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हे विकास! तुम अजर अमर हो, हम तुम्हारे आभारी हैं…

हे विकास तुम हमें रोता बिलखता छोड़ गए। ये तुम ही थे जिनकी वजह से हम देश सेवा र विकास का काम कर रहे थे। तुम हमें अनाथ छोड़ गए। तुम्हारी वजह से हम कितनी शांति से जी रहे थे। ये तुम ही थे जिनकी वजह से हम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव लड़ लेते थे। हम सड़कों से लेकर नालियों तक में कमिशन खा जाते थे।

तुम्हारी वजह से ही हमारे नेता और छुटभैये हमारी इज्जत करते थे। तुम थे तो हम सुहागन की तरह रहते थे। अब हम न तो विधवा रहे न सुहागन।

हे विकास! तुम कितने मासूम थे। तुम्हारी वजह से ही हमारा विकास हुआ। हम टुच्ची चंदा वसूली से सीधे हफ्ता वसूली तक आ गए। तुमने हमें विकास की राह दिखाई, नहीं तो हम तो अंधेरे कुएँ में हथ पैर मार रहे थे। तुम्हारी वजह से हम कितने ही खेतों पर, मकानों पर और दुकानों पर कब्जा कर पाए। तुम्हारे नाम की महिमा इतनी अपरंपार थी कि कई ऐसे लोग भी जमीन और मकान हथियाने में कामयाब हो गए जिनकी औकात साईकिल चोरी की भी नहीं थी।

हम सब मंत्री, विधायक, सांसद, नेता, पुलिस वाले, अफसर तुम्हारे आभारी हैं और रहेंगे। तुमने एक सच्चे दोस्त की तरह कभी हमारे खिलाफ मुँह नहीं खोला, अगर तुमने मुँह खोला होता तो हम मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहते। तुमने कितने ही बेईमानों और हरमखोरों की ज़िंदगी बना दी और अपनी ज़िंदगी दाँव पर लगा दी। तुम प्रजातंत्र के सच्चे रक्षक थे। जो काम अदालतें और सरकारें बरसों तक नहीं कर पाती थी वो काम तुम एक फोन करके कर देते थे। बरसों से अटके मुकदमें तुमने मिनटों में निपटा दिए।

तुम्हारी वजह से की लोग मृत्युलोक छोड़कर स्वर्ग को चले गए। जो काम यमराज नहीं कर पाते थे वो तुम कर देते थे। यमलोक तक में तुम्हारे चर्चे थे। लोग यमराज की जगह तुमसे डरने लगे थे।

तुम प्रजातंत्र के सच्चे प्रहरी थे। जहाँ जहाँ पुलिस, कानून, प्रजातंत्र, सरकार और अदालतें नहीं पहुँचती, वहाँ तुम पहुँच जाते। तुम बहुत न्यायप्रिय थे, तुमसे बेईमान और भ्रष्ट भी डरते थे और ईमानदार भी। तुमने लोगों को प्रजातंत्र का महत्व समझाया। तुम्हारी वजह से मंत्रियों और नेताओँ को शासन करना आया। तुम्हारे ही दम पर पुलिस थाने अपराधियों पर घात लगाते थे।

आने वाली नस्लें हम पर गर्व करेगी कि हमने विकास को पाला पोसा था।

तुम्हारे चले जाने के बाद हम सब अनाथ हो गए हैं। हमें एक बार फिर दर –दर भटकना पड़ेगा। कोई नया विकास खोजना पड़ेगा।

तुम हम सबको यही आशीर्वाद दो कि हम फिर कोई नया विकास खोज लें ताकि तुम्हारी आत्मा को भी शांति मिले और हमारी आत्माएँ भी नहीं भटके।

जो विकास पंचायतों की मीटिंगों से लेकर राज्यों के मंत्रालयों, संसद विधानसभा और लाल किले तक से शान से गूँजता था वो विकास खुद महाकाल की शरण में जाकर काल के गाल में समा गया। महाकाल ने तुम्हारी इतनी जल्दी सुनी कि तुम्हारे दर्शन नहीं करने पर भी तुम्हें अपने पास बुला लिया।

जो भी सत्ता में होता है वो विकास विरोधी ही होता है। विकास के नाम से लोग चुनाव लड़ते हैं, सांसद और विधायक बन जाते हैं मगर हे विकास! तुम तो अजर अमर हो, इस देश की सब सत्ताएँ विकास के नाम से ही चल रही है। विकास के नाम से ही सांसद, विधायक, नेता, अफसर अपना घर भर रहे हैं और विकास खाली हाथ ही रह जाता है। तुम भी खाली हाथ इस दुनिया से चले गए।

हे विकास तुम्हारी आत्मा को शांति मिले…हमारे राज़ राज़ ही रहे ताकि हम राज कर सकें…

हम हैं तुम्हारे दम पर पलने वाले और तुमको पालने वाले

हरामखोर नेता, मंत्री, विधायक, सांसद, नेता, अफसर आदि इत्यादि

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1 टिप्पणी
 

  • प्रदीप गुप्ता

    जुलाई 13, 2020 - 11:46 pm

    बहुत ही सटीक व्यंग

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