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रेल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने रेल संचालन को लेकर दिए उपयोगी सुझाव

संसद में 26 फरवरी को रेल बजट पेश किया जाएगा। आर्थिक तंगी से गुजरते रेलवे की हालत के मद्देनजर जानकार मान रहे हैं कि इस बार नई ट्रेनों का एलान काफी कम होगा और इनकी संख्या महज 100 तक ही सीमित होगी। इसके अलावा, नए रेलवे प्रोजेक्ट्स के एलान कम हो सकते हैं। बता दें कि हर साल 150 से 180 नई ट्रेनों का एलान होता है। बीते साल ही 160 ट्रेनों की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, फंड जुटाने के लिए कंपनियों के नाम पर स्पेशल ट्रेनें मसलन-कोका कोला एक्सप्रेस या हल्दीराम एक्सप्रेस चलाई जा सकती है। रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन विवेक सहाय का भी मानना है कि वर्तमान उपलब्ध संसाधनों के मद्देनजर रेलवे की बेहतरी के लिए इसे री-स्ट्रक्चर करने की जरूरत है। आगे सहाय के लेख में पढ़ें कि वर्तमान में रेलवे के सामने क्या हैं चुनौतियां और कैसे निपट सकती है सरकार।
 
 पूर्वोत्तर में हुआ विस्तार
पूर्वोत्तर में रेलवे का विस्तार हो रहा है। यह भारतीय रेलवे के लिए अच्छा संकेत है। रेलवे के विस्तार के मामले में पिछले डेढ़ दशक में काफी गति आई है। अब मैदानी इलाकों से रेल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की ओर रुख कर रही है। लेकिन अब भी यदि भारत के मानचित्र को देखकर विचार किया जाए तो देखने को मिलेगा कि रेलवे यातायात का प्रवाह संतुलित नहीं है। यह गौर करने वाली बात है कि चार प्रमुख महानगरों को जोड़ने वाली लाइनें कुल ट्रैफिक का 16 प्रतिशत से भी कम वहन करती हैं। इन्हीं लाइनों पर रेलवे अधिकांश यात्रियों और माल का परिवहन करती है। हम इन लाइनों का सौ फीसदी उपयोग कर रहे हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए अधिक क्षमता के निर्माण की जरूरत है। उत्तर-पूर्व में भी रेल पहुंच बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके साथ ही, विकास के बीच खाई को पाटने के लिए पार्सल गाड़ियां निजी तौर पर चलाने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही हाई स्पीड रेल परियोजनाओं, फ्रेट कॉरिडोर, विद्युतीकरण और सिग्नलिंग प्रणाली में एफडीआई निवेश जैसे निर्णय काफी सहायक हो सकते हैं।
 
निजी क्षेत्र से निवेश लाने की जरूरत
नई पटरियों को बिछाने के अलावा नए प्रोजेक्ट्स में निजी क्षेत्र को जिम्मेदारी सौंपे जाने की जरूरत है। यह निजी भागीदारी करने वालों के हितों को ध्यान में रखे जाने के साथ हो, क्योंकि यदि निवेश करने वाले को यदि नुकसान होगा तो भला वह क्यों आगे आएगा। अगले तीन सालों में निजी क्षेत्र पचास हजार करोड़ से भी ज्यादा लागत के साथ रेलवे स्टेशनों के विकास में सहायता कर सकता है। इसके अलावा, निजी क्षेत्र को इंटरसिटी गाडियां संचालित करने की मंजूरी देने में भी कोई हर्ज नहीं है। इससे रेलवे अपने राजस्व की सुरक्षा करते हुए पहले से तय कुछ रास्तों और समय पर निजी क्षेत्र को उसकी पूंजी से ट्रेन चलाने की मंजूरी देकर क्षमता बढ़ा सकता है। मौजूदा समय डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर आंशिक रूप से जेआईसीए और विश्व बैंक से वित्त पोषित है। इसी तरह के गलियारों को निजी सहभागिता के मॉडल पर खड़ा किया जा सकता है।
 
साभार- दैनिक भास्कर से

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म.प्र. पर्यटन विकास विभाग की अनूठी पहल

