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‘जहाजी’ के दाग को ‘भारतीयता’ की चमक में बदल दिया मुट्ठी भर लोगों ने

कैरीबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीयता को जिंदा रखने वाले बुजुर्गों के लिए आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब भारतीय उच्चायोग के अधिकारी उन्हें ढूंढ कर उनके घर पर उनका सम्मान करने पहुंचे। अधिकांशतः पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से करीब डेढ़ सौ साल पहले वहां ले जाए गए लोगों की दूसरी – तीसरी पीढ़ी के 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों का यह अनूठा सम्मान दिलों को जोड़ने का जरिया बन गया। मजदूरी के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो ले जाए गए भारतीयों को वहां कभी ‘जहाजी’ कहकर पुकारा जाता था। उनके हिस्से न पढ़ाई-लिखाई आई और न ही सभ्य बनने की कोई सुविधा। लेकिन मेहनत उनकी रगों में ऐसी दौड़ी कि तीसरी पीढ़ी बीतते इस वेस्टइंडियन देश में उनकी करीब आधी आबादी है। इनमें 100 से ज्यादा ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने ‘जहाजी’ के दाग को ‘भारतीयता’ की चमक में बदल दिया है।

90 साल से 105 साल की उम्र के इन बुजुर्गों ने अपने समाज और नई पीढ़ी को ऐसे संस्कार दिए हैं जो उनकी पहचान बन गए हैं। उनसे परिचय पूछिए तो खुद को सिर्फ भारतीय बताते हैं। एक उदाहरण नोबेल पुरस्कार विजेता विद्या एस नॉयपाल का है। उनके बाबा कपिलदेव गोरखपुर से त्रिनिदाद गए थे। उनकी याद को संजोने के लिए नॉयपाल ने अपना घर उत्तर भारतीय रंग में रंगा है। इस घर का नाम भी रखा गया है ‘हनुमान हाउस।’


ऐसे तलाशे गए भारतीयता के ये संरक्षक

त्रिनिदाद में सन् 1845 के आसपास भेजे गए इन ‘जहाजी’ मजदूरों ने कैसे भारतीयता को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया और कैसे संरक्षित किया, इसे पता लगाने का काम अनोखे तरीके से किया है पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत के उच्चायुक्त विश्वदीप डे ने। उन्होंने इन ‘जहाजी’ भारतीयों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के 90 साल और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की तलाश की। ऐसे करीब 110 बुजुर्गों का पता उन्होंने लगा लिया। इनमें से करीब 55 से वे खुद और उनके साथी अफसर मिलने गए। उच्चायुक्त यह देखकर हैरान रह गए कि कड़ी मेहनत और तमाम दुश्वारियों के बावजूद इन बुजुर्गों ने खुद तो भारतीयता को संजोया है, अगली पीढ़ी को भी पूर्वजों के संस्कार दिए हैं।

उच्चायुक्त ने सम्मान में आयोजित किया ‘बुजुर्गों का जश्न’

जिन भारतीयों ने अपनी मेहनत और लगन से त्रिनिदाद और टोबैगो को संवारा, उन बुजुर्गों का पोर्ट ऑफ स्पेन में बीते दिवस अलग अंदाज में सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम को नाम दिया गया ‘बुजुर्गों का जश्न।’ त्रिनिदाद में भारत के उच्चायुक्त बिश्वदीप डे ने जानकारी दी है कि इस आयोजन में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से वहां गए 90 से 105 साल की उम्र के 38 बुजुर्गों को शानदार शॉल देकर सम्मानित किया गया।

भारत से गए मजदूरों की दूसरी-तीसरी पीढ़ी के इन बुजुर्गों की आंखें भर आईं जब उन्हें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से व्यक्तिगत रूप से लिखे गए प्रशस्ति पत्र सौंपे गए। भारतीय मूल के बुजुर्गों के योगदान को सम्मानित करने के लिए त्रिनिदाद की बड़ी हस्तियां मंच पर मौजूद रहीं। सनातन धर्म महासभा के महासचिव सतनारायन महाराज, नूर इस्लाम मस्जिद के इमाम शराज अली, मंत्री डैनियल तीलुक सिंह और नेशनल काउंसिल ऑफ इडियन कल्चर के देवरूप तीमल ने भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया।

साभार- https://www.amarujala.com से



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