच्छता अभियान में धर्मगुरू भी आगे आए

साँची।. विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधियों ने ऐलान किया है कि समाज की समृद्धि के लिए सामूहिक रूप से स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत है। यह ऐलान 24 मार्च 2015 को साँची में आयोजित म.प्र. में स्वच्छता पर केन्द्रित अन्तःपान्थिक संवाद में विभिन्न धर्म के प्रतिनिधियों ने किया। साँची घोषणा के नाम से जारी एक बयान में स्वच्छता की जरूरत पर जोर देते हुए नैतिक शिक्षा को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सुधार कर इसे अनिवार्य बनाने की अपील की गई है।

यूनिसेफ और स्पंदन संस्था की ओर से आयोजित इस संवाद में जारी इस घोषणा पत्र पर जिन प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए है उनमे प्रो. सामदोंग रिम्पोचे, स्वामी हनुतश्री, सै.मुशताक़ अली नदवी, ज्ञानी दिलीप सिंह, फादर साजी, स्वामी बलबीर दास, आचार्य रजनीश पवार, शेखर बाबा, ड़ा कयानात काजी के नाम शामिल है। खासकर बच्चों और महिलाओं के कल्याण के मद्देनजर जारी इस घोषणा पत्र मे कहा गया है कि अज्ञान के कारण कई तरह की गंदगी विकसित होती है अगर इनको कारगर तरीके से दूर किया जाए तो हम समाज को स्वर्ग बना सकते है । इसके साथ ही खुले में शौच की प्रवृत्ति को खत्म करने की अपील की गई है। भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि जब तक मनुष्य की सोच नही बदलेगी तब तक स्वच्छता को लागू नहीँ किया जा सकता. उन्होँने कहा कि इस्लाम मेँ स्वच्छता को बहुत महत्व दिया गया है.

सभी धर्म गुरुओं के वक्तव्यों पर अपनी टिप्पणी देते हुए बौद्ध गुरु और सांची विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. रिम्पोचे ने कहा कि सभी धर्म आध्यत्मिक शिक्षा के साथ व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर सफाई पर भी जोर देते रहे है। उन्होने तेजी से बदलती जीवन शैली को मौजूदा समस्याओं की वजह बताते हुए कहा कि आज पानी मिट्टी हवा और परिवेश अशुद्ध हो गए है। म.प्र.यूनिसेफ प्रमुख ट्रेवर क्लार्क ने कहा कि यूनिसेफ बच्चों के प्रति अत्यत संवेदनशील है स्वच्छता का सवाल बच्चो की मौत से जुड़ा हुआ है। इसमे लापरवाही बच्चो की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है। यदि हम स्वच्छता को अपनाते है तो इन खतरो से बचा जा सकता है। वहीं यूनीसेफ के जानसन ने कहा कि मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों मे 90 फीसदी आबादी खुले में शौच करती है जिस कारण बच्चे और महिलाए भारी संख्या में अकाल मौत की शिकार होती है। सर्वप्रथम स्वामी हनुतश्री ने कहा कि धर्म की शुरूआत स्वच्छता से होती है यह ईश्वर के करीब ले जाती है। नदियों के किनारे शहर स्वच्छता को ध्यान में रखकर ही बसाए गए थे, किंतु अब नदिया प्रदूषित हो गई है। इन्होने साफ-सफाई को सबसे महत्वपूर्ण माना है । 

आर्ट आफ लिविंग के स्वामी अनुपम ने कहा कि अब समय बाहर निकलकर कुछ करने का है एक ठोस कार्य योजना बनाए और उस पर अमल करें। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के आरंम्भ में स्पंदन के सचिव अनिल सौमित्र ने कार्यक्रम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि धर्म गुरुओं के साथ संवाद एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योकि विभिन्न धर्मोँ के प्रतिनिधि हर समुदाय को प्रभावित करने में सक्षम है। यूनिसफ के जनसंपर्क अधिकारी अनिल गुलाटी ने कहा कि स्वच्छता बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है और इस मामले में मध्यप्रदेश पिछड़ा है। हालाकि हाल के प्रयासों से शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनेक तरह के प्रयास किए जा रहे है। यह कार्यक्रम उसी का हिस्सा है । कार्यक्रम में ज्ञानी दिलीप सिँह, ब्रह्मकुमारीज की बहन रीना, ड़ा अनवर शफ़ी, ड़ा. अंजना गुप्ता, शेखर बाबा, भंते चन्द रतन थेरो, ब्रह्म्चारी अमित जैन ने भी अपने विचार रखे।

.