भोपाल. प्रदेश के पर्यटन काे बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) और भारतीय रेलवे केटरिंग (आईआरसीटीसी) मिलकर प्रयास करेंगे। दोनों कंपनियों के साझा प्रयासों से प्रदेश में पर्यटक ढाबे, स्वागत केंद्र और बजट होटल्स का निर्माण किया जाएगा। यहां आने वाले पर्यटक अपने रुकने, खाने और ट्रेवल के लिए दोनों कंपनियाें के वेब पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे।

प्रदेश आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए गुरुवार को दोनों कंपनियों के बीच एमओयू किया गया। इस करार पर एमपीटीडीसी के कार्यपालिक निदेशक ओम विजय चौधरी और आईआरसीटीसी की ओर से कंपनी के रीजनल डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने हस्ताक्षर किए।

रेल पर्यटन को बढ़ावा
करार के तहत आईआरसीटीसी और एमपीटीडीसी संयुक्त रूप से रेल पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इसके लिए आईआरसीटीसी प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को रेलवे से संबंधित हर जानकारी उपलब्ध कराएगा। वहीं एमपी टूरिज्म पर्यटकों को आवास सुविधा, भोजन और यातायात से संबंधित जानकारी मुहैया कराएगा। दोनाें कंपनियां एक-दूसरे के ग्राहकों को अपने प्रोडक्ट और सेवाओं की जानकारी देंगी।

साझा करेंगे वेब पोर्टल
यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए दाेनों कंपनियां एक-दूसरे के वेब पोर्टल का भी उपयोग कर सकेंगी। स्थान की उपलब्धता के अनुसार दोनों कंपनियां प्रदेश में पर्यटक ढाबे, स्वागत केंद्र और बजट होटल्स का निर्माण करेंगी। लाउंज और कॉन्फ्रेंस हॉल भी विकसित किए जाएंगे। 

भोपाल. प्रदेश के पर्यटन काे बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) और भारतीय रेलवे केटरिंग (आईआरसीटीसी) मिलकर प्रयास करेंगे। दोनों कंपनियों के साझा प्रयासों से प्रदेश में पर्यटक ढाबे, स्वागत केंद्र और बजट होटल्स का निर्माण किया जाएगा। यहां आने वाले पर्यटक अपने रुकने, खाने और ट्रेवल के लिए दोनों कंपनियाें के वेब पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे।

प्रदेश आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए गुरुवार को दोनों कंपनियों के बीच एमओयू किया गया। इस करार पर एमपीटीडीसी के कार्यपालिक निदेशक ओम विजय चौधरी और आईआरसीटीसी की ओर से कंपनी के रीजनल डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने हस्ताक्षर किए।

रेल पर्यटन को बढ़ावा
करार के तहत आईआरसीटीसी और एमपीटीडीसी संयुक्त रूप से रेल पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इसके लिए आईआरसीटीसी प्रदेश में आने वाले पर्यटकों को रेलवे से संबंधित हर जानकारी उपलब्ध कराएगा। वहीं एमपी टूरिज्म पर्यटकों को आवास सुविधा, भोजन और यातायात से संबंधित जानकारी मुहैया कराएगा। दोनाें कंपनियां एक-दूसरे के ग्राहकों को अपने प्रोडक्ट और सेवाओं की जानकारी देंगी।

साझा करेंगे वेब पोर्टल
यात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए दाेनों कंपनियां एक-दूसरे के वेब पोर्टल का भी उपयोग कर सकेंगी। स्थान की उपलब्धता के अनुसार दोनों कंपनियां प्रदेश में पर्यटक ढाबे, स्वागत केंद्र और बजट होटल्स का निर्माण करेंगी। लाउंज और कॉन्फ्रेंस हॉल भी विकसित किए जाएंगे।

साभार- दैनिक भास्कर से 

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विकास रेल पहँची अरुणाचल प्रदेश में

