Tuesday, June 18, 2024
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टुकड़े टुकड़े पाकिस्तान / १४

(जाने माने इतिहास लेखक व राजनीतिक चिंतक प्रशांत पोळ ने भारत विभाजन के दौर की घटनाओँ पर जबर्दस्त शोध किया है और पाकिस्तान बनने और उसके बाद के घटनाक्रमों पर कई ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाएं हैं , उनके इस अभिनव कार्य की चौदहवीं कड़ी में प्रस्तुत है कैसे पाकिस्तान चीन और अमरीका के मकड़जाल में फँसकर आज आर्थिक रूप से कंगाल हुआ ही हैं, साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी लाचार हो गया है.* कुछ वर्ष पहले तक तो पाकिस्तान हमेशा युद्ध करने की गर्जना करता था. किंतु अब नही. अब तो एक दिन का युद्ध झेलने की भी उसकी क्षमता नहीं बची है)

आज जब सारा भारत वर्ष विभाजन की कटू स्मृतियों का स्मरण करते हुए *विभाजन विभिषिका दिवस* मना रहा हैं, तब पाकिस्तान अपने स्थापना की ७६ वी वर्षगाठ मना रहा हैं. इन दोनो का गहरा संबंध है, क्योंकि *पाकिस्तान बना ही पंधरा लाख लोगों की लाशों पर है! मुस्लिम नेताओं द्वारा अलग से इस्लामी देश का अत्याग्रह, भारत को विभाजन तक ले गया था.*

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*’हंस के लिया है पाकिस्तान, लड के लेंगे हिंदुस्तान’ से लेकर तो ‘दे दाता के नाम तुझको अल्ला रख्खे’, गाते – गाते हर एक देश की दहलीज पर भीख का कटोरा लेकर जाना, यह पाकिस्तान का प्रवास है. यह ७६ वर्ष का प्रवास याने टूट फूट का, अमेरिकी / चिनी टुकडोंपर पलने का और भारत के प्रतिशोध का प्रवास है.* इस पूरे प्रवास में पाकिस्तान कभी पूर्ण रूप से लोकतंत्रिक देश रहा ही नही है. अनेक दशक तो प्रत्यक्ष रूप से सेना का शासन रहा. (१९५८ से १९७१, फिर १९७७ से १९८८, फिर १९९९ से २००८). बाकी समय सेना का अप्रत्यक्ष नियंत्रण प्रशासन पर रहता है. अभी इमरान खान के मामले मे पूरे विश्व ने देखा ही है. पाकिस्तान के पांच प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पुरा करने के बाद, या तो मुकदमोंसे झुजते रहे, जेल गये या फांसी पर लटका दिये गए.

*पाकिस्तान की आधारशिला ही इस्लाम है. इस्लाम और लोकतंत्र यह शब्द साथ – साथ नही चल सकते.* इंडोनेशिया जैसे कुछ नाम अपवाद के स्वरूप में हम गिना सकते है. किंतु इस्लामी देशों में लोकतंत्र नही चलता, यह कटू सत्य है.

*पाकिस्तान आज पूरा खोखला हो चुका है. इस देश का आर्थिक प्रबंधन याने ‘भीक का कटोरा लेकर वैश्विक संस्थाने और अलग – अलग देशों में घुमना’, इतना ही बचा है. लिये हुए कर्ज की किश्त चुकाना, यही एक सबसे बडी चुनौती आज पाकिस्तान के सामने है.* अभी जून २०२३ तक पाकिस्तान पर 72.97 ट्रिलियन रुपये, (अर्थात 140 बिलियन अमेरिकन डॉलर्स) का कर्जा है. यह कर्जा पाकिस्तान की जीडीपी का 93 प्रतिशत है. इसका अर्थ है, पाकिस्तान को इस कर्जे से बाहर आना करीब – करीब असंभव है. यह इसलिये भी क्योंकि पाकिस्तान पूर्णतः आयात की नीति पर निर्भर है. आज पाकिस्तान में स्टेपलर की पिन भी नही बनती.