16 सूत्रों और 13 उप सूत्रों के वैदिक गणित का कमाल

भारत में कम ही लोग जानते हैं कि वैदिक गणित नाम का भी कोई गणित है। जो जानते भी हैं, वे इसे विवादास्पद मानते हैं कि वेदों में किसी अलग गणना प्रणाली का उल्लेख है। पर विदेशों में बहुत-से लोग मानने लगे हैं कि भारत की प्राचीन वैदिक विधि से गणित के हिसाब लगाने में न केवल आनंद मिलता है,बल्कि उससे आत्मविश्वास बढ़ता है, स्मरणशक्ति भी बढ़ती है। मन ही मन हिसाब लगाने की यह विधि भारत के स्कूलों में शायद ही पढ़ाई जाती है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि भारत के शिक्षाशास्त्रियों का अब भी यही विश्वास है कि असली ज्ञान-विज्ञान वही है,जो इंग्लैंड-अमेरिका यानी विदेशों से आता है। 

 

सोलह सूत्रों का कमाल 

===============

वैदिक गणित को लेकर न्यूयॉर्क टाईम्स के थॉमस फ्राईडमैन ने  कहा था-60 के दशक में जब हम अमरीकी बच्चे बड़े हो रहे थे, तो हमें यह कहा जाता था कि खाने के समय हमें खाना जूठा नहीं छोड़ना चाहिए, हम जितना खाना जूठा छोड़ते हैं उससे कई लोगों का पेट भर सकता है। मेरी माँ मुझसे कहा करती थी, जब तुम खाना खाते हो तो भारत में भूख से मरने वाले बच्चों के बारे में भी सोचो, और आज 40  साल बाद मैं अपने बच्चों से कहता हूँ कि अपना गणित का होमवर्क पूरा करो और इसके साथ ही भारत के बच्चों के बारे में सोचो, वे तुमको भूखों मरने पर मजूबर कर देंगे। वैदिक गणित के क्षेत्र में स्वामी श्री भारती कृष्ण जी महाराज का अभूरपूर्व योगदान है। जिज्ञासु विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उनसे काफी सीख मिली है। स्वामी जी द्वारा प्रतिपादित सोलह सूत्र और तेरह उपसूत्र यदि आप समझ लें तो गणित के कठिन से कठिन सवालों के ज़वाब आपकी मुट्ठी में समझिए। 

 

अगर भारतीय बच्चे वैदिक गणित के महत्व और उपयोगिता को समझ लें तो थॉमस फ्राईडमैन का यह वक्तव्य सही साबित हो सकता है। वैदिक गणित के माध्यम से हम गणित को रोजमर्रा की जिंदगी में मौज मस्ती की तरह शामिल कर सकते हैं।  वैदिक गणित का किसी भी धर्म से कोई लेना देन नहीं है। यह मात्र एक गणित है। अगर कोई हमसे पूछे कि 8 गुणा 8 कितना होता है तो हम इसका तत्काल जवाब देंगे 64 लेकिन कोई अगर हमसे पूछे कि 13 गुणा 17 कितना होता है तो हमारे माथे पर बह पड़ जाएंगेऔर हम इसका गुणा करने मे उलझ जाएंगे। इसके लिए फिर हम अपने स्कूल के समय की कोई तरकीब आजमाएंगे, लेकिन इस पूरी कवायद में  बहुत समय लग जाएगा, या फिर हम इसका आसान तरीका अपनाएगे यानि केल्कुलेटर, मोबाइल या कम्प्युटर की मदद से इसका हल खोजेंगे।

 

भारत का योगदान अमूल्य 

==================

भारत का गणित-ज्ञान यूनान और मिस्र से भी पुराना बताया जाता है। शून्य और दशमलव तो भारत की देन हैं ही, कहते हैं कि यूनानी गणितज्ञ पिथागोरस का प्रमेय भी भारत में पहले से ज्ञात था। वैदिक विधि से बड़ी संख्याओं का जोड़-घटाना और गुणा-भाग ही नहीं, वर्ग और वर्गमूल, घन और घनमूल निकालना भी संभव है। इस बीच इंग्लैंड, अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बच्चों को वैदिक गणित सिखाने वाले स्कूल भी खुल गए हैं।

