Tuesday, June 25, 2024
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Homeजियो तो ऐसे जियोअपनी शोधपूर्ण पुस्तकों से इतिहास को जीवित करने वाले डॉ.हुकम चंद जैन

अपनी शोधपूर्ण पुस्तकों से इतिहास को जीवित करने वाले डॉ.हुकम चंद जैन

देश के अनेक इतिहासकारों में कोटा के इतिहासकार हुकम चंद जैन ऐसी शख्शियत हैं ,जिनकी इतिहास पर लिखी पुस्तकें न केवल संपूर्ण भारत में पढ़ी जाती हैं,वरन भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए और राजस्थान लोक सेवा आयोग की समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अनिवार्य रूप से उपयोगी और लोकप्रिय हैं। यही नहीं प्रामाणिक इतनी हैं कि किसी भी ऐतिहासिक विवाद में इनकी पुस्तकों को नजीर बनाया जा कर फैसले में उदृत किया जाता है। इनकी प्रत्येक पुस्तक इतिहास के प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित होने से कहीं अधिक विश्वशनीय हैं । जैन बताते हैं कि अंडमान निकोबार तक ही नहीं भारतीय इतिहास के संदर्भ में विदेशों तक में भी इनकी पुस्तकों को पढ़ा जाता है। शुरू से ही इतिहास में आपकी गहन रुचि रही है और इसी वजह से आप इस क्षेत्र में आगे आए। महत्वपूर्ण यह भी है कि आपकी किताबों की उपयोगिता को आंकते हुए अंग्रेजी के साथ – साथ मराठी भाषा में भी अनुवाद हुए और कई संस्करण प्रकाशित हुए हैं और विश्व इतिहास की गुजराती भाषा में अनुवाद कृति भी शीघ्र सामने आएगी।

आपका इतिहास के प्रति जुनून इस हद तक है कि आप हमेशा इतिहास के स्वाध्याय और लेखन में लगे रहते हैं। आपने शोध के क्षेत्र में -19 शोध विद्यार्थियों को एम.फील. और 10 शोधार्थियों को पीएच.डी. के लिए पर्यवेक्षक के रूप में मार्ग दर्शन किया। आपने बताया कि ” मध्यकालीन बही खातों का अध्ययन कर राजस्थान के आर्थिक इतिहास का संयोजन किया जा सकता है” तथा ” भट्टारक संप्रदाय – जैन समाज” जैसे कई विषयों पर 18 मौलिक शोध पत्र लिखे, जो देश के महत्वपूर्ण शोध जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। आपने 25 से अधिक सेमिनार्स में भी अपने शोध पत्रों का वाचन किया है। आपको इतिहास संबंधी प्रशिक्षण और रिफ्रेशर्स कोर्स में रिसोर्स पर्सन के रूप में आमंत्रित किया जाता रहा है।

डॉ. जैन ने राजस्थान सहित संपूर्ण भारत में के प्रतियोगी आशार्थियों के लिए कई मानक एवं संदर्भित पुस्तकें लिखकर विगत 37 वर्षों में उनके सफल होने का न केवल मार्ग प्रशस्त किया अपितु एक इतिहास रच दिया है। यह इनका ऐसा अद्भुत कार्य है जिसकी कोई सानी नहीं है। संपूर्ण भारत के विद्यार्थी इसके गवाह हैं। आप विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के माध्यम से मार्गदर्शन देते रहते हैं और आपकी विभिन्न पुस्तकें अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और अन्य सोशल मीडिया चैनल पर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ इतिहास के विद्यार्थी उठा रहे हैं ।

आपने राजस्थान और भारत के इतिहास के संदर्भ में अब तक 16 पुस्तकों का लेखन और प्रकाशन कराया है। महत्वपूर्ण पुस्तकों में ” आधुनिक विश्व इतिहास 1500 – 2000″ का 29 वां संस्करण शीघ्र ही आने वाला है। इसका अंग्रेजी और मराठी भाषा के संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं। यह पुस्तक भारतीय प्रशानिक सेवा परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है साथ ही, एम.ए.और बीए ऑनर्स के लिए कई विश्वविद्यालयों द्वारा अनुसंशित है।इस पुस्तक के मराठी में 10 और अंग्रेजी में 17 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं तथा गुजराती संस्करण प्रक्रियाधीन है। ” राजस्थान का इतिहास,संस्कृति,परंपरा और विरासत ” के सभी 32 संस्करण राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित किए जा चुके हैं। अकादमी द्वारा यह प्रथम ग्रंथ है, जिसकी 21 हज़ार प्रतियां प्रकाशित की गई हैं। पुस्तक के संयुक्त लेखक डॉ.नारायण लाल माली हैं । यह पुस्तक राजस्थान लोक सेवा आयोग की समस्त परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है और आगामी वर्ष में इसका अंग्रेजी संस्करण भी लाने की प्रक्रिया जारी है।

आपकी साझा पुस्तक ” भारत का इतिहास” डॉ.कृष्ण गोपाल शर्मा और डॉ. मुरारी लाल शर्मा के साथ, 13 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। यह पुस्तक बीए पाठ्यक्रम में राजस्थान विश्वविद्यालय से अनुसंशित पुस्तक है। डॉ.कृष्ण गोपाल शर्मा सह लेखक के साथ दो भागों में ” भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास ( प्रारंभ से 1526 और 1526 से 1950 ) के सात संस्करण बी ए के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशित हो चुके हैं । अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों में ” भारतीय ऐतिहासिक स्थल कोश” के सात संस्करण, अंग्रेजी और हिंदी में “, इनसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चरल” तथा डिब्रूगढ़ ( असम ) से प्रकाशित ” राइज ऑफ मॉडर्न वेस्ट -2020″भी शामिल हैं। आपने कई और अन्य उपयोगी पुस्तकें भी विभिन्न प्रतियोगी विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु लिखी हैं। आपने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा के स्नातक एवं स्नातकोत्तर इतिहास के पाठ्यक्रमों की लेखन सामग्री के लिए अनेक अध्यायों का भी आलेखन किया।

“राष्ट्रीय परिवेश में इतिहास लेखन के क्षेत्र में जन चेतनार्थ” के लिए आपको राजस्थान का गौरवमयी पुरस्कार ” महाराणा कुम्भा पुरस्कार 2009″ सम्मान से नवाजा गया। आपको वर्ष 2009 में गुजरात के भूतपूर्व राज्यपाल पंडित नवल किशोर शर्मा द्वारा उनके शैक्षणिक योगदान के लिए कानपुर में सम्मानित किया गया। इनके अतिरिक्त श्री राजेंद्र सिंह जी, वाटर मैन ऑफ़ इंडिया द्वारा भी आपको सम्मानित किया गया। अमेरिकन लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस द्वारा 2013 में आपकी आपकी कतिपय मानद कृतियों को स्थान दिया जाना आपके के लिए एक दुर्लभ पुरस्कार है। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों के साथ आपको नई दिल्ली में जैन वर्ल्ड मिशन द्वारा 2022 में ” जैन धर्म रत्न अंतर्राष्ट्रीय” सम्मान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ। इन महत्वपूर्ण पुरस्कार और सम्मान के अतिरिक्त कोटा के जैन समाज सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा आपको कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

इतिहासकार हुकम चंद जैन का जन्म जयपुर में 10 जनवरी 1955 को पिता स्व. चांदमल जैन और माता राज देवी के परिवार में पांचवीं संतान के रूप में पांच भाई और एक बहन के साथ हुआ। आपके दादा जी मूल चंद जैन कोटा में रियासत के समय बक्शी थे । इनकी प्रारंभिक शिक्षा से स्नातक की शिक्षा झालावाड़ में हुई। आपने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर और “जयपुर का जैन समाज और धर्म” विषय पर एम.फिल . की डिग्री प्रात की और ” इतिहास मार्तंड गौरीशंकर हीराचंद ओझा के समग्र अवदान ” विषय पर पीएच. डी.की उपाधि प्राप्त की। आपका शोध प्रबंध हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुआ। आपने 1978 से 1982 तक विजयनगर महाविद्यालय, अजमेर में इतिहास के व्याख्याता के रूप में सेवाएं प्रदान की। वर्ष 1982 में राजस्थान लोक सेवा आयोग से प्रथम स्थान पर चयनित हो कर आप राजकीय महाविद्यालय कोटा में इतिहास विभाग में व्याख्यातापद पर नियुक्त हुए।

वर्ष 1997 में आप इतिहास विभाग के विभाग प्रमुख बने। तत्पश्चात आप 2002 से 2005 तक बूंदी महाविद्यालय में सेवाएं प्रदान कर वापस कोटा महाविद्यालय में आ गए और 2013 में यहीं उपाचार्य पद पर पदोन्नत हो गए। एक वर्ष पश्चात 2014 में प्राचार्य पद पर पदोन्नत हो कर छबड़ा महाविद्यालय में नियुक्त हुए। वहां से कोटा वाणिज्य महाविद्यालय में आए और यहीं से जनवरी 2016 में प्राचार्य पद से सेवा निवृत हुए। महाविद्यालय में आपने राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी के रूप में सामाजिक सरोकारों में आगे बढ़कर भाग लिया।आपने 28 दिन का अभिनव प्रशिक्षण, 21 दिन का रिफ्रेशर कोर्स एवं पेपर सेट करने के लिए 7 दिवसीय प्रशिक्षण सहित अलीगढ़ में मध्यकालीन इतिहास पर 15 दिवसीय कार्यशाला में भाग लिया । आप कोटा विश्वविद्यालय,कोटा में बोर्ड ऑफ स्टडीज इतिहास के 13 वर्ष तक समन्वयक तथा 2 वर्ष तक प्रबंधन मंडल के सदस्य रहे। दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर बोर्ड् ऑफ स्टडीज इतिहास के सदस्य भी रहे। आप वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा के 23 वर्षों तक इतिहास परामर्शक रहे। आपने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ऑफ राजस्थान में भी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान की तथा पाठय पुस्तक सर पुर्ननिरीक्षण समिति के सदस्य रहे। कक्षा 9 एवं 11 वीं के लिए लिखी गई राजस्थान इतिहास एवं संस्कृति पर इनकी पुस्तकें लोकप्रिय हुई।

सेवा निवृति के पश्चात आप 2016 से 2019 तक अकलंक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटा में प्राचार्य पद रहे। कोटा विश्वविद्यालय में भी आपने सेवाएं प्रदान की। आप 2022 से राजस्थान विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के सदस्य हैं। आपको जयनिमेश विश्वविद्यालय , कोटा के बोर्ड् ऑफ स्टडीज इतिहास के समन्वयक नियुक्त किया गया है। आप विगत तीन वर्षों से सोफिया गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ,अजमेर के इतिहास विषय में बोर्ड ऑफ स्टडीज के समन्वयक भी हैं। आपने स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी जी, कॉविड जैसी महामारी सहित विभिन्न सामाजिक विषयों पर अनेक कार्यक्रमों में अपना उद्बोधन दिया। अपने उत्तर भारत की कई विश्वविद्यालयों में कॉविड महामारी के दौरान कई वेबिनारों में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।आप विगत 14 वर्षों से अकलंक शोध संस्थान से जुड़े हैं और अध्यक्ष पद पर भी रहे हैं।वर्तमान में आप कॉमर्स कॉलेज की प्रोफेसर स्कॉलररी के अध्यक्ष हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. जैन ने प्रतियोगी परीक्षा के सैकड़ो विद्यार्थियों को समय-समय पर नि:शुल्क अध्ययन कराया एवं मार्गदर्शन दिया। आपके विद्यार्थियों की श्रृंखला संपूर्ण हिंदुस्तान में है।

संपर्क
मोबाइल : 94141 78010

डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

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