ईटानगर। प्रधानमंत्री ने रिमोट कंट्रोल से नहारलागून और नई दिल्ली के बीच एसी एक्सप्रेस ट्रेन और नहारलागून-गुवाहाटी के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस का शुभारंभ किया। साथ ही, अरुणाचल के नहारलागून और असम में लखीमपुर जिले के हारमुति के बीच 21.75 किलोमीटर लम्बी ब्रॉड गेज रेलवे लाइन को देश को समर्पित किया। इस मौके पर केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु भी मौजूद थे।
बिजली प्रोजेक्ट
मोदी ने 132 किलोवॉट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी और ईटानगर वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ने वाली नई ट्रेन से टूरिजम इंडस्ट्री तरक्की करेगी। हाइड्रो पावर का इस्तेमाल कर अरुणाचल प्रदेश पूरे देश को बिजली दे सकता है।
7400 करोड़ का पैकेज
मोदी ने कहा कि केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश में रेलवे परियोजना के लिए 4200 करोड़ रुपये और पावर प्रोजेक्ट के लिए 3200 करोड़ रुपये तय किए हैं। मैं यह जानकर दुखी हूं कि राज्य की राजधानी के लोगों को सुरक्षित पानी देने में स्वतंत्र भारत को 60 साल लग गए।
जय हिंद बोलना आम चलन
मोदी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश का इकलौता राज्य है जहां लोग 'जय हिंद' बोलकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री यहां के पारंपरिक परिधान में नजर आए। उन्होंने परंपरा को जीवंत रखने के लिए लोगों की सराहना की।
अरुणाचल को चाहिए स्पेशल पैकेज: तुकी
मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने प्रधानमंत्री से राज्य के विकास के लिए स्पेशल पैकेज मांगा। उन्होंने कहा कि यहां टूरिजम को बढ़ावा और आम जनता को सहूलियत देने के लिए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट, कम्युनिकेशन नेटवर्क, सेफ ड्रिंकिंग वाटर, स्मार्ट सिटी, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, रीजनल फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट और कम से कम तीन स्मार्टसिटी बनाए जाने की तत्काल जरूरत है। सीएम ने कहा कि राज्य के चौतरफा विकास के लिए एम्स, आइआइटी और आइआइएम के अलावा सैनिक स्कूल भी बनाए जाने की जरूरत है।

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जासूसी कांड में पत्रकार शांतुन गिरफ्तार

कॉर्पोरेट जासूसी के संदिग्ध मामले में में आज सुबह दो और गिरफ्तारियां हुईं हैं, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है। पुलिस ने पत्रकार शांतनु सैकिया और एक ऑइल गैस कंसल्टेंसी फर्म के सीईओ प्रयास जैन को गिरफ्तार किया है।
 
शांतनु सैकिया पर कारोबारी घराने को जानकारी देने और पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज लीक करने का आरोप है। शांतनु पहले फाइनेंशियल एक्सप्रेस में काम करते थे। करीब दस साल पूर्व वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल के साथ उन्हें एक स्टिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
 
उल्लेखनीय है कि शांतनु की पत्नी साबिना सहगल सैकिया मुंबई स्थित अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में काम करती थीं। अपनी असामयिक निधन के समय वह टाइम्स ऑफ इंडिया कंसल्टिंग एडिटर थीं। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया में 19 वर्षों तक काम किया। वह एक फूड राइटर भी थीं। उन्होंने “The Times Good Eating Guide, a comprehensive evaluation of 600 restaurants in the City.” नाम से एक किताब भी लिखी है। 2008 में मुंबई में होटल ताज पर आतंकी हमले के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उस समय वह जाने-माने जर्नलिस्ट बाची करकारिया के बेटे की शादी अटैंड करने ताज होटल पहुंची थी।
 
पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी के मुताबिक, अब तक की जांच में एक वरिष्ठ पत्रकार की भी भूमिका सामने आ रही है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

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क्या देश की जनता के अपने खुद के चैनल का सपना साकार होगा?

वरिष्ठ पत्रकार दीपक ने जब फेसबुक वॉल के जरिए ये जानने की कोशिश की सरकार या कॉरपोरेट घरानों का अपना चैनल हो सकता है तो फिर इस देश की जनता का अपना न्यूज चैनल क्यों नहीं?  उनके इस सवाल से उन्हें जनता से उत्साहवर्धक जवाब मिले। इतना ही नहीं उन्हें इस भागीरथी प्रयास के शुभारंभ के लिए लोगों ने उन्हें मुफ्त में जगह के ऑफर तक दे डाले।