*पाकिस्तान की निर्यात तीन ‘च’ पर आधारित है – चमडा, चादर और चावल!* पाकिस्तान बडी संख्या मे पशुओंको और मृत पशु के चमडे को निर्यात करता है. चादर, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के अंतर्गत आता है. लेकिन केवल चादर या कुछ मात्रा मे गलीचे… बस, इतनीही पाकिस्तान के बस की बात हैं. जिनको लेकर विश्व के बाजार मे महत्व है और किमत भी मिलती हैं, ऐसे कपडे पाकिस्तान मे नही बनते. ये बनते हे बांगलादेश मे, भारत मे. युरोप, अमेरिका.. कही पे भी जाए, सिले हुए कपडो मे अधिकतम या तो ‘मेड इन बांगलादेश’ मिलेगा या ‘मेड इन इंडिया’. पाकिस्तान कुछ अंशो मे चावल का निर्यात करता हैं, जो खाडी के देशों में जाता है. दक्षिण पूर्व के देश और लॅटिन अमेरिका मे पाकिस्तानी चावल पसंद नही किये जाते.

अमेरिका से सतत मिलती हुई मदत के कारण तथा आयात नीति मे अनेकोंके हित गुंथे होने के कारण, पाकिस्तानने कभी उत्पादन पर ध्यानही नही दिया. आज पाकिस्तान में कोई मॅन्युफॅक्चरिंग बेस नही है. और इसी कारण से पाकिस्तान को इस आर्थिक संकट से उभरने की कोई उम्मीद नही दिखती.

कैसर बंगाली यह पाकिस्तान के जाने माने अर्थशास्त्री है. लगभग ४० वर्ष का उनका अनुभव है. अमेरिका के बोस्टन युनिव्हर्सिटी से उन्होने अर्थशास्त्र मे मास्टर्स किया है. पाकिस्तान की अनेक संस्थाओं के और कुछ मुख्यमंत्रियों के आर्थिक सलाहकार रह चुके है. इनका एक विडिओ अभी भारत मे काफी वायरल हुआ है. शनिवार, १५ जुलाई को कराची में, ‘पाकिस्तान इन्स्टिट्यूट ऑफ इंटरनॅशनल अफेयर्स’ (पी आय आय ए) ने एक सेमिनार का आयोजन किया था. विषय था, ‘द स्टेट ऑफ पाकिस्तान इकॉनोमी : व्हॉट नेक्स्ट?’. *इस सेमिनार में, अपने पहले की वक्ता, डॉक्टर मासुमा हसन के प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, “देअर इज नो नेक्स्ट”. अर्थात पाकिस्तान का भविष्यही नही हैं..!*

*अपने भाषण मे पाकिस्तान की वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कैसर बंगाली ने कहा की “जल्दी ही हम लोग चिनी, सौदी, इमिराती और अन्य देशों के नोकर हो जाएंगे, कारण ये लोग पाकिस्तान के मालिक हो जाएंगे. अब अमेरिका को हमारी जरूरत नही है. उनके दृष्टी मे भारत ज्यादा महत्त्वपूर्ण है. इसलिये उन्होने हमारे सामने टुकड़े फेकना बंद कर दिया हैं”.*

*आज पाकिस्तान आर्थिक रूप से कंगाल हुआ ही हैं, साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी लाचार हो गया है.* कुछ वर्ष पहले तक तो पाकिस्तान हमेशा युद्ध करने की गर्जना करता था. किंतु अब नही. अब तो एक दिन का युद्ध झेलने की भी उसकी क्षमता नही बची है.

इन बातों का परिणाम सभी क्षेत्र में हो रहा है. बेरोजगारी जबरदस्त बढी है. अपराधोंमे अत्याधिक उछाल आया है. न्याय व्यवस्था अत्यंत लचर है. पाकिस्तान में ‘अल्पसंख्यांकोंके अधिकार’ नाम की कोई चीज दिखती ही नही हैं. विभाजन के समय पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान मिलाकर २४% से ज्यादा हिंदू थे. आज जो पाकिस्तान बचा है (अर्थात पहले का पश्चिमी पाकिस्तान) मे १% से भी कम हिंदू बचे हुए है. इनमे से अधिकतर सिंध प्रांत में है. *यह सभी हिन्दू अत्यंत असुरक्षित है. इनकी कोई सुनवाई नही है. हिंदूंओंकी बहू – बेटीयों को उठाकर लेकर जाना, यह आम बात हो गई है. आये दिन ऐसे समाचार सुनने मिलते है. ऐसी कितनी घटनाएं हैं, जो समाचारपत्रों तक भी पहुंच नहीं पाती हैं. दुर्भाग्य से ‘आंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ भी पाकिस्तान की इन घटना पर न तो संज्ञान लेता हैं, और न ही शिकायतें सुनता हैं.*

पाकिस्तान मे अलगाववाद अपने चरम पर है. पंजाब को छोडकर लगभग सभी राज्य पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र देश के रूप मे खडा होना चाहते है. सिंध प्रांत में ‘जीये सिंध’ आंदोलन बीच मे कमजोर पड गया था. अब उसमे भी उछाल आ रहा है. ‘सिंधू देश आंदोलन’ के नाम पर इसमे नवयुवक जुड रहे है. प्रति वर्ष जी एम सय्यद की स्मृति में, ‘पृथक सिंधू देश रॅली’ आयोजित की जाती है, जिसकी संख्या मे बढोतरी हो रही है.

*पाकिस्तान के लोग इस समय संभ्रम मे है. कन्फ्युज्ड है. वह इतिहास को नकार भी नही सकते और स्वीकार भी!* कभी उनको पाणिनी उनका पूर्वज लगता है, तो कभी तक्षशिला को अपना गौरव बताते है. किंतु मुल्ला – मौलवी का विरोध होते ही उसे नकार देते है. वे पाकिस्तान को राष्ट्र बनाना चाहते थे, लेकिन *देश और राष्ट्र मे अंतर है. देश यह भौगोलिक सीमा रेखा और आंतरिक प्रशासन से बनता है. किंतु इतने मात्र से उसमे राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत नही होता. राष्ट्र के लिए सांस्कृतिक विरासत यह घटक (फॅक्टर) नितांत आवश्यक है. पाकिस्तान के लिए वही समस्या है.*

*जिन्होने लाहौर बसाया ऐसे श्रीराम के पुत्र लव, जिनके नाम पर रावलपिंडी बना ऐसे महापराक्रमी बप्पा रावल, आद्य व्याकरणकार पाणिनी, विश्व का सबसे पहिला विश्वविद्यालय तक्षशिला, पराक्रमी राजा दाहीर… यह सब पाकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत है. किंतु पाकिस्तान उसे मानता नही. मान सकता नही. कारण इसे अगर विरासत कहेंगे तो अलग से इस्लामी देश की थ्योअरी ही फेल हो जाती है.*

*अलग से इस्लामी देश बनाने की चाहत मे पाकिस्तान बना. इसका आधार ही इस्लाम था. लेकिन ७६ वर्षों मे पाकिस्तान ने क्या किया? इस्लाम के अनुयायीयोंको ही समाप्त किया.* १९७१ मे तत्कालीन ईस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तानी फौजों ने लगभग तीस लाख बांगला भाषिक लोगो को मौत के घाट उतारा. नृशंसता से मारा. इनमे से बीस / बाईस लाख हिंदू थे. लेकिन बाकी बचे हुए तो मुस्लिम ही तो थे ना? बलोचिस्तान में जो मारे जा रहे है वे सभी मुस्लिम है. यही हाल खैबर पख्तुनख्वा का, सिंध का, गिलगिट का…….सभी स्थानो का है.

फिर इस्लामी देश का क्या अर्थ रहा?

*इस्लाम यह किसी देश के बनने का आधार हो ही नही सकता. अर्थात पाकिस्तान बना वही गलत आधार पर. पाकिस्तान का बनना ही गलत था. इसलिये एक देश के नाते, पाकिस्तान का लंबी दूरी तक चलना संभव ही नही है.*

और आज जब पाकिस्तान failed state (विफल राज्य) हो गया है, कंगाली की कगार पर खडा है, और दुसरी ओर भारत बुलंदियों को छू रहा हैं, तब पाकिस्तान की जनता मुखर हो कर पूंछ रही हैं…
*‘हमारे पुरखो ने विभाजन किया ही क्यों?’*
(समाप्त)
– प्रशांत पोळ

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