 

जाहिर है कि वैदिक गणित हमारी अपनी प्राचीन गणित है जिसके माध्यम से हम मात्र कुछ क्षणों में अपने कठिन से कठिन सवाल का हल पा सकते हैं, लेकिन हम किसी भी तरह की गणना के लिए पूरी तरह से कैल्कुलेटर के आदी हो गए हैं,  जो कि पश्चिम जगत की खोज है। अगर हम अतीत में जाएं, तो वह काल न तो कंप्यूटर का था न कैल्कुलैटर का, आज से सैकड़ों साल पहले के समय की जो बात हमारे दिमाग में सबसे पहले आती है वह है वैदिक काल। हमारे चार वेद हैं, और वैदिक गणित अथर्ववेद का ही एक भाग है। 

वैदिक गणित की विशेषताएँ 

=====================

वैदिक गणित की कुछ प्रमुख विशेषताओं पर गौर कीजिए -(1) ये सूत्र सहज ही में समझ में आ जाते हैं। उनका अनुप्रयोग सरल है तथा सहज ही याद हो जाते हैं। सारी प्रक्रिया मौखिक हो जाती है।(2) ये सूत्र गणित की सभी शाखाओं के सभी अध्यायों में सभी विभागों पर लागू होते हैं। शुद्ध अथवा प्रयुक्त गणित में ऐसा कोई भाग नहीं जिसमें उनका प्रयोग न हो। (3) जटिल गणितीय प्रश्नों को हल करने में प्रचलित विधियों की तुलना में वैदिक गणित विधियाँ काफी कम समय लेती हैं।(4) छोटी उम्र के बच्चे भी सूत्रों की सहायता से प्रश्नों को मौखिक हल कर उत्तर बता सकते हैं।(5) वैदिक गणित का संपूर्ण पाठ्यक्रम प्रचलित गणितीय पाठ्यक्रम की तुलना में काफी कम समय में पूर्ण किया जा सकता है।

वैदिक गणित एक तरह से 16 सूत्रों पर आधारित है। इन सूत्रों को आप चाहें तो एक तकनीक या ट्रिक भी कह सकते हैं। कई लोग तो इसे जादुई ट्रिक भी कहते हैं। इस तकनीक की मदद से सवाल के साथ ही उसका जवाब भी हमारे दिमाग में आ जाता है। हम इसे दूसरे शब्दों में इस तरह कह सकते हैं वैदिक गणित वह विधा है जिसकी मदद से हम सवाल में ही छुपे जवाब का पता लगा सकते हैं।

कुछ रोचक उदाहरण देखें 

==================

दुनिया वाले अब  भारत की वैदिक अंकगणित पर चकित हो रहे हैं और उसे सीख रहे हैं। बिना कागज-पेंसिल या कैल्क्युलेटर के मन ही मन हिसाब लगाने का उससे सरल और तेज तरीका शायद ही कोई है। रंगा योगेश्वर ने जर्मन टेलीविजन दर्शकों को एक उदाहरण से इसे समझाया। उन्होंने कहा, मान लें कि हमें 889 में 998 का गुणा करना है। प्रचलित तरीके से यह इतना आसान नहीं है। भारतीय वैदिक तरीके से उसे ऐसे करेंगे- दोनों का सब से नजदीकी पूर्णांक एक हजार है। उन्हें एक हजार में से घटाने पर मिले 2 और 111, इन दोनों का गुणा करने पर मिलेगा 222, अपने मन में इसे दाहिनी ओर लिखें। अब 889 में से उस दो को घटाएँ, जो 998 को एक हजार बनाने के लिए जोड़ना पड़ा। मिला 887, इसे मन में 222 के पहले बायीं ओर लिखें। यही, यानी 887222, सही गुणनफल है। है न कमाल ?

