Tuesday, June 18, 2024
spot_img
Homeजियो तो ऐसे जियोगायन, वादन और वन्यजीव फोटोग्राफी से देवेन्द्र शर्मा को मिली पहचान

गायन, वादन और वन्यजीव फोटोग्राफी से देवेन्द्र शर्मा को मिली पहचान

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। कब क्या शोक लग जाए और उसी दिशा में अभ्यास करते – करते कोई प्रतिभा बन जाए। ऐसा ही हुआ एक रेलवे के इंजीनियर देवेंद्र कुमार शर्मा के साथ। संगीत का शोक लगा तो गायक बन गए और फोटोग्राफी का शोक लगा तो लंबी ट्रेकिंग के साथ ट्रेकर और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बन गए। दोनों ही क्षेत्रों में आज अपनी खास पहचान बनाई है। छिहत्तर वर्षीय सेवा निवृत शर्मा का यह शोक पूरी शिद्दत के साथ बरकरार है। अपनी रुचि को निरंतरता प्रदान करते हुए कैमरे लेकर कभी अकेले तो कभी समूह में जंगलों और जिन जलाशयों के पास पक्षी पर जाते हैं प्रति दिन तीन से चार घंटे ट्रेकिंग ,बर्ड वाचिंग और फोटोग्राफी में बिताते हैं।

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी का रुझान आप को सेवा निवृति के बाद 2017 में हुआ। वैसे फोटोग्राफी का शोक 1972 में शुरू हो गया जब इन्होंने पहली बार आगरा में अपने एक मित्र विष्णु अग्रवाल जो वहां पर्यटकों को घूमता था से एक कैमरा खरीदा था। आपने सीखने की दृष्टि से विभिन्न विद्वानों की लिखी फोटोग्राफी कला पर पुस्तकों का अध्ययन किया और उस समय रील को डेवलप करने और निगेटिव से फोटो बनाने की कला न केवल सीखी वरन इनका सामान ला कर घर पर ही फोटो स्वयं बनाने लगे। कुछ समय बाद जब अच्छा अभ्यास हो गया तब निकोन पी -900 कैमरा लिया जो और दो हजार मिमी जूम क्षमता का कैमरा था और आज इनके पास निकोन पी – 1000 तीन हजार जूम मिमी तक का उम्दा कैमरा है। इन्होंने एक स्लाइड प्रोजेक्टर भी जर्मनी से अपनी बहिन से मंगवाया।

फोटोग्राफी यात्रा के आगे की कहानी सुनाते हुए बताते हैं जब वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी करने लगे तो पक्षियों की जानकारी के लिए पक्षी विशेषज्ञ उमेश शर्मा अपने भतीजे को खींचे गए फोटो भेज कर जानकारी प्राप्त करते थे। उसकी सलाह पर आपने पक्षियों पर जानकारी देने वाली तीन चार विशेषज्ञ लेखकों की पुस्तकें खरीद कर उनका गूढ़ अध्ययन किया और स्वयं पक्षियों के नाम और उनके जीवन चक्र आदि की गहन जानकारी प्राप्त कर स्वयं ने भी इस क्षेत्र में विशेषज्ञता अर्जित की। आप अब अपने फोटोग्राफ्स विवरण के साथ सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं। आपने कई जगह समूह चित्रकला प्रदर्शनियों में भाग ले कर अपने फोटो प्रदर्शित किए। आप वाइल्ड लाइफ की चहल कदमी , अठखेलियों और आवाजों की इतनी जीवंत वीडियो बनाने में सिद्ध हस्त हो गए हैं की देखने वाले एक तक देखते ही रह जाएं। इन्होंने बर्ड फोटोग्राफी के लिए सोरसन , रावतभाटा ,घना, रणथंभौर, बीकानेर , नैनीताल, ताल छापर, गिर फोरेस्ट गुजरात सहित पूरे हाड़ोती का भ्रमण किया । आपके पास करीब 270 वाइल्ड लाइफ फोटो का एक अच्छा संग्रह है।

रोचक प्रसंग
एक बार का वाकिया है आप गेपरनाथ के जंगलों में भटक गए। मोबाइल से कोटा मित्रों को सूचना करी तो उसके बाद मोबाइल भी डिसचार्ज हो गया। चलते रहे कोई मंजिल नहीं मिली। जोर की प्यास लगी थी। तब ही एक साइकिल सवार नजर आया उसने रास्ता बताया और पानी पिला कर प्यास बुझाई। कहते हैं करीब 10 किमी जंगल में भटकने के बाद मुश्किल से रास्ते पर आए। एक वाकिया फरवरी 2020 का नैनीताल के पास हल्द्वानी घाटी का बताया, जब इनके कैमरे में 005 टैग लगा एक पक्षी आ गया । इन्होंने उसका फोटो को बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी को भेज दिया। उन्होंने इसका पता लगाने के लिए अपने काउंटर पार्ट ईरान और मंगोलिया को भेजा। करीब दो महीने में जवाब आया, मंगोलिया वालों ने बताया कि उन्होंने इस पक्षी स्टेप ईगल का टैग जर्मनी से मंगवा कर 2016 में लगाया था। रिसर्च करने वाले पक्षियों पर टैग और टांग पर चिप लगा देते हैं। बाद में मुंबई के राजू कसम्बे ने इनके साथ संयुक्त रूप से ” माइग्रेशन ऑफ ए टेग्ड स्टैंड ईगल फ्रॉम मंगोलिया तो उत्तराखंड,इंडिया” नामक एक
एक शोध पत्र लिखा जिसमें शर्मा जी के योगदान को भी रेखांकित किया गया।

गायन -वादन:
संगीत में रुचि की दास्तान सुनाते हुए बताते हैं बचपन से घर में संगीत का वातावरण था। पिता दिलरुबा वाद्य बजाते थे और माता जी धार्मिक भजन गाती थी। बड़ी बहन शास्त्रीय संगीत में पारंगत थी। उनके साथ तबले पर संगत के लिए आने वाले एक दिन बांसुरी भी साथ ले आए। यहीं से बांसुरी बजाने का शोक लग गया। गाने भी गाने लगे थे। स्टूडेंट लाइफ में सेवा काल में खूब गीत गाए और बांसुरी पर धुन बजाई। मुकेश के गीत विशेष रूप से प्रिय हैं। सेवा निवृति तक इन दोनों विधाओं में पारंगत हो गए और सेवा निवृति के बाद 2007 में यूट्यूब पर अपने दो चैनल्स शर्मा के देवेंद्र और कुक्कू डी. के. के नाम से बनाए। इन पर जब अपनी कला का प्रदर्शन किया तो हजारों लोगों से परिचय हो गए। पिछले दिनों कोटा में गायकों के एक समूह ने लगातार 26 घंटे गाने का गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 2019 में कोटा शहर के संगीत गायकों के समूह “संगीत सुधा” संस्था बनाई तो ये भी उससे जुड़ गए। इस समूह के द्वारा प्रति माह गायन का एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इनका गायन तथा बाँसुरी वादन बहुत ही उत्कृष्ट श्रेणी का है । बाँसुरी वादन के क्षेत्र में ये लगभग सभी प्रकार के गानों की धुने निकाल लेते हैं ।

पुरस्कार एवं सम्मान
आपको संगीत और वन्यजीव फोटोग्राफी में कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। संगीत के क्षेत्र में इंडिया बुक आफ रिकार्ड के मुख्य संपादक डॉ.विश्वस्वरूप राय चौधरी द्वारा निरंतर 26 घंटे समूह गायन के लिए 2 अप्रैल 2022 को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम 25 जनवरी 2022 को सांय 4.00 बजे से 26 जनवरी 2022 को सांय 6.00 बजे तक निरंतर 26 घंटे कोटा में आयोजित किया गया था। वन्यजीव फोटोग्राफी पर आपको स्ट्रेबो पिक्सल क्लब सात ताल ( नैनीताल ) द्वारा 14 से 16 फरवरी 2020 को आयोजित चतुर्थ ” गोल्डन एजर्स बर्ड फोटोग्राफी एग्जिबिशन 2002″ में आपको वन्यजीव फोटोग्राफी और संरक्षण के लिए सम्मानित किया गया। कोटा में 3 से 5 फरवरी 2023 तक आयोजित कोटा महोत्सव की फोटो प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए जिला कलेक्टर ओ.पी.बुनकर द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। हाड़ोती नेचुरल सोसाइटी द्वारा 2 अप्रैल 2022 को आयोजित सोरसन फोटोग्राफी प्रदर्शनी में भाग लेने पर सम्मानित किया गया। इन प्रमुख पुरस्कारों और सम्मान के साथ-साथ कोटा में आयोजित वन्यजीव सप्ताह 2019, 2021 और 2022 के दौरान आयोजित फोटो प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए तथा चंबल सांसद जल बिरादरी द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा चुका है। सेवा काल में भी आपको कई बार उत्कृष्ठ कार्यों के लिए मंडल रेल प्रबंधक और चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर द्वारा सम्मानित किया गया।

संगीत और वन्यजीव फोटोग्राफी प्रेमी देवेंद्र कुमार शर्मा का जन्म 8 जनवरी 1947 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में पिता स्व. बलदेव सहाय और माता स्व. सरस्वती देवी के परिवार में हुआ। आपके पिता भारतीय रेलवे में सेवा करते थे। आपकी समस्त शिक्षा आगरा में हुई । आपने 1968 में आगरा के टेक्निकल कॉलेज दयालबाग से इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा किया और 1969 में भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर इलेक्ट्रिकल समकक्ष पद पर सेवा में आ गए। आपकी प्रथम पोस्टिंग गुना ( मध्य प्रदेश ) में हुई। आपको सेवा काल के दौरान दो पदोन्नति मिली और विभिन्न स्थानों पर सेवा कर 2007 में सहायक इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के पद से कोटा से सेवा निवृत हो गए।
——-
डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा।

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार