Monday, June 17, 2024
spot_img
Homeजियो तो ऐसे जियोस्नेहलता शर्मा ने साहित्य, अभिनय और शिक्षा के क्षेत्र में बनाई पहचान

स्नेहलता शर्मा ने साहित्य, अभिनय और शिक्षा के क्षेत्र में बनाई पहचान

सीमा कपूर द्वारा निर्देशित टी.वी.सीरीयल ‘ एकलव्य ‘ में मां की भूमिका अभिनीत करने, हाड़ौती उत्सव में “गाथा हाड़ौती री” वृत्तचित्र “सलामे हिन्द” डॉक्यूमेंट्री का निर्माण व निर्देशन करने, आकाशवाणी केंद्र कोटा में नाटक के लिए स्वर परीक्षण में चयन और कोटा सहित, जयपुर,जवाहर कला केंद्र व रविन्द्र मंच, बिरला आडिटोरियम, उदयपुर -शिल्पग्राम, जोधपुर आदि के रंगमंचों पर नाटकों के माध्यम से अभिनय प्रदर्शन करने वाली रंगमंच की कलाकार स्नेहलता चड्ढा
एक मझी हुई कलाकार हैं। आपने राजस्थान नाटक संगीत अकादमी की ओर से आयोजित नाटक और लोकगीत गायन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कार प्राप्त किए। नाटक,अभिनय और कविता के शोक ने सर्वश्रेष्ठ उद्घोषिका और एंकरिंग का मार्ग प्रशस्त किया। इतना ही नहीं एन.एस.एस.और स्काउट गाइड संगठन में उत्कृष्ट सेवाओं के साथ जुड़ी आप एक सर्वश्रेष्ठ शिक्षक भी हैं।

आपको अभिनय का शोक कैसे लगा पूछने पर वे बताती हैं नाटक में उनकी रुचि विद्यार्थी जीवन से ही रही है । कॉलेज स्तर तक आते-आते यह शौक और बढ़ गया । वहां अपनी अभिनय कला का प्रदर्शन के लिए बड़ा मंच मिला। बहुत से नाटकों में अभिनय किया जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कार भी मिले ।कॉलेज के समय ही कोटा आकाशवाणी में महेंद्र मोदी मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। उन्होंने रेडियो नाटक के लिए स्वर परीक्षण हेतु आमंत्रित किया था। इन्होंने भी इसमें भाग लिया और सफलता प्राप्त की और आकाशवाणी केन्द्र से जुड़ने का मौका मिला। धीरे-धीरे ये महिला जगत ,बाल संसार ,साक्षात्कार और वार्ताकार के रूप में रेडियो से लगातार जुड़ती चली गई और एंकरिंग इनकी हॉबी बन गई । अब इन्हें अनेक विभागीय , प्रशासनिक व अन्य साहित्यिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उद्घोषिका के रूप में बुलाया जाने लगा ।

सार्वजनिक रंगमंच पर लाने का श्रेय आप सप्त श्रृंगार संस्था को देती हैं, जिससे जुड़े प्रसिद्ध वरिष्ठ रंगकर्मी स्व. राकेश उपाध्याय ,स्व. अरविंद शर्मा ,स्व. मनोज पाठक , अब्दुल सलाम एवं शरद तैलंग, बृजराज गौतम तथा डाॅ. गिरीश वर्मा के निर्देशन में अनेक नाटकों में राजस्थान में कई रंगमंचों पर अपने अभिनय की छाप छोड़ी।

श्री राकेश उपाध्याय जी द्वारा निर्देशित “समाजसेवी तबले” में ‘स्त्री ‘ श्री बृजराज गौतम निर्देशित “सदाचार का ताबीज” में भोलाराम की पत्नी तथा डाॅ. गिरीश वर्मा निर्देशित एड्स आधारित नाटक में मुख्य नायक की पत्नी, ‘जांच-पड़ताल ‘ नाटक जिसका निर्देशन श्री अब्दुल सलाम जी ने किया में भी मुख्य भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त ‘एक और द्रोणाचार्य ‘, जिसका निर्देशन स्व् श्री अरविन्द शर्मा जी ने किया, में भी प्रोफेसर की पत्नी की मुख्य भूमिका निभाई।