क्या आपको भी वैदिक गणित सीखनी है इसे पढ्ने के दो तरीके हैं – सूत्र के माध्यम से, और आसान विधा के माध्यम से। मिसाल के तौर पर गौर फरमाइए – आपको 10 या 100 य 1000 आदि से कोई भी अंक घटाना: (सब 9 से और अंतिम 10 से.) इसके लिये बहुत ही सीधा तरीका है, उदाहरण – कुछ इस तरह – (1000 -784) ,4 को छोड कर, हर अंक को 9 से घटाइये: इस तरह:(9-7) (9-8) आप को मिलता है: 21 अब अंतिम अंक (4) को,10 से घटाइये. आपको मिलता है 6, इस अंक को 21 के बाद लगा दीजिये। मिला 216, अब कहिये तो सही कि गणित के इस चमत्कारिक हल से हमारी धरोहर पर गर्व करने का कारण बनता है या नहीं ? इस तरह हम सवाल को एक निश्चित विधि से विभाजित कर उसका उत्तर उसके अंदर से ही हासिल कर सकते हैं। क्या यह जादू नहीं है। यह दुर्भाग्य की बात है कि भारत में 90 प्रतिशत लोग इस जादुई गणित से परिचित नहीं है।

 

चुटकियों में पाएँ हल 

===============

वैदिक गणित के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी गणित से संबंधित किसी भी सवाल का हल बजाय कुछ मिनटों के मात्र कुछ  क्षणों में ही हासिल कर सकता है, इससे उसका समय भी बचेगा और परीक्षा में वह ज्यादा अंक भी हासिल कर सकता है। इस विधि के माध्यम से कोई भी विद्यार्थी जोड़, बाकी घटाव, वर्ग, वर्गमूल और घन मूल आदि सवालों को बहुत संक्षिप्त तरीके कम समय मे कर सकता है। किसी भी विद्यार्थी के लिए परीक्षा में 5 या10 अंकों का अंतर बहुत मायने रखता है खासकर उनके लिए जो कॉलेज में प्रवेश लेना चाहते हैं।

 

वैदिक गणित  की तुलना अगर यूसी मैथ्स से की जाए तो हम पाते हैं कि विद्यार्थी एबैकस की मदद के बिना यूसी मैथ्स नहीं सीख सकते। एबैकस वह उपकरण है जिसका आविष्कार चीन में हुआ है और इसमें कुछ बिंदुओ का प्रयोग किया जाता है। दूसरी बात इसको सीखने में ज्यादा समय (कुछ सप्ताह) लगता है। इसको विस्तार से सीखने में  यानि भाग देना, गुणा करना, आदि सीखने मे कई और सप्ताह लग जाते हैं।

 

बुनियादी सिद्धांत सीखना होगा 

======================

जबकि वैदिक गणित में तो किसी भी विद्यार्थी को इसके बुनियादी सिध्दांतों को ही सीखना होता है और उसे गणित के सवाल के अनुसार जोड़, घटाव, गुणा भाग से लेकर वर्ग, वर्गमूल, और घनमूल निकालने में प्रयोग में लाना होता है। यह सबकुछ कोई भी एक घंटे तक चहने वाले 12 सत्रों में आसानी से सीख सकता है। वैदिक गणित बीजगणित, त्रिकोणमिति और कैल्कुलस से जुड़े सवालों को हल करने में भी उपयोगी होता है। खगोल और अंकगणित से संबंधित गणनाओं के लिए भी वैदिक गणित बेहद उपयोगी है।वैदिक गणित की सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पश्चिमी विधा की पध्दति की एकरसता से छुटकारा मिल जाता है। इस विधि की वजह से गणित के प्रति विद्यार्थियों की रुचि हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। इस लेख का मकसद यही है कि आपके बच्चे गणित के मामले में कैल्कुलेटर पर आश्रित ना रहें और गणित के अंकों के साथ खेलें इससे उनकी बुध्दि भी कुशाग्र होगी।

 

परीक्षा की घबराहट से बचें 

===================

वैदिक गणित उन लोगों को और उन छात्रों को जरुर सीखना चाहिए जो गणित से घबराते हैं। परीक्षा में गणित के पेपर में समय की कमी से अपने सवालों को हल नहीं कर पाते हैं जो अन्य विषयों में तो अच्छी पढ़ाई करते हैं मगर गणित विषय में रुचि पैदा नहीं होती। जो मन ही मन में गणना करने में हमेशा पिछ़ड़ जाते हैं। वैदिक गणित बहुत सीधा और सरल है जिससे समय की बचत होती है। इसकी मदद से जटिल गणित की गणनाएँ भी आसानी से की जा सकती है। इससे हमारी मानसिक एकाग्रता में वृध्दि होती है। आप अपने जवाब को लेकर पूरे आत्मविश्वास से भरे होते हैं।