फिलहाल दीपक इस कोशिश में है कि जल्द से जल्द जनता का एक चैनल खुल सके, इसके लिए आजतक के पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ श्रीवास्तव ने इस मुहीम को लेकर जनता से संवाद करने के लिए वेबसाइट खोलने की बात की है। इस वेबसाइट को उन्होंने INDIASAMVAD नाम दिया है।       

जनता का चैनल खोलने को लेकर वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा ने अपने फेसबुक वॉल पर कुछ यूं लिखा:

अगर सरकार का अपना न्यूज चैनल हो सकता है। अगर कॉर्पोरेट घरानों का अपना चैनल हो सकता है। अगर बिल्डर और चिट फंड कंपनियों का चैनल हो सकता है। तो क्या इस देश की जनता का भी अपना न्यूज चैनल हो सकता है?

कुछ सहयोगी पत्रकारों के साथ मिलकर कुछ दिन पहले हमने ये सवाल लोगों से पूछे थे? क्या देश के लोगों के हाथों में मीडिया की ताकत आनी चाहिए? क्या मीडिया में एक ऐसी ताकत होनी चाहिए जो सरकार और कॉर्पोरेट के आगे नतमस्तक ना हो? क्या देश में एक ऐसी ताकत जुटाई जा सकती है जो पारदर्शिता ला सके?

इन सवालों को लेकर जनता से हमे उत्साहवर्धक जवाब मिल रहे है। देश भर से हमें ई-मेल और फेसबुक के जरिए जनता का न्यूज चैनल शुरू करने के लिए हर संभव सहयोग मिल रहा है। हर पेशे हर तबके के लोग जुड़ रहे हैं जिसमे सैकड़ों अप्रवासी भारतीय भी शामिल हो रहे हैं।

इस भागीरथी प्रयास का श्री गणेश करने के लिए पिछले तीन-चार दिन में हमें दिल्ली में कार्यालय खोलने के लिए कोई 6-7 जगह के ऑफर आ चुके हैं। एक कार्यालय नोएडा के सेक्टर-10 में। एक कार्यालय कनॉट प्लेस के बंगाली मार्केट में और एक कार्यालय दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार के बसन्त लोक बाजार में ऑफर किया गया है। जनता के चैनल का समर्थन देने वालों ने ये ऑफर बिलकुल फ्री दिया है। हमारे उत्साह के लिए ऐसा समर्थन उम्मीद से ज्यादा है।

IIT के कुछ छात्र देश की जनता से संवाद करने के लिए एक वेबसाइट बना रहे हैं। देश के एक बड़े वेब डिजाइनर इस साइट को डिजाइन कर रहे हैं। आजतक के पूर्व एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ श्रीवास्तव एक एक्सपर्ट टीम के साथ मिलकर इस साइट की देख रेख कर रहे हैं। जनता का चैनल लाने के लिए हम इस साइट के जरिये देश से सीधा संवाद करेंगे। इसलिए इस साइट का नाम INDIASAMVAD रखा गया है।

मित्रों हिंदी टेलिविजन के तीन नामी गिरामी पत्रकार और एंकर भी देश की जनता के इस प्रोजेक्ट में सहयोग दे रहे हैं। टेलिविजन के कुछ जाने-माने टेक्नीकल एक्सपर्ट भी हमसे जुड़ गए हैं। प्रिंट और टीवी के कई बड़े पत्रकार कल हुई पहली बैठक में शामिल भी हुए। जनता के हर वर्ग से हमें सहयोग मिलता जा रहा है और हम आगे बढ़ रहे हैं।

जनता के अपने न्यूज चैनल का पूरा कॉन्सेप्ट नोट और पारदर्शिता से काम करने की नीति का सारा खाका आपको जल्द ही INDIASAMVAD वेबसाइट पर मिलेगा। कल हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि इस वेबसाइट के कुछ पेज दस दिन तक लॉन्च हो जाएंगे।

मित्रों आप सभी से सिर्फ एक आग्रह करना है। पब्लिक मीडिया का ये कॉन्सेप्ट देश में पहला है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब मीडिया की मिलकीयत निजी या सरकारी हाथों के बजाए जनता के हाथ में सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास को सफल करना अब हमारी जिम्मेदारी है।