एक रोचक प्रसंग सुनाते हुए इन्होंने बताया कि कॉलेज का वार्षिक उत्सव चल रहा था। हम -‘कलिंग विजय ‘ नाटक का मंचन कर रहे थे। उसमें ये सम्राट अशोक की भूमिका अभिनीत कर रही थी और एक पात्र संघमित्रा का था । नाटक के दौरान संघमित्रा का रोल अदा कर रही छात्रा अपने संवाद भूल गई ! स्थिति गंभीर हो गई ,नाटक आगे नहीं बढ़ पा रहा था । अचानक मैंने जोर से चिल्लाकर संघमित्रा को डांटा और कहा,” चली जाओ यहां से, तुम कोई काम नहीं कर सकती !”नाटक तो संभल गया लेकिन हमारी हिंदी की व्याख्याता हंसते-हंसते लोटपोट हो गई क्योंकि उन्हें पता था कि यह नाटक का संवाद नहीं है । बाद में उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने उनको स्थिति स्पष्ट की ,कि संवाद भूलने से हमारा नाटक झूल गया था ,अतः मुझे ऐसा करना पड़ा । उन्होंने कहा नाटकों में जब कभी इसी स्थिति आ जाती है तो संभालना मुश्किल हो जाता है।

नाटक और अभिनय के साथ कविताओं के शोक ने इनकी हाड़ोती के साहित्य जगत में पहचान खास पहचान बनाई। इनकी कविता लेखन में ही मुख्यत: रुचि रही है। इनकी कविताएं और विभिन्न विषयों पर लेख पत्र – पत्रिकाओं और विभागीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। आपका एक काव्य संग्रह ‘सुनो पत्थरों के भीतर नदी बहती है ‘ प्रकाशित हुआ है। आपने अपने ससुर स्व. शिवप्रसाद शर्मा लिखित कविताओं का संकलन व संपादन कर प्रकाशित करवाया। उनका निधन इनके विवाह पूर्व ही हो गया था। उनकी रचनाएं इधर-उधर बिखरी मिलीं, जिन्हें एकत्र कर इन्होंने सहेजा और पुस्तक का रूप दिया। कविता प्रेम का यह एक उम्दा उदाहरण है।

आपने समाज को राह दिखाने वाली करीब 200 कविताएं अब तक लिखी हैं। आपकी जीवन संघर्ष पर आधारित कविता की बानगी कुछ इस प्रकार है…….
जीवन का संघर्ष अकेले लड़ना है
ढ़ूंढो ना अवलंब, अकेले बढ़ना है!
कंटक -पथ पर चलने से क्यों डरते हो?
निर्भय होओ इतने कि भय को डरना है!
संग कभी परछाई भी ना चल पाती,
भ्रम ना पालो ,साथ किसी को चलना है!
राहों में बारूद बिछाए जाएंगे,
कदम संभल के, हौले -हौले धरना है!
माना मंज़िल दूर बहुत अंधेरा है,
बुझते -बुझते मन का दीपक जलना है!

“देश के महान समाज सेवी डॉ.एस. एन. सुब्बाराव जी आपके प्रारेणा श्रोत हैं। उनके साथ 21से 26 मई 2003 तक सद्भावना,श्रम संस्कार एवं अकाल राहत शिविर के आयोजन में राष्ट्रीय समाज सेवा योजना की छात्राओं के साथ पहली बार मुलाकात हुई। उनकी सरलता,सादगी, सेवा और समर्पण तथा राष्ट्रवादी विचारधारा ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इसके बाद जब भी उनका कोटा आना होता, उनके हर कार्यक्रम में अधिकाधिक सहभागिता करके आत्मिक प्रसन्नता मिलती थी। एक महत्वपूर्ण अवसर 22 से 28अप्रेल 2013 तक युवा महोत्सव के दौरान मिला। उनके द्वारा दिया गया प्रशस्ति पत्र मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।

शिक्षिका बनने पर आप 1990 में स्काउट गाइड संगठन जुड़ी। इस संस्था के अनुशासन, सेवा -समर्पण, कर्त्तव्य परायणता, और सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा ने इन्हें बहुत प्रभावित किया । ये इस संगठन की आजीवन सदस्य हैं। विविध प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों सहित राष्ट्रीय जम्बूरी में दल के नेतृत्व का सम्मान प्राप्त कर चुकी हूं। विद्यार्थियों को आदर्श नागरिक बनाने में स्काउट गाइड अहम भूमिका निभा रहा है, अतः अभिभावकों व शिक्षकों को अधिकाधिक बच्चों को स्काउट गाइड से जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। आपने राष्ट्रीय जम्बूरी रोहट,पाली में 1से 12 जनवरी 2023 गाईड विंग कोटा की दल प्रभारी के रूप में सहभागिता की है। सेवानिवृत्ति के बाद भी इस संगठन से जुड़े रहने की इनकी इच्छा है।
अब तक की अपने शिक्षा सेवा यात्रा के दौरान
पढ़ने -लिखने के शौक ने विविध गतिविधियों यथा पत्रवाचन, सेमिनार रीडिंग, निबन्ध -भाषण, कहानी कविता गीत लेखन वाचन प्रतियोगिताओं में भाग लेने को प्रेरित किया।