 

जटिल खगोलीय गणना करने के लिए नासा (अमरीकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र) में भी वैदिक गणित का प्रयोग किया जाता है। आज वैदिक गणित इंग्लैंड, आयरलैंड, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यू .जीलैंड और अमरीका सहित कई देशों में पढ़ाया जा रहा हैसाथ ही स्वीडन, जर्मनी, ईटली पौलेंड और सिंगापुर में भी इसे स्वीकार किया गया है। हमेशा याद रखें: किसी समस्या का समाधान खोजने का तरीका जितना सरल होगा,  आप उतनी ही जल्दी उसे हल कर सकेंगे और इसमें गलती होने की संभावना भी कम से कम होगी। 

 

अंत में बस इतना कि साहित्य का प्राध्यापक हूँ लेकिन मूलतः गणित विषय में स्नातक होने के कारण मैंने अभी हाल ही में इसे पढ़ना शुरू किया और मूल संस्कृत सूत्रों के साथ  शुरू के कुछ पन्ने पढ़ कर ही हैरान हो गया हूँ। मैं चाहता हूँ कि इस बेहतरीन तकनीक को सभी के साथ बाँटा जाये और मैं बार बार अनुरोध करूँगा कि छोटे बच्चों को इसकी शिक्षा दी जाये। ये विदेशी तकनीकों से बिल्कुल अलग है और बेहद सरल है। इससे हमारे नौनिहालों की बुद्धि भी कुशाग्र होगी। 

 

==========================

प्राध्यापक ( हिन्दी विभाग )

दिग्विजय कालेज,राजनांदगांव 

मो.9301054300 

.

ये देश के शहीदों के साथ क्रूर मजाक नहीं तो क्या है

पिछले दिनों कठुआ/जम्मू में आतंकी हमले में एक आतंकी को ढेर करके और अपने चालीस साथियों की जानबचाने वाले अपने लाडले शहीद को जींद(हरियाणा)वासियों ने अंतिम विदाई दी.इधर इस जांबाज़ सिपाही को जींदवासी भावबीनी अंतिम विदाई दे रहे थे और उधर हमारे नेता/मंत्री और जानेमाने कश्मीरी अलगाववादीदिल्ली में पकिस्तान-दिवस-समारोह में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे।जैसे  हाल ही में जम्मू-कश्मीर के साम्बा और कठुआ में कुछ हुआ ही न हो और जैसे इन दोनों जगहों पर हुए आतंकी हमलों में पाक का कोई हाथ ही न रहा हो।रणबांकुरों वाले हमारे देश की सरकार की नियत और नीतियां क्या सचमुच इतनी ढुलमुल हो सकती हैं?शहीद की आत्मा भला क्या सोच रही होगी?यहाँ पर यह बात भी विचारणीय है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत-पाक वार्ता का जब भी दौर चलता है या चलने वाला होता है तो यह मान कर चला जाता है कि कश्मीर-समस्या मुख्यतया कश्मीर में रह रहे बहुसंख्यकों से जुडी हुयी है और उन्हीं की आकांक्षओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए.विडंबना देखिये,कश्मीरी पंडित जो वहां के मूल बाशिंदें हैं,उनके प्रतिनिधि/प्रतिनिधियों को न तो कोई वार्ता के लिए बुलाता है और न कोई महत्व ही देता है.शायद सरकारें यह मान बैठी है कि यह विस्थापित/शरणार्थी कौम अपना स्वत्व तो खो चुकी है,इसे हाशिये पर धकेलने में हर्ज ही क्या है?चुनावों के दौरान पंडितों के विस्थापन,उनकी त्रासदी,उनकी हताशा आदि को तो सरकारें अपने पक्ष में जोरशोर से भुना लेती है, मगर समय पड़ने पर वार्ता-मंच से उनको बेदखल कर देती है.सच है, क्रूर ग्रहों की वंदना पहले और सौम्य ग्रहों की बाद में.

एक समाचार यह भी है कि हाल ही में कश्मीर की धरती पर कश्मीरी महिला विंग की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी ने पाकिस्तानी ध्वज फहराने के साथ-साथ  पाकिस्तानी राष्ट्रगान भी गाया और यह सब राज्य सरकार टुकर-टुकर देखती रही वैसे ही जैसे दिल्ली में पकिस्तान के राजदूत से कश्मीरी अलगाववादी न केवलभेंट कर रहे थे बल्कि अपने को भारत का नागरिक मानने से भी इनकार कर रहे थे और यह सब केंद्र की नाक तले हो रहा था.अलगाववादियों के प्रति कड़ा रुख अपनाने का समय आ गया है: जिन्हें पकिस्तान से प्रेम है वे बेशक पाकिस्तान चले जाएँ।भारत में रहते हुए कोई पकिस्तान के गीत गाये,यह देश बर्दाश्त नहीं करेगा।राज्य सरकार और केंद्र सरकार  को चाहिए कि वे ऐसे देशविरोधी तत्वों से सख्ती से पेश आयें अन्यथा समझा जायगा कि दोनों सरकारें किसी ख़ास मजबूरी के मारे अलगाववादियों के प्रति नर्म रुख अपना रही हैं और ऐसा ही कुछ पहले भी होता रहा है.

संपर्क   
 DR.S.K.RAINA
 (डॉ० शिबन कृष्ण रैणा)
 SENIOR FELLOW,MINISTRY OF CULTURE
 (GOVT.OF INDIA)
 2/537 Aravali Vihar(Alwar)
 Rajasthan 301001
 Contact Nos; +919414216124 and 01442360124
 Email: skraina123@gmail.com,

.

वो रस्सी कहाँ है जिसपे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू हँसते हुए झूले थे ?

वो रस्सी आज भी संग्रहालय में है जिससे गांधी बकरी बांधा करते थे।
किंतु वो रस्सी कहाँ है जिसपे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू हँसते हुवे झूले थे ?

हालात-ए-मुल्क देखकर रोया न गया। 
कोशिश तो की पर मुँह ढँककर सोया न गया।
देश मेरा क्या बाजार हो गया है,
पकड़ता हूँ तिरंगा तो लोग पूछते है कितने का है ?

बरसों बाद एक नेताको गंगा की आरती करते देखा है,
वरना अब तक एक परिवार की समाधियों पर फूल चढ़ाते देखा है।
बरसों बाद एक नेता को अपनी राष्ट्रभाषा में बोलते देखा है,
वरना अब तक रटी रटाई अंग्रेजी बोलते देखा है।
बरसों बाद एक नेता को स्टॅच्यू ऑफ़ यूनिटी बनते देखा है,
वरना अब तक एक परिवारकी मूर्तियाँ बनाते देखा है।
बरसों बाद एक नेता को संसद भवन की माटी चूमते देखा है,
वरना अब तक इटालियन सैन्डल चाटते देखा है।
बरसों बाद एक नेता को देशके लिए रोते देखा है,
वरना अब तक ' मेरे पति को मार दिया ' कह कर वोटों की भीख माँगते देखा है।

पाकिस्तान को घबराते देखा है,
अमेरिका को झुकते देखा है,
इतने बरसो बाद भारत माँ को खुलकर मुस्कुराते देखा है।

.

कॉमेडी फिल्म -हम सब उल्लू है

हम सब उल्लू  हैं एक कॉमेडी फिल्म है ,जिसके अधिकांश पात्र कॉमेडी कलाकार है,जैसे -उपासना सिंह,राकेश बेदी,राजेश पूरी,गुड्डी मारुति ,वीआई पी,राजीव निगम,सुनील पाल,गेवी चहल,वंदना लालवानी,मुकेश आहूजा,रमेश ननकानी,नमृता छाबरिया आदि। 
फिल्म में अलका याग्निक,कुणाल गांजा वाला तथा जावेद अली ने  गीत गाए है। 

अप्रेल माह में पूरे भारतवर्ष में प्रदर्शित की जाने वाली फिल्म का निर्माण श्रीमती सोना मनवानी की कम्पनी सोना एंटरप्राइजेज ने किया है ,जो मूलतः राजस्थान निवासी है। 

फिल्म का निर्देशन ,लेखन, संवाद और  गीतों  की रचना टी मनवानी आनंद ने की है। फिल्म के सह निर्देशक,स्क्रीन प्ले राइटर है श्री तारिक भट्ट,सिनेमेटोग्राफर श्री सतीश सिस्टा हैं। 

संपर्क 
09820882937/episode.anand9@gmail.com

.