आइए मिलकर इस भागीरथी प्रयास में शामिल हो। आइए मिलकर अपने पसीने से एक गंगा निकालें। ऐसी अविरल गंगा जो सरकार और कॉर्पोरेट के हाथों में गिरवी मीडिया के दाग धो सके। आइए साथ साथ आगे बढ़ें। आइए सोशल मीडिया पर इस कॉन्सेप्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। मित्रों बिना जन समर्थन के इस देश में कोई भी बड़ा काम संभव नही है।

आप अपने सुझाव इस ईमेल पर भेजें indiasamvad2015@gmail.com

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(साभार : वरिष्ठ खोजी पत्रकार दीपक शर्मा की फेसबुक वॉल से)

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आकांक्षा यादव को निराला स्मृति संस्थान, द्वारा ‘मनोहरा देवी स्मृति सम्मान’

          युवा साहित्यकार एवं ब्लाॅगर आकांक्षा यादव को निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा निरालाजी की धर्मपत्नी की स्मृति में दिये जाने वाले सम्मान “मनोहरा देवी स्मृति सम्मान“ के लिए चुना गया है। उक्त सम्मान निराला जयन्ती के अवसर पर 21 फरवरी 2015 को मनोहरा देवी के जन्म स्थान मुराई का बाग, डलमऊ, रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जायेगा। आकांक्षा यादव को यह सम्मान अनवरत साहित्य सेवा एवं अपनी रचनाओं में नारी सशक्तीकरण पर प्रमुखता से लिखने के लिए प्रदान किया जायेगा। आकांक्षा यादव इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं। श्री यादव भी हिंदी की युवा पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उक्त जानकारी निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली के संयोजक श्री राम निवास पंथी ने दी।
 
     गौरतलब है कि आकांक्षा यादव एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लाॅगिंग से अनवरत जुड़ी हुई हैं। आकांक्षा यादव की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। आकांक्षा यादव की 2 कृतियाँ ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” प्रकाशित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ इंटरनेट पर भी सक्रिय आकांक्षा यादव की रचनाएँ तमाम वेब/ई-पत्रिकाओं, सोशल मीडिया और ब्लॉगों पर भी पढ़ी-देखी जा सकती हैं। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव की रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है।
 
इससे पूर्व भी आकांक्षा यादव को विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान”, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘ व ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं ।
 
संपर्क
रत्नेश कुमार मौर्या
संयोजक – ’शब्द साहित्य’
द्वारा – विनीत टन्डन,
908 ए, दरियाबाद, इलाहाबाद – 211003

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बेटियों के सुखद भविष्य के लिए डाकघरों में आरंभ हुई सुकन्या समृद्धि योजना:

योजना से संबंधित तथ्य

4 दिसंबर, 2014 में सरकार ने छोटी बचत को प्रोत्साहन देने के लिए बालिकाओं की विशेष जमा योजना ‘सुकन्या समृद्धि खाता’ का शुभारंभ किया।
3 दिसंबर, 2014 को सुकन्या समृद्धि खाता नियम-2014 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
सुकन्या समृद्धि खाता बालिका के माता-पिता या संरक्षक द्वारा बालिका के नाम से उसके जन्म लेने से दस वर्ष तक की आयु प्राप्त करने तक खोला जा सकेगा।
यदि कोई बालिका जिसने इस नियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष पहले दस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली थी वह भी खाता खोलने के लिए पात्र होगी।
जमाकर्ता बालिका के नाम से केवल एक ही खाता खोल और संचालित कर सकता है।
माता-पिता या संरक्षक केवल दो बालिकाओं के लिए खाता खोल सकते हैं, जुड़वा बच्चे के संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने पर तीसरा खाता खोलने की अनुमति दी जाएगी।
यह खाता एक हजार रुपये की प्रारंभिक जमा राशि से खोला जाएगा और एक वित्तीय वर्ष में इसमें न्यूनतम एक हजार और अधिकतम एक लाख पचास हजार रुपये जमा किए जा सकेंगे।
खाते में रकम खाता खोलने की तारीख से चौदह वर्ष पूर्ण होने तक जमा की जा सकेगी।
यदि खाते में न्यूनतम राशि जमा नहीं की गई है तो न्यूनतम जमा राशि सहित 50 रु. प्रतिवर्ष के जुर्माने के साथ खाते को नियमित कराया जा सकेगा।
ब्याज अधिसूचित की जाने वाली दर (वर्तमान में 9.1 प्रतिशत ) पर वार्षिक या मासिक देय होगा ।
खाता बालिका के दस वर्ष आयु पूर्ण करने तक माता-पिता द्वारा खोला और संचालित किया जाएगा।
बालिका के दस वर्ष आयु प्राप्त करने के पश्चात वह स्वयं खाता संचालित कर सकेगी।
खाता भारत वर्ष में कहीं भी अंतरित किया जा सकेगा।
खाते से जमा राशि के पचास प्रतिशत तक की राशि निकालने की अनुमति तब दी जाएगी जब बालिका अठ्ठारह वर्ष की हो जाएगी।
बालिका की मृत्यु होने पर संरक्षक द्वारा खाता बंद कर दिया जाएगा और राशि ब्याज सहित आहरित कर ली जाएगी।
खाता खोलने की तारीख से इक्कीस वर्ष पूर्ण होने पर खाता परिपक्व होगा।
यदि बालिका का विवाह 21 वर्ष अवधि पूर्ण होने से पहले होता है तो विवाह की तारीख के पश्चात खाते के चालन की अनुमति नहीं होगी।
खाता चालन बंद होने के पश्चात आहरण पर्ची द्वारा जमा राशि ब्याज सहित प्राप्त होगी।
संबंधित लिंक भी देखें…
http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2014/161918.pdf

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डीडी भारती पर खजुराहो महोत्सव का प्रसारण

डीडी भारती, भारतीय संगीत और कला का अनूठा चैनल है जोकि अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लाइव टेलिकास्ट करता है। इस साल डीडी भारती एक बार फिर अपने दर्शकों के लिए खजुराहो नृत्य महोत्सव का लाइव टेलीकास्ट करने जा रहा है। 20 से 26 फरवरी के दौरान दर्शक शाम 7 से 11 बजे तक इस महोत्सव का आनंद उठा सकेंगे।
 
खजुराहो नृत्य महोत्सव मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर में आयोजित किया जाता है। चंदेल राजाओं के बनवाए ये मंदिर अपने पाषाण शिल्प के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। भारतीय  शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों से मंदिर सजीव हो उठते हैं। इस महोत्सव में भारत के अनेक दिग्गज कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

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दिग्विजय कालेज के प्राध्यापकों ने सीखीं कम्प्यूटर की बारीकियां

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने एक विशेष अभिमुखीकरण कार्यशाला में कम्प्यूटर का प्रभावी प्रशिक्षण प्राप्त किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्वशासी महाविद्यालयों के लिए संचालित महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत हुई पखवाड़े भर की इस कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों और कम्प्यूटर शिक्षकों ने प्राध्यापकों को कम्प्यूटर के व्यावहारिक उपयोग के अनेक पहलुओं को भली भांति समझाया। कार्यशाला के उदघाटन अवसर पर मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं तकनीकी परिषद् के महानिदेशक प्रोफ़ेसर मुकुंद हम्बार्डे थे। अध्यक्षता डॉ.हेमलता मोहबे ने की। विशिष्ट अतिथि शासकीय कमलादेवी महिला महाविद्यालय,राजनांदगांव के प्राचार्य डॉ.राजेश पाण्डेय थे। समापन प्रसंग पर मुख्य अतिथि शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.सुमन सिंह बघेल थी। 

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह तथा कम्प्यूटर विभागाध्यक्ष डॉ.शबनम खान के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला का उदघाटन करते हुए प्रोफ़ेसर मुकुंद हम्बार्डे ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को समय की ज़रुरत बताते हुए कहा कि कम्यूटर एक सेवक की तरह है। उसके लिए कार्यों की सही जानकारी होने पर ही हम उसकी वास्तविक और अपेक्षित सेवा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने शोध कार्यों में कम्प्यूटर के उपयोग के तरीकों पर रोचक ढंग से प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहीं डॉ.हेमलता मोहबे ने अपने प्रेसेंटेशन में कम्प्यूटर की उपयोगिता के विविध पक्षों की जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि शासकीय कमलादेवी महिला महाविद्यालय,राजनांदगांव के प्राचार्य डॉ.राजेश पाण्डेय ने कहा कि बदलते युग और परिवेश में कम्प्यूटर हमारी ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्सा बन गया है। इसका ज्ञान हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। इससे दक्षता विकास भी होता है। इस दृष्टि से यह कार्यशाला विशेष महत्वपूर्ण है। प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह ने बताया कि भविष्य में सभी प्राध्यापकों, शिक्षकों के लिए कम्प्यूटर जानना अनिवार्य होगा ताकि कम्प्यूटर के अतिरिक्त कोर्स वे स्वयं पढ़ा सकें। इसलिए कम्प्यूटर सबको सीखना चाहिए। विभागाध्यक्ष डॉ.शबनम खान ने प्रशिक्षण से सम्बंधित विषयों की महत्ता प्रतिपादित की। 

महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला के दौरान अतिथि वक्ता सेंट थॉमस कालेज भिलाई के प्राध्यापक संतोषकुमार मिरी ने एम.एस.ऑफिस पर एकाग्र बहुआयामी जानकारी देकर प्राध्यापकों को लाभान्वित किया। जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्होंने कम्प्यूटर के उपयोग के कई अनछुए पहलुओं की बारीकियां समझायीं। इसी तरह व्याख्यानमाला की कड़ी में कम्प्यूटर शिक्षकों ने वर्ड,एक्सेल,पावर पाइंट, ई मेल बनाना, इंटरनेट सर्फिंग जैसे अनेक व्यावहारिक पक्षों की प्रायोगिक जानकारी दी। कोशिश यह रही कि समय सीमा के भीतर सभी प्रशिक्षु कम्प्यूटर की उपयोगिता से ज्यादा से ज्यादा रूबरू हो सकें, जिससे उसे बेहतर जानने की ललक भी पैदा हो सके। डॉ.शंकर मुनि राय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम से अर्जित ज्ञान और उसके उपयोग पर आमने अनुभव साझा किये। 

कार्यशाला के समापन प्रसंग पर मुख्य अतिथि शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.सुमन सिंह बघेल ने प्रशिक्षणार्थी प्राध्यापकों को प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण में प्रयुक्त सामग्री प्रदान की। प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों को भी प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ.शबनम खान ने सबके सहयोग का आभार माना। 

संपर्क
डॉ.चन्द्रकुमार जैन 
प्राध्यापक 
शासकीय दिग्विजय स्वशासी 
स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़ )

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पाकिस्तानी हिन्दू महिलाओं को मंगलसूत्र नहीं शादी का प्रमाणपत्र चाहिए!

पाकिस्तान में हिंदू विवाह को क़ानूनी तौर पर कुबूला नहीं गया है, जिसकी वजह से निचले तबके के लोग प्रभावित होते हैं. पिछले साल सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद इस मुद्दे के समाधान के लिए एक विस्तृत विधेयक नेशनल असेंबली में लाए थे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दो बार विधेयक पारित करने के आदेश के बावजूद इसे कैबिनेट की मंज़ूरी नहीं मिली.
 
ताराचंद पाकिस्तानी हैदराबाद की एक हिंदू बस्ती में रहते हैं. वह बस्ती के दूसरे 40 परिवारों की तरह ही सब्जी और फल का ठेला लगाकर अपनी विधवा मां, पत्नी और सात बच्चों का पेट पालते हैं. ताराचंद की शादी 16 साल पहले हुई थी. उनकी पत्नी मीरा गले में मंगलसूत्र पहनती हैं और मांग में सिंदूर लगाती है. तारा का कहना है कि शादी के प्रमाणपत्र के बिना उनके रिश्ते का यही प्रमाण है.
 
उनका कहना है कि सरकार के हिसाब से हमारी शादी नहीं हुई. हमारी शादी तो हुई है पर अगर कोई मेरी पत्नी को उठा ले जाता है, या बच्चे का अपहरण हो जाता है तो मेरे पास दावे के लिए कोई प्रमाणपत्र नहीं है. तारा अपनी पत्नी मीरा के लिए पति के नाम वाला पहचान पत्र बनवाने की कोशिश कर रहे हैं पर उनके पास शादी की कोई तस्वीर नहीं है. मीरा का कहना है, "हमें अब पता चला है कि पहचान पत्र से वतन कार्ड मिलता है और इसके तहत बेनज़ीर इन्कम सपोर्ट प्रोग्राम से पैसे भी मिलते हैं. '
 
पाकिस्तान में हिंदू शादियों के लिए कोई विशेष क़ानूनी दस्तावेज़ मौजूद नहीं है.
 
हैदराबाद में पारिवारिक मामलों के एडवोकेट शावक राठौड़ ने बीबीसी को बताया कि उनकी बिरादरी कई साल से हिंदू विवाह के पंजीकरण की मांग कर रही है और यह समस्या कम्प्यूटरीकृत पहचान पत्र और इसका महत्व बढ़ने के बाद अधिक शुरू हुआ है.
 
ताराचंद ने कहा, "जब हम पहचान पत्र बनवाने जाते हैं तो वे कहते हैं निकाहनामा दिखाएं. फिर हम जब उन्हें बताते हैं कि हमारे यहां निकाहनामा नहीं, फेरे लिए जाते हैं तो वे कहते हैं कि हमें इससे कोई लेना-देना नहीं. अपने रीति-रिवाज अपनी जगह हमें तो प्रमाणपत्र चाहिए."
 
उन्होंने बताया कि जब किसी अदालत में घरेलू मामले जाते हैं जैसे कि जबरन शादियां, संपत्ति या तलाक के मामले तो उन्हें निपटाने में बहुत मुश्किल होती है.
 
अगर कोई महिला तलाक लेना चाहे तो न्यायाधीश हमसे पूछते हैं कि अगर कोई दस्तावेज़ मौजूद नहीं तो तलाक कैसे दिया जा सकता है?
हिंदू पंडितों या पंचायतों के पास शादी-ब्याह के दस्तावेज़ीकरण का अधिकार नहीं है.
पाकिस्तान में हिंदू जोड़े अपने रीति-रिवाज़ के अनुसार शादी तो कर लेते हैं पर राज्य उसे स्वीकार नहीं करता.
 
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के सदस्य डॉक्टर रमेश कुमार वानकोनिय ने पिछले साल हिंदू मैरिज एक्ट को एक निजी सदस्य के रूप में संसद में पेश किया.
डॉक्टर रमेश कहते हैं कि जैसे निकाह को सरकार की मान्यता मिली हुई है वैसे ही हिंदुओं के लिए भी होनी चाहिए.
 
हिंदू मैरिज एक्ट पर उनका कहना है, "इस क़ानून में शादी और तलाक का पूरा मसौदा है. मसलन कि पंडित या महाराज कैसा है? कितने फेरे होने चाहिए? क्या वह हमारे धर्म के हिसाब से शादी करवा रहे हैं? क्या ज़िला परिषद में पंजीकरण हुआ है या नहीं. हम भी इस देश के नागरिक हैं, हमें भी राज्य की ओर से ऐसी व्यवस्था चाहिए."
 
डॉक्टर रमेश का कहना है कि यह विधेयक संसदीय समिति और मंत्रिमंडल के पास है. इस विधेयक के अनुमोदन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो बार आदेश दिए हैं पर कोई प्रगति नहीं हुई. उनका कहना है, "मैंने यह प्रस्तावित विधेयक चारों प्रांतों को भी भेजा है और यह कैबिनेट के पास पिछले साल सितंबर से है. सुप्रीम कोर्ट ने तो उसे पारित करने के आदेश जारी किए हैं लेकिन किसी को भी इस विधेयक में रुचि नहीं है. मेरी गुज़ारिश है कि अगर प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और कैबिनेट के पास समय नहीं तो नेशनल असेंबली को इस विधेयक को मंज़ूरी दे देनी चाहिए."
 
पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है जिनमें से सबसे अधिक संख्या निचली जाति के हिंदुओं की है. उनके पास न सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने के पैसे हैं और न काम करने के लिए संबंध हैं. यह एक बड़ा मसला है क्योंकि इस क़ानून के अभाव में हिंदू अल्पसंख्यकों की पहचान अस्पष्ट रहेगी.
 
साभार- बीबीसी हिन्दी  http://www.bbc.co.uk/ से

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