अभिनय, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में आपको कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त करने का गौरव हासिल हुआ। जे.डी.बी. गर्ल्स कॉलेज, कोटा द्वारा 1986 में आपको सर्वश्रेष्ठ छात्रा तथा सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय समाज सेवा एनएसएस स्वयंसेवी छात्रा पुरस्कार से नवाजा गया। जिला प्रशासन झालावाड़ द्वारा 2017 में एवं कोटा द्वारा 2000 में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। भास्कर वूमन ऑफ द ईयर पुरस्कार 2010 में प्राप्त हुआ।
राज्य व राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र लेखन, वाद-विवाद , कविता,गीत गायन तथा खेलकूद प्रतियोगिताओं में लगातार मिलते रहे हैं। शिक्षिका के रूप में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर राजस्थान द्वारा तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान राजस्थान द्वारा आयोजित पत्रवाचन व सेमिनार रीडिंग में लगातार भाग लेकर पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र प्राप्त किये।

राज्यस्तरीय शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागी होकर अनेक बार सम्मानित किया गया। शिक्षा विभाग की ओर से 2011-12 में जिला स्तर पर एवम् 2012-13 में राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय रामावि कोटड़ी गोरधनपुरा , कोटा की संस्था प्रधान के रूप में सम्मानित किया गया। पुनः 2021मे महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल,कैथून, कोटा का चयन ब्लॉक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय के रूप में किया गया।

सन 2007 में पुणे में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा नीति पर आयोज्य कार्यशाला हेतु चयन किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, शत-प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम तथा समाज सेवा गतिविधियों में योगदान हेतु एवं सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निर्वहन हेतु आपको अनेक संस्थाओं लायंस क्लब, रोटरी क्लब, इनरव्हील क्लब, समर्पण बहुउद्देशीय संस्था, आर्य समाज,
काव्य कलश, सृजन ओ तखलीक,समरस संस्थान,सप्त श्रृंगार, रंग सप्तक कला मंदिर, सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा, कर्मयोगी सेवा संस्थान, शिखर स्पेशल स्कूल,आयाम, अकलंक शोध संस्थान, भारतेन्दु समिति सहित राजस्थान पत्रिका आदि द्वारा सम्मानित किया गया। खेलकूद गतिविधियों में ना केवल विद्यार्थी जीवन में अपितु शिक्षक जीवन में भी राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किए।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी स्नेहलता चड्ढा
का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर में 4 अगस्त 1967 को पिता स्व. गोपाल कृष्ण चड्ढा एवं माता स्व. सीता रानी चड्ढा के परिवार में तीसरी संतान के रूप में हुआ। एक भाई व बहन इनसे बड़े और दो भाई छोटे हैं। कोई ढ़ाई वर्ष की रही होंगी जब इनके पिता इन्दौर से कोटा पत्थर का व्यवसाय करने के लिए आ गए और यहीं बसे गए । यहां पिता का काम अच्छा चलने लगा परंतु जब ये 8 वर्ष की थी तब 1975 में अचानक विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा और एक दुर्घटना में पिता की मृत्यु हो जाने से उनका साया सर से उठ गया। यहीं से जीवन का संघर्ष शुरू हो गया। इन्होंने अपनी मम्मी के साथ सिलाई-कढ़ाई का काम किया। जैसे – तैसे स्नातक शिक्षा पूरी की। निजी विद्यालय में और घर पर शिक्षण कार्य किया। आपने1990 में बारां जिले में अध्यापिका के साथ शिक्षा विभाग में राजकीय सेवा शुरू की। स्वयंपाठी छात्रा के रूप में अध्ययन ज़ारी रखा।

आपने अर्थशास्त्र,राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी में स्नातकोत्तर एवं एम. एड.की उपाधि प्राप्त की और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग्य आजमाती रही। वर्ष 1994 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से व्याख्याता अंग्रेजी पद पर चयनित होकर चेचट में लगभग दो वर्ष रही। इसी दौरान अगस्त 1995 में पीयूष शर्मा से विवाह हो गया। इसके पश्चात आप महारानी स्कूल रामपुरा, कोटा में व्याख्याता अंग्रेजी के रूप में अपनी सेवाएं दी। राजस्थान लोक सेवा आयोग से 2004 में प्रधानाध्यापिका पद पर चयनित होकर कोलूखेड़ा, बारां में लगभग दो वर्ष तक सेवाएं दीं। आपको 2013 में पर अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक पद पर पदोन्नति मिली, फ़रवरी 2019 में साक्षात्कार से चयनित होकर सहायक निदेशक पद पर पदोन्नति मिली । राष्ट्रीय कला उत्सव देहली 2015 शिक्षा विभाग की ओर से राजस्थान की प्रभारी के रूप में भाग लिया।

आपने अनेक विद्यालयों में प्रधानाचार्य पद पर कार्य किया और वर्तमान में कोटा जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बोरदा इटावा कोटा में प्रधानाचार्या के पद पर सेवारत हैं। संपर्क मोबाइल : 9602943772
———-
डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार