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व्यंग्य
 

  • भारत माता की जय ….

    भारत माता की जय ….

    जब सवाल देशभक्ति का हो तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. हम जिस देश में रहें और उसके प्राचीन सामन्ती विचारों की कोई कदर न करें और उसके प्रति निष्ठा न रखें ये कहाँ की बात हुई.

  • पानी नहीं है तो क्या, कोका कोला पीजिये !

    पानी नहीं है तो क्या, कोका कोला पीजिये !

    देखो भाई बात एकदम साफ है, क्रिकेट ज्यादा जरूरी है या खेती-किसानी? जाहिर है क्रिकेट ही ज्यादा जरूरी है क्योंकि ये तो राष्ट्रीय महत्व का खेल बन चुका है जो हमारे देश की आन बान शान है.

  • पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं

    पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं

    पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं गिरा जो इतनी आफत कर रखी है. रोज ही तो दुर्घटनाएं होती हैं. अब सबका रोना रोने लगे तो हो गया देश का विकास.

  • घोड़े की टांग पे, जो मारा हथौड़ा

    बचपन में गाय पर निबन्ध लिखा था. दो बिल्ली के झगड़े में बन्दर का न्याय देखा था. गुलजार का लिखा गीत ‘काठी का घोड़ा, घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा’ भी मिलजुलकर खूब गाया था.

  • मूर्खता बड़ी कि होशियारीः एक संक्षिप्त शोध प्रबंध

    मूर्खता बड़ी कि होशियारीः एक संक्षिप्त शोध प्रबंध

    मूर्खता बहुत चिंतन नहीं माँगती। थोड़ा-सा कर लो, यही बहुत है। न भी करो तो चलता है। तो फिर मैं क्यों कर रहा हूँ? यों ही मूर्खतावश तो करने नहीं बैठ गया? नहीं साहब। हमसे बाकायदा कहा गया है कि करके दीजिए। इसीलिए कर रहे हैं। संपादक ने तो यहाँ तक कहा कि यह काम आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता और मूर्खता की बात चलते ही सबसे पहले आपका ही खयाल आया था।

  • डाककर्मी के पुत्र मुंशी प्रेमचंद ने लिखी साहित्य की नई इबारत – कृष्ण कुमार यादव

    हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था।  पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय में प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित एक समारोह में उक्त उद्गार  राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र के […]

  • आजादी के बाद इस देश में सिर्फक्रिकेट का ‘ विकास’ हुआ है …!!

     नो डाउट अबाउट दिस … की तर्ज पर दावे के साथ कह सकता हूं कि अपना देश विडंबनाओं से घिरा है। हम भारतवंशी एक ओर तो विकास – विकास का राग अलाप कर राजनेता से लेकर अफसरशाही तक की नींद हराम करते हैं लेकिन जब सचमुच किसी क्षेत्र का विकास होने लगता है तो इसमें […]

  • व्यापक… व्यापमं….!!

     व्यापमं….। पहली बार जब यह शब्द सुना तो न मुझे इसका मतलब समझ में  आया और न मैने इसकी कोई  जरूरत ही समझी। लेकिन मुझे यह अंदाजा बखूबी लग गया कि इसका ताल्लुक जरूर किसी व्यापक दायरे वाली चीज से होगा। मौत पर मौतें होती रही, लेकिन तब भी मैं उदासीन बना रहा। क्योंकि एक […]

  • एक कुत्ते की डायरी

    शुनिचैव श्‍वापाके च पंडित: समदर्शिन:। (गीता) मेरा नाम 'टाइगर' है, गो शक्‍ल-सूरत और रंग-रूप में मेरा किसी भी शेर या 'सिंह' से कोई साम्‍य नहीं। मैं दानवीर लाला अमुक-अमुक का प्रिय सेवक हूँ; यद्यपि वे मुझे प्रेम से कभी-कभी थपथपाते हुए अपना मित्र और प्रियतम भी कह देते हैं। वैसे मैं किस लायक हूँ? मतलब […]

  • ‘सेवा ‘ में करियर…!!

    साइकिल – घड़ी और रेडियो। यदि एेसी चीजें सात फेरे लेने जा रहे दुल्हे की खिदमत में पेश की जाती थी, तो आप सोच सकते हैं कि वह जमाना कितना वैकवर्ड रहा होगा। तब की पीढ़ी के लिए करियर का मतलब साइकिल के पीछे लगे उस सहायक उपकरण  से था, जिस पर बैठा कर वह […]

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