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सूचना-प्रौद्योगिकी में हिन्दी को बढ़ावा देने वैज्ञानिक पद्धति अपनाना जरूरी

भोपाल। सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी के उपयोग को प्रोत्साहित करने में केवल भावुकता से नहीं बल्कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से बात बनेगी। दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में दूसरे दिन आज ‘संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी’ सत्र की अध्यक्षता करते हुए यह बात प्रसिद्ध कवि प्रो. अशोक चक्रधर ने कही।

प्रो. चक्रधर ने कहा कि भारत सरकार के सी-डेक, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी आदि विभाग, विभिन्न कम्प्यूटर कम्पनियाँ एवं जागरूक लोगों ने कम्प्यूटर में हिन्दी का उपयोग बढ़ाने के लिये कई सॉफ्टवेयर, एप्स, इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड उपलब्ध करवाये हैं। इनका अधिक से अधिक उपयोग करने से हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का उपयोग कम्प्यूटर में बढ़ेगा।

भारत कोश पोर्टल के निर्माता श्री आदित्य कुमार ने बताया कि कम्प्यूटर को भारतीय लोगों के उपयोग के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने बताया कि भारत कोश पोर्टल में लोगों के उपयोग के लिए 31 हजार लेख, लगभग 12 हजार चित्र एवं डेढ़ लाख पेज की सामग्री हिन्दी में उपलब्ध है।

कम्प्यूटर विशेषज्ञ श्री बालेन्दु शर्मा ने बताया कि इंटरनेट की नई तकनीक से रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। कम्प्यूटर के उपयोग में हिन्दी की माँग पैदा करने से शासकीय विभाग के साथ निजी कम्पनियाँ नए-नए सॉफ्टवेयर एवं नई तकनीक लायेंगी। इससे युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे।

कम्प्यूटर विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी के उपयोग को बढ़ाने के लिए उसकी भाषा एवं उच्चारण पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कम्प्यूटर में हिन्दी के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले प्रो. सूरजभान सिंह के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि ‘लीला’ देश का हिन्दी का सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर है। इसमें विदेशी भाषाओं को ध्यान में रखकर सुधार करने होंगे।

सत्र में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ स्वर्णलता, सी-डेक के श्री एम.डी. कुलकर्णी एवं राजभाषा विकास विभाग के श्री केवल कृष्ण ने कम्प्यूटर में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में तैयार किये गये विभिन्न सॉफ्टवेयर, इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड आदि के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर विदेश राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह, वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव, कम्प्यूटर विशेषज्ञ डॉ. संजय लेले, श्री हर्ष कुमार, सत्र संयोजक डॉ. रचना विमल तथा देश-विदेश से आये हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे।

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